40 की उम्र के बाद प्रेगनेंसी इन बातों का रखें ध्यान Pregnancy after 40 Keep these things in mind
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40 की उम्र के बाद प्रेगनेंसी इन बातों का रखें ध्यान Pregnancy after 40 Keep these things in mind
आज हर महिला आत्त्मनिर्भर रहना और आजादी से जीना चाहती है। पहले की तुलना में अभी महिलाओं के विचार ज्यादा खुले होते हैं। वे अपने जीवन का फैसला खुद लेना चाहती हैं। क्योंकि उन्हें अच्छे से पता होता है की उनके लिया क्या सही, बेहतर और आवश्यक है। यही कारण है की आज हर क्षेत्र में महिलाएं प्रदर्शन करती हुई दिखाई दे रही हैं। वे लगातार अपनी कौशल और हुनर को साबित कर रही हैं। शायद इन्ही कारणों की वजह से उनकी शादी और बच्चे तथा उनको लेकर जिम्मेदारियां कहीं न कही प्रभावित होती हैं।
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
हर महिला के लिए उसके परिवार के साथ साथ उसका करियर भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए वे अपने करियर को बेहतर बनाने के लिए या तो जल्दी शादी नहीं करती हैं और अगर शादी करती हैं तो तुरंत मां बनने का फैसला नहीं लेती हैं क्योंकि वे पहले खुद आत्मनिर्भर और कामयाब बनना चाहती हैं ताकि आगे उनके बच्चे की परवरिश में किसी तरह की कोई कमी न हो। कई बार कुछ महिलाएं एक खास समय तक खुद को मानसिक, शारीरिक या आर्थिक रूप से मां बनने के लिए तैयार नहीं समझती हैं, इसलिए भी वे सही समय का इंतजार करती हैं।
यह बात सही है की जैसे-जैसे एक महिला की उम्र बढ़ती है वैसे वैसे उसकी प्रजनन क्षमता कमजोर और गर्भधारण की संभावना कम होती है। लेकिन अपने खान पान और सेहत का सही ध्यान देकर तथा इलाज करवाने के बाद इन सभी परेशानियों को दूर कर गर्भधारण किया जा सकता है।
40 की उम्र के बाद प्रेगनेंट होना कितना संभव है How likely is it to get pregnant after 40?
जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे उनके गर्भवती होने की संभावना कम होती है। 40 से अधिक उम्र होने के बाद महिलाओं को गर्भधारण करने में ढेरों जटिलताओं एंवम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन 30 वर्ष की महिलाओं के प्रेगनेंट होने की संभावना अधिक होती है। क्योंकि उम्र बढ़ने के कारण महिला में उत्पादित अंडों की संख्या घटती है। युवावस्था के दौरान एक महिला में लगभग 3-4 लाख अंडों का उत्पादन होता है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ उम्र बढ़ते ही 40 वर्ष की महिला में 15-25 हजार अंडों का उत्पादन होता है। उम्र बढ़ने के कारण अंडों की क्वांटिटी कम और क्वालिटी बहुत खराब हो जाती है।
अंडे की क्वालिटी खराब होने के कारण फर्टिलाइजेशन ठीक तरह से नहीं हो पाता है जिससे गर्भधारण होने की संभावना कम और गर्भपात का ख़तरा ज्यादा हो जाता है। 40 से 45 वर्ष की उम्र में गर्भधारण करने पर गर्भपात का खतरा रहता है। इसके अलावा और भी दूसरी कई तरह की समस्याएं सामने पैदा हो सकती हैं। अगर आपका गर्भपात हो चुका है तो भी आपको घबराने कि आवश्यकता नहीं है क्योंकि आप गर्भपात के बाद गर्भधारण आसानी से कर सकती हैं।
40 की उम्र के बाद प्रेगनेंसी के फायदे Benefits of pregnancy after 40
इस उम्र में आप ज्यादा समझदार, मैच्योर और दुनिया से रूबरू होती हैं। जो आपको एक बेहतरीन मां बनने तथा आपके शिशु का शानदार तरीके से परवरिश करने में मदद करता है। इस दौरान आप एक ऐसी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक स्थिति में होती हैं जब आप अपने जन्म लेने वाले शिशु का पूरा भविष्य खुद डिजाइन भी कर सकती हैं। अभी आप मां बनने के लिए संपूर्ण रूप से तैयार होती हैं और आपकी सबसे पहली प्राथमिकता आपका शिशु होता है।
