बच्चेदानी का मुंह खोलने के उपाय Ways to open the cervix

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बच्चेदानी का मुँह खोलने के उपाय: घरेलू, डाइट और Exercise द्वारा Ways to open the cervix: Home remedies, diet and exercise जैसे-जैसे गर्भवस्था का समय बढ़ता जाता है, वैसे ही महिलाएं अधिक उत्साहित होती जाती हैं। नौवा महीना आखिरी महीना होता है जब आपकी सारी मेहनत रंग लाती है। डॉक्टर जांच कर के पहले ही बता देते है की आपकी डिलीवरी होगी। कई मामलों में कुछ महिलाओं को डॉक्टर की दी गई डेट से पहले ही डिलीवरी हो जाती है। क्या आप बैठते समय असहज महसूस करते हैं, जैसे कि आप एक छोटे से उभार के ऊपर हों? इसका एक कारण यह हो सकता है कि आपका गर्भ या गर्भाशय आपकी कमजोर पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों के कारण नीचे गिर रहा है या नीचे खिसक रहा है। हैलो फ्रेंड्स! मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन } मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख (...

अपने ब्रेस्ट के साथ भूलकर भी न करें ये गलतियां, हो सकता हैं खतरनाक :- Don't make these mistakes with your breasts, they can be dangerous.

अपने ब्रेस्ट के साथ भूलकर भी न करें ये गलतियां, हो सकता हैं खतरनाक :- Don't make these mistakes with your breasts, they can be dangerous.

बढ़ती उम्र के साथ मह‍िलाओं में ब्रेस्‍ट संबंधी श‍िकायतें न हों इसके ल‍िए जरूरी है क‍ि कुछ जरूरी ट‍िप्‍स को रोज फॉलो करें।

हैलो फ्रेंड्स!

मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }

मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।

आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।

मह‍िलाओं के ल‍िए ब्रेस्ट (स्तन) उनकी शारीर‍िक बनावट का महत्‍वपूर्ण ह‍िस्‍सा हैं। स्तनों में ऐसे ग्‍लैंड्स मौजूद होते हैं ज‍िसकी मदद से दूध का उत्‍पादन होता है। यह दूध नवजात श‍िशु को पोषण प्रदान करता है। ब्रेस्‍ट में एस्‍ट्रोजन और प्रोजेस्‍ट्रॉन नाम के हार्मोन्‍स की मदद से ब्रेस्‍ट ट‍िशू बनते हैं जो क‍ि प्रेग्नेंसी, पीर‍ियड्स, स्‍तन के स्‍वास्‍थ्‍य को कंट्रोल करने में अहम भूम‍िका न‍िभाते हैं। ब्रेस्‍ट एक तरह की झ‍िल्‍ली से बने होते हैं। इसकी मदद से ब्रेस्‍ट कैंसर के लक्षणों को पहचानने में मदद म‍िलती है। जब मह‍िलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य में ब्रेस्‍ट इतनी अहम भूम‍िका न‍िभाते हैं, तो आपकी भी ज‍िम्‍मेदारी बनती हैं क‍ि आप अपने स्तनों की देखभाल में कोई गलती न हो। लेक‍िन अक्‍सर कुछ मह‍िलाओं की गलत आदतों के कारण ब्रेस्‍ट की देखभाल में चूंक हो जाती हैं और इसका खाम‍ियाजा भुगतना पड़ता है।

स्‍तन की बनावट पर ध्‍यान देना। Pay attention to the shape of the breast

अगर आपको लगता है क‍ि आपके स्तनों की बनावट या साइज ठीक नहीं है, तो च‍िंता न करें आप अकेली नहीं हैं। कई मह‍िलाएं आप ही की तरह ऐसा सोचती हैं क‍ि उनके ब्रेस्‍ट ज्‍यादा ढीले, छोटे या ज्‍यादा बड़े हैं। कुछ मह‍िलाओं के स्तनों पर बाल भी होते हैं। लेक‍िन स्‍तन पर बाल होना सामान्‍य है। पुरुषों की तरह मह‍िलाओं के स्तनों पर भी बाल हो सकते हैं। इसमें शर्म या डर की कोई बात नहीं है। कई मह‍िलाओं को लगता है क‍ि ब्रा न पहनने से ब्रेस्‍ट ढीले हो जाते हैं। लेक‍िन ऐसा नहीं है। ज‍िन लोगों का वजन ज्‍यादा होता है या जो मह‍िलाएं श‍िशु को ब्रेस्‍टफीड‍िंग करवा रही हैं, उन्‍हें सैगिंग ब्रेस्ट (ढीले ब्रेस्‍ट) की समस्‍या हो सकती है। आपको स्तनों की बनावट के बजाय उसकी सेहत पर ध्यान देना चाहिए।

