नसों में कमजोरी के लक्षण Symptoms of nerve weakness

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नसों में कमजोरी आने पर दिख सकते हैं ये लक्षण These symptoms can be seen when there is weakness in the nerves नर्वस सिस्टम हमारे शरीर का कमांड सेंटर होता है। यह मस्तिष्क और शरीर के सभी अंगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने के लिए कोशिकाओं का इस्तेमाल करता है। साथ ही नसों का काम पूरे शरीर में रक्त प्रवाह करने का होता है। ऐसे में जब नसों में कोई दिक्कत आती है या फिर नसें कमजोर होती हैं, तो व्यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। संक्रमण, स्ट्रोक, डायबिटीज, गठिया और ट्यूमर नसों की कमजोरी के मुख्य कारण हो सकते हैं। इस स्थिति में आपको सिरदर्द और मासंपेशियों में दर्द महसूस हो सकता है। इसके अलावा भी आपको नसों में कमजोरी के कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं। आइए, नसों की कमजोरी के क्या लक्षण है? नसें कमजोर होने के क्या लक्षण है? या फिर नसों में कमजोरी आने के लक्षण क्या होते हैं? जानते हैं- हैलो फ्रेंड्स! मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन } मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा ...

स्तनपान कराने फायदे के। benefits of breastfeeding

बच्चे को स्तनपान कराने से होते हैं ये बड़े फायदे These are the major benefits of breastfeeding your baby

ब्रेस्‍टफीडिंग या स्तनपान के फायदे महिलाओं और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए वरदान से कम नहीं होता है। महिलाओं के दूध में आवश्यक खनिज, विटामिन, प्रोटीन, वसा और एंटीबॉडी पाये जाते हैं जो बच्चे के मस्तिष्क और शरीर के विकास के लिए बहुत आवश्यक होते हैं। माना जाता है कि बच्चे के जन्म के एक घंटे के अंदर बच्चे को मां का गाढ़ा पीला दूध अच्छी तरह से पिलाना जरूरी होता है और यह किसी भी हाल में नहीं भूलना चाहिए। इसके अलावा स्तनपान कराने से महिलाओं का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है और उसे समय से पहले मेनोपॉज नहीं होता है और स्तन कैंसर सहित अन्य बीमारियों से भी महिलाएं की सुरक्षा होती है।

ब्रेस्ट फीडिंग के फायदे Benefits of Breastfeeding

महिलाओं का अपने बच्चें को अपना दूध पिलाना और उसका ख्याल रखना अपनी ममता का प्रतीक होता है।

बच्चे को दूध पिलाने के फायदे से बच्चा स्वस्थ रहता है Benefits of breastfeeding your baby: Keeps the baby healthy

जन्म के कुछ वर्षों तक बच्चे का शरीर बहुत संवेदनशील होता है जिसके कारण जल्दी ही बीमारियों की चपेट में आ जाते है। बच्चे को स्तनपान कराने से उसे निमोनिया और जुकाम नहीं होता है। महिलाओं के दूध में वह सभी पोषक तत्व होते हैं जो शिशु के लिए जरूरी होते हैं। इसलिए स्तनपान कराने से बच्चे का शरीर बचपन से ही स्वस्थ बनना शुरू हो जाता है।

ब्रेस्ट फीडिंग के फायदे बच्चे का दिमाग तेज बनाने के लिए Benefits of Breastfeeding to Make Your Baby's Brain Sharp

जब महिलाएं शिशु को सीने से लगाकर स्तनपान कराती है तो इसका बच्चे पर प्राकृतिक रूप से बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। स्तनपान कराने से बच्चे का मानसिक विकास उन बच्चों की अपेक्षा ज्यादा बेहतर होता है जो बचपन में स्तनपान नहीं किये होते हैं।बचपन में अच्छी तरह स्तनपान कराने से बच्चे के सीखने, समझने और हर क्षेत्र में प्रदर्शन की क्षमता बेहतर होती है।

स्तनपान के फायदे प्लास्टिक की बॉटल से छुटकारा पाने के लिए Benefits of Breastfeeding to Get Rid of Plastic Bottles