अपने शरीर या दूसरी चीजों कि बिना परवाह किए आप अपने शिशु को दूध पिलाने के लिए तैयार होती हैं जो की आपके साथ-साथ आपके शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। साथ ही, इस दौरान आप बहुत सहज, शांत और अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सबसे अधिक उत्सुक होती हैं। इसलिए यह निश्चित है कि इस समय आप अपना क्वालिटी टाइम अपने शिशु के साथ बिता पाएंगी। जिसकी वजह से आपके बच्चे कि परवरिश और उसकी लर्निंग में किसी तरह कि कोई कमी नहीं आएगी। 40 वर्ष कि उम्र में गर्भधारण करने पर जुड़वाँ बच्चे होने कि संभावना अधिक होती है। अगर आप स्वाभाविक रूप या किसी तकनीक कि मदद से गर्भधारण करने कि कोशिश कर रही हैं तो इस बात कि ज्यादा उम्मीद कि जा सकती है कि आप जुड़वा बच्चों को जन्म दे सकती हैं।
40 की उम्र के बाद प्रेगनेंसी के नुकसान Disadvantages of pregnancy after 40
बढ़ती उम्र में गर्भधारण करने पर ढेरों परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसमें हाई ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन शामिल हैं। प्रेगनेंसी के दौरान आपका वजन काफी तेजी से बढ़ता है। जो आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है। इतना ही नहीं, विशेषज्ञ का यह भी मानना है कि चालीस से अधिक उम्र के बाद गर्भधारण करने पर महिला को पेरिपार्टम कार्डियोमायोपैथी नामक बीमारी हो सकती है जिसके कारण उन्हें दिल का दौरा भी आ सकता है।
जो महिलाएं 40 से अधिक उम्र में गर्भधारण करती हैं उन्हें प्री-एक्लेम्पसिया नाम कि समस्या हो सकती है। जो मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है। जब कोई महिला 40 या उससे अधिक उम्र में गर्भधारण करती है तो उसे प्लेसेंटा प्रेविया नाम कि बीमारी भी हो सकती है। इस स्थिति में गर्भवती महिला के गर्भाशय ग्रीवा का द्वार बंद हो जाता है जिसके कारण नॉर्मल डिलीवरी होने कि संभावना लगभग खत्म हो जाती है।
इसलिए इस दौरान शिशु का जन्म सी सेक्शन द्वारा कराया जा सकता है जिसके दौरान काफी ब्लीडिंग होने की संभावना होती है। गर्भकालीन डायबिटीज एक ऐसी समस्या है जो अधिक उम्र कि गर्भवती महिलाओं में देखने कि मिलती है। इस बीमारी के लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते हैं। यह समस्या होने पर जन्म के दौरान बच्चे का ब्लड शुगर कम हो जाता है और जन्म लेने के बाद उसके ब्रेन डैमेज होने कि संभावना भी बढ़ जाती है। 40 से अधिक वर्ष कि महिला जब गर्भधारण करती है तो उनका गर्भपात होने का खतरा अधिक होता है। क्योंकि महिला कि उम्र अधिक होने पर अंडों कि क्वालिटी खराब हो जाती है जिससे हेल्दी प्रेगनेंसी बनाए रखने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है और अंतत गर्भपात भी हो जाता है।
सबसे पहले माता-पिता यानी पेरेंट न बनने के कारण को समझते है First of all, let us understand the reason for not becoming a parent.
फिजिकल रिलेशन जब आप टेंशन में रहते हैं, तो सीधा असर आपके लिबिडो पर पड़ता है। जो इनफर्टिलिटी की वजह है। जिससे प्रेग्नेंसी पर इफेक्ट पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि हफ्ते में तीन से चार बार फिजिकल रिलेशन जरूर हों। जिससे स्ट्रेस रिमूव हो सके।
कैफीन अगर दिनभर में 4 कप या उससे ज्यादा चाय या कॉफी पीते हैं तो बेबी कंसीव करने में ज्यादा टाइम लग सकता है। अपनी इस आदत को कम करें या न पिएं।
डाइट में सबसे पहले तो ट्रांस फूड जैसे पैकेट चिप्स, माइक्रोवेव पॉपकॉर्न, फ्राइड और फास्ट फूड्स जो इंफ्लामेशन बढ़ाने के साथ ही इंसुलिन रजिस्टेंस को भी बढ़ा देते हैं उनसे दूरी बनाएं। यही इनफर्टिलिटी की वजह बनते हैं। इसलिए इन्हें खाने से बचें।
नींद हेल्थ को दुरुस्त रखने के लिए कम से कम 8 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। इससे शरीर रिचार्ज होता है।
मोटापा मोटापे से एंड्रोजन, इंसुलिन जैसे हार्मोन इंबैलेंस हो जाते हैं। इससे ओवल्यूशन और स्पर्म क्वालिटी पर गलत इफेक्ट पड़ता है।
