प्रेगनेंसी का नौवां महीना - जानें सभी जरूरी बातें The ninth month of pregnancy – everything you need to know
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नौवें महीने में ये संकेत मिलने का मतलब है खुल रहा है बच्चेदानी का मुंह, कुछ ही घंटों में होने वाली है डिलीवरी These signs in the ninth month indicate the uterus is opening and delivery is imminent.
डिलीवरी के समय तीन गुना से भी ज्यादा चौड़ा हो जाता है Expands more than three times wider at the time of delivery
प्रेगनेंसी का नौवां महीना एक ऐसा समय होता है, जब आप उल्टी गिनती गिनना शुरू कर देते हैं। यह गिनती होती है महीनों की उम्मीदों, असुविधाओं और इंतज़ार के बाद अपने शिशु की एक झलक पाने की। आपके चारों तरफ़ उत्साह और उम्मीद का माहौल होता है। नौवां महीना प्रेगनेंसी का आख़िरी महीना है और आपका बच्चा अब इस दुनिया में आने के लिए लगभग तैयार हो चुका है।
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
इस लेख में हम आपके और आपके बच्चे के शरीर में हो रहे ज़रूरी बदलावों, सामान्य लक्षणों और किसी भी तरह की असुविधा को मैनेज करने के लिए ज़रूरी सुझावों और डिलीवरी से पहले की तैयारियों के बारे में जानेंगे।
प्रेगनेंसी के नौवें महीने में आपके शरीर में होने वाले बदलाव Changes in your body during the ninth month of pregnancy
यह प्रेगनेंसी का आखिरी चरण है और आपका शरीर डिलीवरी के लिए तैयार हो रहा है। इसलिए, आपको अब भावनात्मक तौर पर भी बहुत कुछ महसूस होने लगता है। आइए जानते हैं कि इस समय आपके शरीर में क्या-क्या बदलाव होते हैं:
नौवें महीने में ये संकेत मिलने का मतलब है खुल रहा है बच्चेदानी का मुंह, कुछ ही घंटों में होने वाली है डिलीवरी
नौवां महीना लगते ही बच्चे के आने का इंतजार रहता है। इस महीने के आखिरी दिनों में कुछ संकेत मिलते हैं जिससे पता चलता है कि बच्चे के बाहर आने के लिए बच्चेदानी का मुंह खुलने वाला है।
प्रेग्नेंसी का नौवां महीना कई उतार-चढ़ावों से भरा होता है। इस समय आपको बहुत सतर्क भी रहना होता है क्योंकि छोटी-सी लापरवाही भी कोई बड़ी कॉम्प्लिकेशन खड़ी कर सकती है। डॉक्टर चेकअप के दौरान पहले ही बता देते हैं कि आपकी ड्यू डेट कब की है और उसके आसपास कुछ खास संकेत और लक्षण मिलने पर ये एहसास हो जाता है कि आपकी डिलीवरी कितनी नजदीक है।
- कमर और पेल्विस पर दबाव :- Pressure on the back and pelvis :- जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसके बढ़ते वजन के कारण आपकी स्पाइन पर लोड भी बढ़ता जाता है। इस वजह से आपको कमर में दर्द हो सकता है। ‘रिलैक्सिन’ नामक हार्मोन आपके पेल्विस के आस-पास के जोड़ों और लिगामेंट को ढीला करने में दर्द करता है, ताकि आपका शरीर डिलीवरी के लिए तैयार हो सके। इस वजह से कमर और पेल्विस के आस-पास दर्द होता है। हालांकि, पेल्विस पर दबाव और कमर मे दर्द सामान्य लक्षण हैं, लेकिन अगर दर्द बहुत ज़्यादा हो, तो डॉक्टर की सलाह लें।
- आकार-प्रकार में बदलाव / पेशाब करने की होती है इच्छा :- Changes in size and shape / Urge to urinate :- आपका पेट अब और बड़ा हो जाता है और जैसे-जैसे बच्चा गर्भाशय में नीचे की ओर झुकता है, तो ऊपरी हिस्से में राहत महसूस होने लगती है। इससे आप पहले के मुक़ाबले बेहतर तरीक़े से सांस ले सकती हैं। हालांकि जब बच्चे का सिर नीचे ब्लैडर और पेल्विस की ओर आ जाता है, तो इससे अक्सर आंतों और मूत्राशय पर दबाव पड़ता है। मूत्राशय पर दबाव पड़ने पर प्रेगनेंट महिला को बार-बार पेशाब करने का मन करता है या उन्हें मल त्याग करने की जरूरत लगती है। या आखिरी महीने में शिशु का आकार और साइज बढ़ने की वजह से भी मूत्राशय पर दबाव पड़ता है, जिससे बार-बार पेशाब आने की प्रॉब्लम होती है।