जब बच्चा मां के स्तनों से दूध पीता है तो उसके चेहरे की मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न होता है जिसके कारण चेहरे की मांसपेशियों का विकास होता है। इसलिए स्तनपान बहुत फायदेमंद होता है। जबकि बॉटल से दूध पीने पर बच्चे के मुंह में बैक्टीरिया चला जाता है और बच्चे के लिए प्लास्टिक की बॉटल से दूध पीना नुकसानदायक भी होता है।

स्तनपान के लाभ शरीर में लव हार्मोन का स्राव करने में Benefits of breastfeeding in secreting love hormones in the body

यदि कोई महिला अपने बच्चे को अच्छी तरह से स्तनपान कराती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि बच्चे को जन्म देने के दौरान मां के शरीर से जितने खून की क्षति हुई रहती है वह दोबारा से शरीर में बन जाता है और गर्भाशय अपने सामान्य आकार में लौट आता है। स्तनपान कराने से ऑक्सीटोसिन और प्रोलैक्टिन नामक हार्मोन का स्राव होता है जिसके कारण महिलाओं को बच्चे के प्रति अधिक दुलार आता है।

वजन घटाने में स्तनपान के फायदे Benefits of breastfeeding for weight loss

आमतौर पर बच्चे को जन्म देने के बाद महिलाओं के शरीर का वजन बढ़ जाता है और उसका फिगर खराब हो जाता है। लेकिन बच्चे को काफी अच्छी तरह स्तनपान कराने से महिलाओं का मोटापा दूर हो सकता है और उन्हें हाइपरटेंशन का खतरा भी नहीं रहता है। स्तनपान के दौरान जब महिला के शरीर में दूध बनता है तब शरीर की कैलोरी अपने आप नष्ट होने लगती है जिससे शरीर फिर से पहले जैसी अवस्था में आ जाता है।

यौन रोगों से बचाव के लिए स्तनपान के फायदे Benefits of breastfeeding to prevent sexually transmitted diseases

एक दूसरी स्टडी में पाया गया है कि बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को यौन संचारित रोग(SIDS) नहीं होते हैं। यदि बच्चा एक महीने तक की उम्र का है तो उसे स्तनपान कराने से यौन संचारित बीमारियों का खतरा आधा हो जाता है।

ब्रेस्टफीडिंग कराने के फायदे मां को डिप्रेशन से बचाने में Benefits of breastfeeding in protecting the mother from depression

बच्चे के जन्म के बाद बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाओं में डिप्रेशन की संभावना कम हो जाती है। प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाएं डिप्रेशन की चपेट में आ जाती हैं। लेकिन बच्चे को जन्म देने के बाद बच्चे का शरीर मां के शरीर के संपर्क में आता है तो मां को एक अलग तरह का एहसास होता है और उसके शरीर में ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन का उत्पादन अधिक होने के कारण डिप्रेशन दूर हो जाता है।

बच्चे को स्तनपान कराते समय सावधानियां Precautions to Take While Breastfeeding Your Baby

यदि संभव हो तो मां को बेड पर लेटकर बच्चे को स्तनपान कभी नहीं कराना चाहिए। इससे बच्चे को सिर घुमाकर स्तनपान करने में तो परेशानी होती ही है साथ में दूध उसकी नाक में भी जा सकता है।

बच्चे को स्तनपान कराने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके स्तन पर कोई तैलीय पदार्थ तो नहीं लगा है। यदि लगा हो तो पहले इसे अच्छी तरह साफ करें फिर बच्चे को स्तनपान कराएं।

शिशु को कई बार स्तनपान कराने के दौरान उसके नाजुक होठों पर दूध लग जाता है और कुछ देर बाद वह सूख जाता है जिसके कारण होठों पर पपड़ी जम आती है। इससे बच्चे के मुंह में संक्रमण होने का खतरा रहता है। इसलिए जब भी ऐसा दिखे बच्चे के होठ को गीले कपड़े से पोछ देना चाहिए।

एक बार में बच्चे को एक ही स्तन से दूध पीलाएं। इससे बच्चे को दूध पीने में सुविधा होगी।

बच्चे को शांत माहौल में स्तनपान कराएं और जब बच्चा स्तनपान कर रहा हो तो उसकी उंगलियों या कानों को साफ न करें।

परामर्श Consultation

अगर लड़कियों और महिलाओं के स्तनों में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए

कोई भी उपाय करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।

स्तनों में कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।

यह एक सामान्य जानकारी है अगर लड़कियों और महिलाओं के स्तनों { ब्रेस्ट } से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए

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