प्रेगनेंसी का सातवां महीना लक्षण शारीरिक परिवर्तन और शिशु का विकास Seventh Month Pregnancy Symptoms, Physical Changes, and Baby Development
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प्रेगनेंसी का सातवां महीना लक्षण, आहार, शारीरिक परिवर्तन और शिशु का विकास Seventh Month of Pregnancy – Symptoms, Diet, Body Changes and Baby Development
प्रेगनेंसी का सातवां महीना मां और बच्चा दोनों के लिए बेहद अहम पड़ाव होता है। इस दौरान मां और बच्चे में तेज़ी से बदलाव होते हैं। दो तिमाही के ख़त्म होने के बाद यह तीसरी तिमाही की शुरुआत है।
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
जिंदगी के इस खूबसूरत समय में शिशु के साथ साथ आपके अंदर भी कुछ बदलाव सामान्य हैं। ये बदलाव हार्मोन में असंतुलन होने के कारण आते हैं जिससे आपको किसी भी तरह का कोई ख़तरा नहीं होता है। इस समय आपको अपने खान पान पर खास ध्यान देने और ज्यादा से ज्यादा आराम करने की जरूरत होती है। जरा सी भी लापरवाही आप और आपके शिशु के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के सातवें महीने में होने वाले शारीरिक परिवर्तन Physical changes that pregnant women experience in the seventh month of pregnancy
प्रेगनेंसी के सातवें महीने में आपके शरीर में कई तरह के परिवर्तन होते हैं। इस परिवर्तन को हम प्रेगनेंसी के लक्षण के नाम से जानते हैं। प्रेगनेंसी की यह अवधि कई मायनों में बेहद अहम है और इसमें शारीरिक और मानसिक स्तर पर होने वाले बदलावों के लिए ख़ुद को तैयार रखना भी काफ़ी ज़रूरी है। इसलिए, आपको यह पता होना चाहिए कि प्रेगनेंसी के 7 महीने में कौन-कौन से लक्षण देखने को मिल सकते हैं और इन लक्षणों के बाद ख़ुद को किस तरह तैयार करें।
गर्भवती यानी प्रेगनेंट महिला का शरीर भी ख़ुद को बच्चे के हिसाब से ढालना शुरू कर देता है और इस प्रक्रिया में शरीर में कई अहम बदलाव होने शुरू हो जाते हैं।
- सूजन (एडिमा) :- Swelling (edema) :- रक्त प्रवाह और हार्मोनल बदलावों की वजह से पैरों, टखनों और हाथों में तरल पदार्थ (फ़्लुइड) जमा होने लगता है। ऐसा होना बेहद सामान्य है। लंबे समय तक खड़े होने से बचें और सोते समय पैरों को ऊंचा उठाएं। बीच-बीच में बिस्तर पर इस मुद्रा में लेटते रहें।
- ब्रैक्सटन हिक्स कॉन्ट्रैक्शन :- Braxton Hicks Contractions :- गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान प्रसव से पहले शरीर ख़ुद को इसके लिए तैयार करता है। इसलिए, गर्भाशय यानी यूट्रस में खिंचाव महसूस होता है। कई बार इस खिंचाव को लोग लेबर पेन समझ बैठते हैं, लेकिन आम तौर पर इसमें लेबर पेन के बराबर दर्द नहीं होता और यह काफ़ी अनियमित भी होता है। यह असली प्रसव से पहले शरीर को उस हिसाब से ढालने की तैयारी है। आम तौर पर यह दर्द समय से साथ कम हो जाता है, लेकिन अगर दर्द ज़्यादा और नियमित हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