- बच्चेदानी का मुंह खुलना :- Opening of the cervix :- डिलीवरी होने के बच्चेदानी का मुंह खुलना सबसे ज्यादा जरूरी होता है। बच्चेदानी का मुंह खुलने पर ही बच्चा इससे बाहर निकलता है। कई महिलाओं को पता नहीं चलता कि उनकी डिलीवरी पास आ गई है। हालांकि, अगर वो अपनी ड्यू डेट के आसपास कुछ लक्षणों को समझ लें, तो जान जाएंगी कि जल्दी ही उनकी बच्चेदानी का मुंह खुलने वाला है।
- पेल्विस में प्रेशर :- Pressure in the pelvis :- जब बच्चेदानी का मुंह खुलना होता है, तो पहले यह छोटा होता है जिसमें शिशु का सिर ऊपर से नीचे की ओर आता है। इसे डिलीवरी की पोजीशन कहते हैं। इस समय आपको पेल्विक हिस्से में प्रेशर महसूस होता है।
- म्यूकस डिस्चार्ज :- Mucus discharge :- बच्चेदानी का मुंह खुलने से पहले म्यूकस प्लग निकलता है। प्लग के बाहर आने पर आपको म्यूकस डिस्चार्ज होता है। इसके बाद बार-बार डिस्चार्ज होता है और गर्भाशय ग्रीवा नया प्लग बनाने की कोशिश करती है। म्यूकस प्लग निकलने का मतलब है कि कुछ ही घंटों में डिलीवरी होने वाली है।
- स्पॉटिंग या ब्लीडिंग :- Spotting or bleeding :- बच्चेदानी जब खुलनी होती है तो उसमें खिंचाव आता है। इस समय आपको स्पॉटिंग या ब्लीडिंग हो सकती है। ऐसा कुछ होने पर तुरंत डॉक्टर से बात करें।
- सूजन :- Swelling :- प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में अतिरिक्त फ़्लूइड (तरल पदार्थ) बनते हैं और इस वजह से पैरों, टखनों, जांघों और यहां तक कि चेहरे में भी सूजन आ सकती है। हो सकता है कि आपका हाथ भी सूज जाए और उंगलियों में पुरानी अंगूठी अब फ़िट न बैठे। यह सूजन, शरीर में ख़ून की मात्रा और गर्भाशय का आकार बढ़ने की वजह से पैदा हुए दबाव के कारण होता है। हालांकि, अगर यह सूजन अचानक या बहुत ज़्यादा हो जाए, तो यह प्रीक्लेंपसिया का संकेत हो सकता है। ख़ासकर, अगर सूजन चेहरे या हाथों पर हो। ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
- स्तन में होने वाले बदलाव :- Breast Changes :- आपका शरीर अब नवजात को स्तनपान कराने के लिहाज से तैयार हो रहा होता है। नौवें महीने में, आपके स्तन और बड़े हो सकते हैं और आपके एरियोलस का रंग और गहरा होने लगता है। कुछ महिलाओं को कोलोस्ट्रम (जो एक पीला तरल होता है) का रिसाव भी महसूस हो सकता है। यह एक तरह से दूध का शुरुआती रूप है और यह पोषक तत्वों और एंटीबॉडी से भरपूर होता है। ये बदलाव इस बात का संकेत होते हैं कि आपका शरीर अब नवजात शिशु को पोषण देने के लिए तैयार है।
- ब्रैक्सटन हिक्स कॉन्ट्रैक्सन / क्रैम्प्स और कॉन्ट्रैक्शन :- Braxton Hicks Contractions / Cramps and Contractions :- 9 वां महीने डिलीवरी की तैयारी की वजह से शरीर में ब्रैक्सटन हिक्स कॉन्ट्रैक्सन महसूस हो सकता है। यह अनियमित होता है और आम तौर पर इसमें बहुत ज़्यादा दर्द नहीं होता। असल में ये कॉन्ट्रैक्शन डिलीवरी से पहले होने वाले लेबर पेन का एक तरह से अभ्यास है। लेबर की शुरुआत में बच्चे का सिर नीचे आ चुका होता है जिसका मतलब है कि अब वो बाहर आने के लिए तैयार है। इससे यूट्रस के निचले हिस्सों पर प्रेशर पड़ता है। इस प्रेशर की वजह से यूट्रस ब्रेन को सिग्नल भेजता है कि बच्चे के बाहर आने का समय हो गया है। इसके बाद ब्रेन कॉन्ट्रैक्शन पैदा करने वाले हार्मोंस को रिलीज करता है।