एक्सरसाइज स्वस्थ शरीर के लिए एक्सरसाइज बहुत जरूरी है। पर अगर बहुत ज्यादा और हैवी एक्सरसाइज करते हैं तो इससे भी फर्टिलिटी पर असर पड़ सकता है। बेबी प्लानिंग कर रहे हैं तो हल्की एक्सरसाइज करें। जिससे थकान न हो।
स्मोकिंग-अल्कोहल स्मोकिंग में होने वाले तंबाकू के धुएं में आरओएस लेवल होता है। यह स्पर्म को नुकसान पहुंचा सकता है। जबकि ओवर ड्रिंक से शरीर में विटीमिन बी की कमी हो जाती है।
न्यूट्रीएंट्स की कमी लाइफस्टाइल को सही करने के लिए सबसे पहले खानपान पर ध्यान देना चाहिए। हेल्दी डाइट लेनी चाहिए। जिससे वेट न बढ़े और जरूरी न्यूट्रीएंट्स शरीर को मिल सकें।
फीमेल फैलोपिन ट्यूब में गांठ या टीबी हो गया हो।
फीमेल को PCOD की वजह से ओव्यूलेशन की प्रॉब्लम है।
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट जब फेल हो गया हो।
गर्भधारण करने के लिए कुछ उपाय Some tips to get pregnant
- हेल्दी लाइफस्टाइल रखें
- ज्यादा मीठा और नमक न खाएं
- चिकनाई कम खाएं
- एक्सरसाइज करें
- योग और मेडिटेशन करें
- शादी के एक-दो साल में अगर दिक्कत हो रही है तो तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट कराएं
- पुरुष ठंडी जगह पर रहें। इससे स्पर्म क्वालिटी अच्छी होती है।
- महिला-पुरुष टाइट कपड़े न पहनें।
- पुरुष लैपटॉप गोद में देर तक रखकर न चलाएं।
- पुरुष और महिला दोनों ही गर्म पानी से नहाने से बचें।
- ऑयली-स्पाइसी चीजें ज्यादा न खाएं।
- रात में सोने और सुबह उठने का समय फिक्स करें।
अगर आप 40 के बाद मां बनने कि योजना बना रही हैं तो बताई गई सभी बातों पर ध्यान दें, उन्हें अच्छे समझें और डॉक्टर से मिलकर उन्हें अपनी योजना के बारे में बताएं। वे आपकी सेहत को समझने के बाद जो सलाह देंगे वो आप और आपके शिशु के लिए बेहतर होगा।
परामर्श Consultation
डेली की भाग-दौड़ भरी लाइफ और करियर बनाने की होड़ में चाहे मेल हो या फीमेल अपनी पर्सनल जिंदगी को भूल जाते हैं। समय कब निकल जाता है, आज के समय में 35-40 की उम्र में शादी करना आम बात हो गई है। ऐसे में शादीशुदा जिंदगी में सेटल होने और बेबी प्लानिंग करने में कब 3-4 साल बीत जाते हैं पता ही नहीं चलता।
25 से 30 साल के बीच की उम्र पेरेंट बनने के लिए परफेक्ट एज है। इस उम्र में शरीर का रिप्रोडक्टिव सिस्टम और दूसरे सिस्टम हेल्दी होते हैं। मेल और फीमेल दोनों फिजिकली और मेंटली हेल्दी रहते हैं।
ज्यादा उम्र में शादी करने के बाद जल्दी प्रेग्नेंट होने वाली महिलाओं को elderly Primi कहा जाता है। मान लीजिए, आप 35 साल या इससे ज्यादा उम्र में प्रेग्नेंट होती हैं तो ऐसे में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है। बच्चे को डाउन सिंड्रोम का खतरा भी रहता है। यानी बच्चा मेंटली और फिजिकली कमजोर हो सकता है
आमतौर पर महिलाएं पीरियड्स और प्रेगनेंसी को लेकर बहुत कम जागरूक होती हैं। इसलिए पीरियड्स में अनियमितता आने, सामान्य से अधिक या कम ब्लीडिंग होने, ब्लीडिंग के रंग में बदलाव या उससे बदबू आने या प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कोई समस्या होने पर वे तुरंत घबरा जाती हैं।
अगर आपको ऐसा लग रहा है कि ओव्यूलेशन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जांच करा कर इलाज करवाना चाहिए।
अगर महिलाओं को गर्भधारण करने में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
अगर महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं एवं सप्लीमेंट का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।
अगर आपको पीरियड्स या प्रेगनेंसी से संबंधित किसी तरह की कोई परेशानी या कन्फ्यूजन है तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर इस बारे में बात करना चाहिए।
यह एक सामान्य जानकारी है अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।
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