- कमर दर्द और जोड़ों में तकलीफ़ :- Back pain and joint discomfort :- गर्भाशय का आकार बदलने की वजह से मां के शरीर की ग्रैविटी का केंद्र भी बदल जाता है। शरीर में तेज़ी से होने वाले इस बदलाव की वजह से कमर दर्द होना आम बात है। हार्मोन में होने वाले बदलावों के कारण, जोड़ों में ढीलापन आ जाता है, ख़ासकर पेल्विक एरिया में। यह शरीर का वह हिस्सा है जो पेट के नीचे और कूल्हे की हड्डियों के बीच होता है। प्रेग्नेंसी सपोर्ट बेल्ट का इस्तेमाल करें और अच्छा पोस्चर बनाए रखें।
- बार-बार पेशाब आना :- Frequent urination :- शिशु और गर्भ का आकर बढ़ने के कारण यूरिनरी ब्लैडर पर दबाव पड़ता है जिसके कारण आपको बार बार पिशाब करने की जरूरत पड़ती है। जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, मूत्राशय (ब्लैडर) पर दबाव भी बढ़ता जाता है। इस वजह से बार-बार पेशाब आ सकता है। यह बेहद सामान्य बात है। अगर पेशाब करते समय दर्द या जलन होती है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
- सीने में जलन और अपच :- Heartburn and indigestion :- हार्मोनल बदलाव की वजह से पाचन तंत्र रिलैक्स हो जाता है और पेट पर गर्भाशय की वजह से दबाव बढ़ता है। इसकी वजह से गर्भाशय के 7 महीने में यह लक्षण बेहद सामान्य है। ख़ासकर लेटे रहने के दौरान या फिर ज़्यादा खाना खाने के बाद। कम-कम मात्रा में खाएं और ज़्यादा तेल-मसाले से बचें।
- सांस उखड़ना :- Shortness of breath :- गर्भाशय बढ़ने की वजह से डायाफ़्राम पर दबाव बढ़ता है, जिसके कारण सांस उखड़ती है या फिर घबराहट होती है। इस दौरान कई बार आपको रात में नींद नहीं आती है। वजन ज्यादा बढ़ने के कारण आपको सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। सांस से जुड़े सामान्य व्यायाम करें और तनकर बैठें।
- मूड स्विंग :- Mood swings :- हार्मोन में तेज़ी से होने वाले उतार-चढ़ाव की वजह से महिलाओं का मूड भी तेज़ी से बदल सकता है।आपका मूड अचानक से बदलता रहता है। आप तुरंत खुश और दुखी हो जाती हैं। आप जिद्द भी कर सकती हैं। लेकिन ये सब नेचुरल है इसलिए इससे घबराने की जरूरत नहीं है। ये सब हार्मोन असंतुलन होने के कारण होता है।
- चिंता और तनाव :- Anxiety and stress :- प्रसव यानी डिलीवरी की तारीख़ नज़दीक आने पर कई महिलाओं में मानसिक तनाव बढ़ने लगता है।
- बच्चे को लेकर चिंता :- Anxiety about the baby :- कई महिलाओं में अपने बच्चे को लेकर चिंता बढ़ जाती है। उनमें बच्चे की सुरक्षा को लेकर फ़िक्र भी बढ़ जाती है और वे बच्चे के पैदा होने से पहले उसके लिए सुरक्षित माहौल या घर की कल्पना करने लग जाती हैं।
- पूरे दिन आपको नींद आती रहती है। :- You feel sleepy throughout the day :- प्रेगनेंसी के सातवें महीने में पूरे दिन नींद आना सामान्य है क्योंकि शरीर में हार्मोनल बदलाव (खासकर प्रोजेस्टेरोन), बढ़ता वजन, और नींद में खलल (जैसे बार-बार पेशाब आना, कमर दर्द) थकान और नींद की वजह बनते हैं, प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ने से थकान और नींद आती है, खासकर तीसरी तिमाही में। शिशु का आकार बढ़ने से शरीर पर दबाव