अगर यह कॉन्ट्रैक्शन बहुत दर्दनाक हो या फिर यह नियमित हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।
प्रेगनेंसी के नौवें महीने में आपका बच्चे का विकास Your Baby's Development in the Ninth Month of Pregnancy
नौवें महीने में आपका बच्चा पूरी तरह से विकसित हो चुका होता है। उसके ज़्यादातर महत्वपूर्ण अंग पहले ही डेवलप हो चुके होते हैं। आख़िरी कुछ हफ़्तों में उसके शरीर में कुछ ज़रूरी बदलाव आते हैं, क्योंकि बच्चे का शरीर बाहर की दुनिया के लिए ख़ुद को तैयार कर रहा होता है। नीचे इन बदलावों के बारे में बताया गया है:
- आकार-प्रकार :- Size and Shape :- नौवें महीने की शुरुआत में अमूमन आपका बच्चा लगभग 18 से 22 इंच लंबा और 2.5 से 3.5 किलो वज़न का हो जाता है। महीने के अंत तक उसका वज़न थोड़ा और बढ़ता है, लेकिन डिलीवरी की तैयारी में वज़न बढ़ने की रफ़्तार थोड़ी धीमी हो जाती है।
- स्किन और फ़ैट :- Skin and Fat :- बच्चे की त्वचा पहले झुर्रीदार और सफ़ेद कोटिंग से ढकी होती है, लेकिन नौवें महीने के दौरान वह चिकनी होने लगती है। ‘वर्निक्स’ कहे जाने वाली यह सफ़ेद कोटिंग अब कम होते-होते धीरे-धीरे ग़ायब हो जाएगी। बच्चे की त्वचा मुलायम और चिकनी हो जाएगी और उसके भीतर फ़ैट का स्तर भी बढ़ जाएगा, जो जन्म के बाद शरीर के तापमान को कंट्रोल करने में मदद करेगा।
- श्वसन प्रणाली यानी रेसपेरेटरी सिस्टम और फेफड़े :- Respiratory System and Lungs :- फेफड़ा उन अंगों में है, जो सबसे आखिरी में पूरी तरह विकसित होता है। नौवें महीने तक, आपके बच्चे के फेफड़े पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं और जन्म के बाद वह सांस लेने के लिए तैयार हो जाता है। उसके फेफड़े में ‘सर्फ़ैक्टेंट’ नामक पदार्थ विकसित हो जाता है, जो एयर सैक्स को सिकुड़ने से बचाता है और फेफड़ों को सही से काम करने में मदद करता है। इस समय, आपका बच्चा सांस लेने की गति का अभ्यास करता रहता है, जो जन्म के बाद उसके फेफड़ों को मज़बूती से काम करने में मदद करता है।
- नर्वस सिस्टम और मस्तिष्क का विकास :- Nervous system and brain development :- इस समय तक, आपके बच्चे का नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका प्रणाली और मस्तिष्क पूरी तरह विकसित हो चुका होता है। वह चूसने और निगलने जैसे काम सीख जाता है, यह अभ्यास जन्म के बाद स्तनपान के लिए ज़रूरी होता है। उसका मस्तिष्क भी चीज़ों को समझना शुरू कर देता है। कुछ शोध बताते हैं कि इस समय तक आपका बच्चा आपकी आवाज़ को पहचानने की क्षमता विकसित कर लेता है।
- पोज़िशन :- Position :- नौवें महीने के अंत तक, ज़्यादातर बच्चों के सिर का पोज़िशन नीचे की तरफ़ होता है। बच्चा अब गर्भाशय के निचले हिस्से की तरफ़ आने लगता है, तो इस प्रक्रिया को ‘लाइटनिंग’ कहा जाता है। इस स्थिति में, बच्चे का सिर जन्म नलिका (बर्थ कैनाल) के साथ तालमेल बैठा लेता है, जिससे डिलीवरी आसान हो जाती है। इस वजह से आपको ब्लैडर और पेल्विस पर ज़्यादा दबाव महसूस हो सकता है, लेकिन आपको अब अपने फेफड़ों और डायाफ़्रैम पर दबाव कम होता महसूस होगा। हालांकि, आपके बच्चे का मूवमेंट पहले से कम हो जाता है, लेकिन ज़रूरी है कि आपको यह हलचल महसूस हो।
कितना खुलता है बच्चेदानी का मुंह How much does the mouth of the uterus open?