स्‍तन के आसामान्‍य लक्षणों पर गौर न करना। Ignoring unusual breast symptoms

अगर मह‍िलाओं के स्तनों से ड‍िस्‍चार्ज हो रहा है, तो इस पर ध्‍यान दें। स्तनों का रंग संतरे के छ‍िलके के रंग या स्‍क‍िन की तरह दिखे, तो डॉक्‍टर से परामर्श जरूर लें। स्‍तन के ह‍िस्‍से में ल‍िम्‍फ नोड्स होते हैं इसल‍िए क‍िसी भी असामान्‍य गांठ को नजरअंदाज न करें। इसके अलावा इन असामान्‍य लक्षणों पर भी ध्यान दे

निप्‍पल में छाले होना

ब्रेस्‍ट में लगातार बढ़ती सूजन

स्‍तन की त्‍वचा में बार-बार छिद्र या घाव होना

न‍िप्‍पल या स्‍तन में से खून न‍िकलना

निप्‍पल में रूखापन या बदलाव आना

गलत साइज की ब्रा पहनना

गलत साइज की ब्रा पहनना मह‍िलाओं में एक बड़ी समस्‍या है। इसका सीधा असर ब्रेस्‍ट की सेहत पर पड़ता है। ज्‍यादा ढील‍ी या टाइट ब्रा पहनने से बचना चाह‍िए। ऐसा भी नहीं है क‍ि आपको हर समय ब्रा पहनने की जरूरत है। रात को सोते समय आप स्तनों को आराम दें और ब्रा हटाकर सोएं।

निप्पल पियर्सिंग करवाना। Getting a nipple piercing

आजकल मह‍िलाओं में न‍िप्‍पल प‍ियर्स‍िंग करवाने वालों की संख्‍या बढ़ रही है। यह एक तरह का फैशन बन चुका है। लेक‍िन आपको बता दें क‍ि प‍ियर्सिंग के क्षेत्र में बैक्‍टीर‍ियल इन्‍फेक्‍शन का खतरा दोगुना होता है इसल‍िए इससे बचना चाह‍िए। बैक्‍टीर‍िया आपके खून के जर‍िए ब्रेस्‍ट में जा सकते हैं ज‍िससे इन्‍फेक्‍शन ब्रेस्‍ट में फैल सकता है। अगर पियर्सिंग के कारण निप्पल में फोड़ा या घाव हो गया, तो श‍िशु को स्‍तनपान करवाने में भी आपको परेशानी हो सकती है। बेहतर है क‍ि ब्रेस्‍ट को सुरक्ष‍ित रखने के ल‍िए प‍ियर्स‍िंग से बचना चाह‍िए।

साफ-सफाई का ख्‍याल न रखना। not taking care of cleanliness

ब्रेस्‍ट मह‍िलाओं के शरीर का एक नाजुक ह‍िस्‍सा है। ब्रेस्‍ट को साफ रखने की ज‍िम्‍मेदारी भी आपकी है। रोज नहाते समय ब्रेस्‍ट की त्‍वचा को साबुन और पानी की मदद से साफ करें। ब्रेस्‍ट को ड्राईनेस और ब्रेस्‍ट एक्‍ज‍िमा से बचाने के ल‍िए न‍ियम‍ित रूप से एंटीसेप्‍ट‍िक क्रीम लगाएं। हर द‍िन साफ ब्रा पहनें और ब्रेस्‍ट एर‍िया को पसीने से बचाएं। इन ट‍िप्‍स को फॉलो करेंगी, तो ब्रेस्‍ट को हेल्‍दी रख पाएंगी।

परामर्श :- Consultation

अगर आपको स्तनों में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए

कोई भी उपाय करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।

किसी भी दवा , तेल या जेली का उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

यह एक सामान्य जानकारी है अगर आपको ब्रेस्ट से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए

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