पड़ता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत, पीठ दर्द और बार-बार पेशाब आने से रात की नींद टूटती है, इसलिए दिन में नींद आती है। शरीर में खून की मात्रा बढ़ने से भी थकान महसूस होती है। आयरन और अन्य पोषक तत्वों की कमी से थकान और नींद आ सकती है। गर्भावस्था से जुड़ी चिंताएं भी नींद को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे दिन में नींद आती है। भरपूर आराम करें :- जितना हो सके, दिन में छोटी-छोटी झपकी लें और रात में भी पूरी नींद लेने की कोशिश करें।सही पोजीशन में सोएं बाईं करवट सोने से बच्चे तक रक्त प्रवाह बेहतर होता है; इसके लिए मैटरनिटी पिलो का इस्तेमाल करें। पौष्टिक आहार आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड युक्त भोजन लें। हाइड्रेटेड रहें खूब पानी पिएं, लेकिन सोने से पहले कम पिएं ताकि रात में पेशाब कम आए।
- प्रेगनेंसी के सातवें महीने में संकुचन होना :- Contractions in the seventh month of pregnancy :- प्रेग्नेंसी के सातवें महीने (तीसरी तिमाही की शुरुआत) में ब्रैक्सटन हिक्स संकुचन (Braxton Hicks contractions) होना बिल्कुल सामान्य है, इन्हें 'प्रैक्टिस' या 'वार्म-अप' संकुचन कहते हैं, जो गर्भाशय को असली प्रसव के लिए तैयार करते हैं ये अनियमित, दर्द रहित या हल्के होते हैं और इनमें आराम करने या चलने से फर्क पड़ता है, लेकिन अगर ये नियमित, तेज़ या दर्दनाक हों, तो डॉक्टर से संपर्क करें.
- क्या होते हैं ब्रैक्सटन हिक्स संकुचन :- What are Braxton Hicks contractions :- ये आपके पेट का कसना और फिर ढीला पड़ना महसूस करा सकते हैं, जैसे पेट सख्त हो गया हो.ये नकली प्रसव पीड़ा (false labor) होती है जो गर्भाशय को मजबूत करती है, लेकिन गर्भाशय ग्रीवा (cervix) को नहीं खोलती. अगर संकुचन नियमित, तेज और दर्दनाक होने लगें (जैसे हर 10-15 मिनट में).संकुचन के साथ ब्लीडिंग या असामान्य डिस्चार्ज हो. आपको गंभीर दर्द या बेचैनी हो जो आराम करने से ठीक न हो. ये 37वें सप्ताह से पहले हो रहे हों और आपको लगे कि यह असली प्रसव है. खूब पानी पिएं, क्योंकि डिहाइड्रेशन से संकुचन बढ़ सकते हैं. चलें या स्थिति बदलें; ब्रैक्सटन हिक्स अक्सर आराम करने पर चले जाते हैं. शांत रहें और गहरी सांस लें; यह शरीर के बदलाव का हिस्सा है. हल्के और अनियमित संकुचन सामान्य हैं, पर असली प्रसव के लक्षणों को पहचानना ज़रूरी है.
- ज्यादा कमजोरी और थकावट :- Excessive weakness and fatigue :- प्रेग्नेंसी के सातवें महीने (तीसरी तिमाही की शुरुआत) में थकान और कमजोरी महसूस करना सामान्य है, क्योंकि शरीर में हार्मोनल बदलाव, खून की मात्रा बढ़ना, शिशु का विकास, नींद में खलल और शारीरिक असुविधाएँ (जैसे सांस फूलना, बार-बार पेशाब आना) होती हैं, जो ऊर्जा कम करती हैं; हालांकि, अत्यधिक कमजोरी या चक्कर आने पर डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है, क्योंकि यह एनीमिया या किसी अन्य समस्या का संकेत हो सकता है और पर्याप्त आराम, पौष्टिक आहार (आयरन, प्रोटीन युक्त) और हाइड्रेशन से इसमें मदद मिलती है.