डिलीवरी के समय तीन गुना से भी ज्यादा चौड़ा हो जाता है प्रसव के आखिरी फेज में बच्चेदानी का मुंह 8 से 10 से.मी यानि 3 से 4 इंच खुल जाता है। इसी से बच्चों का सिर बाहर निकलता है। इस स्टेज पर कॉन्ट्रैक्शन बहुत तेज उठता है और हर दो से तीन मिनट में दर्द उठता है। हर 60 सेकंड या इससे ज्यादा समय में कॉन्ट्रैक्शन उठ सकती है। इस समय आपको कंपकंपी या मतली हो सकती है।
प्रेगनेंसी के नौवें महीने के दौरान इन बातों का रखें ख़याल Keep these things in mind during the ninth month of pregnancy
नौवें महीने में अपने शरीर का ख़ास ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं कि इस दौरान क्या-क्या एहतियात बरतना ज़रूरी है:
- चलते-फिरते रहें, लेकिन आराम भी ज़रूरी है :- Keep moving, but rest is also important :- हल्की शारीरिक गतिविधियां ज़रूरी हैं, जैसे कि चलना, प्रीनेटल योग। यह आपकी मांसपेशियों को लचीला बनाए रखने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मददगार होती हैं। हालांकि, अपने शरीर की सुनना बेहद ज़रूरी है। थकान महसूस होने पर, ज़रूरत के हिसाब से आराम करें।
- पर्याप्त पानी पीएं :- Drink enough water :- शरीर में पानी की कमी की वजह से सूजन, थकान और यहां तक कि ब्रैक्सटन हिक्स कंट्रैक्शन की शिकायतें बढ़ सकती हैं। दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने की कोशिश करें। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा से आपको एम्नियोटिक फ़्लुइड का स्तर सामान्य बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- पौष्टिक आहार लें :- Eat a nutritious diet :- पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें। यह जच्चा-बच्चा दोनों के लिए ज़रूरी है। अलग-अलग तरह के फल, सब्ज़ियां, प्रोटीन और साबुत अनाज को अपनी डाइड में शामिल करें। सूजन को मैनेज करने के लिए ज़्यादा नकक खाने से बचें। अगर आपको कब्ज़ की समस्या हो रही है, तो आहार में फ़ाइबर युक्त फल, सब्ज़ियां और साबुत अनाज की मात्रा बढ़ा दें।
- रिलैक्स करने की तकनीक आज़माएं :- Try relaxation techniques :- ख़ुद को शांत रखने के लिए समय निकालना ज़रूरी है। इससे तनाव को मैनेज करने और मानसिक रूप से ख़ुद को डिलीवरी के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी। सांस से जुड़े योग योग करें।
डॉक्टर से कब मिलें? When to see a doctor
अगर शरीर में कोई असामान्य लक्षण दिखाई देता है, तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। ऐसे कुछ संकेतों के बारे में नीचे बताया गया है:
- बहुत ज़्यादा पेट दर्द या ऐंठन
- अचानक भारी सूजन, ख़ासकर हाथों, चेहरेया पैरों में
- बच्चे की हरकत में कोई असामान्य बदलाव
- हैवी ब्लीडिंग
- ज़्यादा सिरदर्द, धुंधला दिखना या अचानक वजन बढ़ना
परामर्श :- Consultation
नौवां महीना प्रेगनेंसी का आख़िरी महीना होता है और इस दौरान आपके शरीर में होने वाले बदलावों और इस दौरान बरतने वाली सावधानियों के बारे में अब आप जान चुकी हैं। ऐसे में यह याद रखना ज़रूरी है कि अब आप ज़िंदगी के एक अहम मोड़ पर आ चुकी हैं और एक नया अध्याय शुरू होने वाला है। लिहाज़ा, तैयारियों के साथ-साथ सकारात्मक माहौल बनाए रखें और डॉक्टर के साथ लगातार संपर्क में रहें। सबसे ज़रूरी बात कि बच्चे के साथ-साथ अपना ख़याल रखना न भूलें।
गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
कोई भी उपाय करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
गर्भावस्था के दौरान कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।
डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।
यह एक सामान्य जानकारी है। अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं। तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।
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