- प्रेग्नेंसी के सातवें महीने में गर्मी महसूस होना :- Feeling hot during the seventh month of pregnancy :- प्रेग्नेंसी के सातवें महीने में गर्मी महसूस होना सामान्य है इस दौरान शरीर में ढेरों बदलाव होने के कारण आपको गर्मी महसूस होती है। क्योंकि हार्मोनल बदलाव प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर बढ़ने से शरीर का तापमान बढ़ सकता है, जिससे गर्मी महसूस होती है. शरीर में खून की मात्रा बढ़ने से ज़्यादा गर्मी पैदा होती है. मेटाबॉलिज्म में वृद्धि शिशु के विकास के लिए शरीर ज़्यादा ऊर्जा खर्च करता है, जिससे गर्मी बढ़ जाती है. शिशु की गर्मी: शिशु भी शरीर की गर्मी पैदा करता है, जिससे आपको ज़्यादा गर्म लग सकता है. प्रेगनेंसी का वज़न एक इंसुलेटर की तरह काम करता है, जिससे शरीर की गर्मी बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. खूब पानी, नारियल पानी, और ताज़े फलों का जूस पिएं सूती और ढीले-ढाले कपड़े पहनें ठंडे पानी से नहाएं या खुद को गीला करें. ठंडे पानी की बोतल अपने पास रखें ज़्यादा मेहनत से बचें और पर्याप्त आराम करें सीधी धूप से बचें और ठंडी जगहों पर रहने की कोशिश करें.ये गर्मी और एसिडिटी बढ़ा सकते हैं. अगर आपको बहुत ज़्यादा चक्कर आएं, सिर दर्द हो, या सांस लेने में बहुत दिक्कत हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि ये ज़्यादा गर्मी या डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते
- नसों का फूलना :- Swelling of the veins :- गर्भावस्था के सातवें महीने में शरीर में खून की मात्रा अधिक होने से नसों पर प्रेशर पड़ता है जिसके कारण वे फूल जाती हैं। प्रेग्नेंसी के सातवें महीने (तीसरी तिमाही) में बच्चे के विकास के लिए माँ के शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे नसों पर दबाव बढ़ता है । यह गर्भाशय के वजन बढ़ने, हार्मोनल बदलावों और नसों में रक्त के संचय के कारण होता है इस प्रक्रिया के चलते पैरों में सूजन (इडिमा) और नसों में दर्द हो सकता है। शिशु का विकास होने से बढ़ता गर्भाशय पेल्विक नसों पर दबाव डालता है, जिससे पैरों से दिल तक रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है। प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के कारण रक्त वाहिकाओं की दीवारें ढीली हो जाती हैं, जिससे नसों में सूजन और कमजोरी आ सकती है। बैठते समय पैरों को सहारा देकर उठा कर रखें। लगातार खड़े रहने से बचें और बीच-बीच में चलते रहें। पर्याप्त पानी पिएं ताकि शरीर में पानी का स्तर बना रहे। डॉक्टर की सलाह पर कम्प्रेशन मोज़े पहनें।
- झुकने में परेशानी होना :- Difficulty bending :- प्रेग्नेंसी के सातवें महीने में बेबी बंप का आकार काफी बढ़ जाता है जिसके कारण आपको झुकने में परेशानी होती है। कमर दर्द, और सांस फूलने जैसी शारीरिक चुनौतियां होती हैं। यह राउंड लिगामेंट पेन और बढ़ते पेट के कारण गुरुत्वाकर्षण केंद्र (center of gravity) बदलने के कारण होता है झुकने में सावधानी पेट पर दबाव पड़ने के कारण सीधे झुकने के बजाय घुटनों के बल बैठकर (squat) सहारा लेकर काम करें। शारीरिक परिवर्तन वजन बढ़ने से पैरों में सूजन (Edema), एसिडिटी, बार-बार पेशाब आना, और थकावट आम है। शिशु का विकास बच्चा इस समय हलचल करना शुरू कर देता है और बाहर की आवाज़ों पर प्रतिक्रिया दे सकता है। फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं। झटके से न उठें, भारी सामान न उठाएं और पर्याप्त आराम करें। यदि दर्द तेज हो, सांस लेने में अत्यधिक दिक्कत हो, या रक्तस्राव हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- स्तनों का संवेदनशील होना :- Breast Sensitivity :- गर्भावस्था के सातवें महीने में हार्मोनल बदलाव और दूध नलिकाओं के विस्तार (दूध भरने) के कारण स्तनों में भारीपन, संवेदनशीलता और दर्द होना एक सामान्य प्रक्रिया है। हार्मोनल उतार-चढ़ाव (एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन) के कारण स्तन छूने पर संवेदनशील, कोमल और भारी महसूस हो सकते हैं। इस दौरान स्तन काफी बड़े हो जाते हैं। निप्पल और उसके आस-पास का क्षेत्र पहले से ज़्यादा गाढ़ा या काला हो सकता है। स्तनों से गाढ़ा, पीला दूध का रिसाव जिसे कोलेस्ट्रम (colostrum) कहा जाता है, का हल्का रिसाव हो सकता है, जो बच्चे के जन्म के बाद पोषण के लिए बनता है। स्तनों में दर्द, संवेदनशीलता (tenderness) हो सकती है और शरीर में खून का बहाव बढ़ने के कारण स्तनों की नसें ज़्यादा साफ़ दिखने दे सकती हैं। स्तनों की संवेदनशीलता के कारण अचानक या जोर से छूने पर दर्द हो सकता है, इसलिए सतर्क रहें। यदि दर्द हो, तो सोते समय भी हल्की आरामदायक ब्रा पहन सकती है।
- स्तनों का साइज बड़ा होना :- Breast enlargement :- गर्भावस्था के सातवें महीने में हार्मोनल बदलावों के कारण स्तन अधिक भारी, संवेदनशील और आकार में बड़े हो जाते हैं, जबकि निप्पल और उनके आसपास का हिस्सा (एरिओला) गहरा व बड़ा हो जाता है। यह सामान्य बदलाव शरीर को स्तनपान (दूध पिलाने) के लिए तैयार करते हैं। इस समय नसों का अधिक दिखना और कोलेस्ट्रम (पीले गाढ़े दूध) का रिसाव भी आम है। बढ़ते हार्मोन के कारण स्तनों के ऊतक (tissue) बढ़ जाते हैं, जिससे स्तनों का आकार बड़ा और भारी हो जाता है। तेजी से बढ़ते स्तनों के कारण त्वचा में खिंचाव आ सकता है और स्ट्रेच मार्क्स (stretch marks) बन सकते हैं। इस चरण में बेहतर समर्थन के लिए आरामदायक और अच्छी फिटिंग वाली मैटरनिटी ब्रा पहनने की सलाह दी जाती है।
- निप्पल का रंग गहरा होना :- Darkening of the nipples :- हार्मोनल बदलावों के कारण निप्पल और एरिओला गहरे भूरे या काले रंग के हो सकते हैं। एरिओला निप्पल के आसपास का काला घेरा पर छोटे-छोटे दाने या उभार दिखाई दे सकते हैं, जिन्हें मोंटगोमरी ट्यूबरकल कहा जाता है।
- मोंटगोमरी ट्यूबरकल कब दिखाई देता है। :- When do Montgomery tubercles appear :- अगर आपने निप्पल्स को ध्यान से देखा होगा तो आपने नोटिस किया होगा कि एरोला की डार्क स्किन के आसपास की त्वचा पर कुछ छोटे बम्प्स होते हैं। कुछ अजीब लग सकते हैं, लेकिन वे वास्तव में पूरी तरह से सामान्य हैं। उन्हें मोंटगोमरी ट्यूबरकल्स (Montgomery tubercles) या मोंटगोमरी ग्लैंड (Montgomery glands) के रूप में जाना जाता है। ये बच्चे को स्तनपान कराने में मदद करते हैं। मोंटगोमरी ट्यूबरकल्स ल्यूब्रिकेशन ग्लैंड्स (Lubrication glands) हैं जो ऑयल प्रोड्यूस करती हैं और एरोलाज और निप्पल्स को ब्रेस्टफीड के दौरान सॉफ्ट रखती हैं। इन बम्प से प्रोड्यूस होने वाले ऑयल में एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं। इसके साथ ही इसमें एक स्पेशल सेंट होता है। मोंटगोमरी ट्यूबरकल (Montgomery tubercles) निप्पल के चारों ओर के गहरे रंग के हिस्से (एरिओला) पर पाई जाने वाली छोटी, सामान्य ग्रंथियां (bumps) हैं। ये वसामय (oil) ग्रंथियां होती हैं जो त्वचा को चिकनाई (lubrication) प्रदान करती हैं और स्तनपान के दौरान संक्रमण से बचाती हैं। गर्भावस्था, मासिक धर्म या हार्मोनल परिवर्तन के दौरान ये अधिक प्रमुख हो सकती हैं। मोंटगोमरी ग्रंथियां एक तैलीय पदार्थ छोड़ती हैं जो निप्पल को नम रखता है और संक्रमण से रक्षा करता है। इनकी गंध नवजात शिशु को स्तनपान के लिए आकर्षित करने में मदद कर सकती है ये छोटे दानों या 'गूजबम्प्स' की तरह दिखते हैं। गर्भावस्था के दौरान (विशेषकर 12वें सप्ताह के आसपास) ये हार्मोनल बदलाव के कारण ज्यादा बड़ी और उभरी हुई दिखाई देती हैं। इन्हें कभी नहीं दबाना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा हो सकता है। यदि इन ग्रंथियों में दर्द, सूजन, लगातार खुजली या असामान्य स्राव हो, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
- स्तनों में दूध भर जाना :- Breast engorgement :- आपके स्तनों में दूध भर जाता है और इसके अंदर से पिले रंग के दूध का रिसाव होता है।गर्भावस्था के 7वें से 8वें महीने (तीसरी तिमाही) में स्तनों से पीले या गाढ़े दूध का रिसाव होना बिल्कुल सामान्य है। यह कोलेस्ट्रम (colostrum) नामक पहला गाढ़ा दूध होता है, जो स्तनपान के लिए शरीर की तैयारी को दर्शाता है। यह बच्चे के लिए एंटीबॉडीज से भरपूर और पौष्टिक होता है। यह प्रोलेक्टिन हार्मोन के बढ़ने के कारण होता है। स्तन भारी हो सकते हैं और निप्पल का रंग गहरा हो सकता है। रिसाव को रोकने के लिए आप ब्रा में नर्सिंग पैड का उपयोग कर सकती हैं। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो गर्भावस्था के अंतिम हफ्तों में सामान्य है। यदि रिसाव में रक्त (खून) आए, अत्यधिक दर्द हो, या केवल एक ही स्तन से बहुत अधिक रिसाव हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- बेबी बंप का आकार :- Baby Bump Size :- गर्भावस्था के सातवें महीने के दौरान बेबी बंप का आकार बढ़ जाता है जिसके कारण आपको झुकने में परेशानी होती है। गर्भावस्था के 7वें महीने (तीसरी तिमाही की शुरुआत) में गर्भाशय का आकार बढ़ने से बेबी बंप काफी बड़ा हो जाता है, जिससे गुरुत्वाकर्षण केंद्र (center of gravity) बदलने और पीठ के निचले हिस्से पर जोर पड़ने के कारण झुकने में कठिनाई और असुविधा होती है। पेट का आकार बढ़ने से संतुलन बनाना मुश्किल होता है, जिससे झुकते समय कमर पर दबाव पड़ता है। बड़ा गर्भाशय फेफड़ों और पेट को दबाता है, जिससे झुकने पर सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। गर्भावस्था के हार्मोन जोड़ों को ढीला कर देते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी में खिंचाव महसूस होता है। झुकने के बजाय घुटनों के बल बैठकर (squat) कुछ उठाएं, सीधे कमर न झुकाएं। अचानक मूवमेंट से बचें और बहुत नीचे झुकने से बचें। इस चरण में कमर दर्द और पैरों में सूजन भी आम लक्षण हो सकते हैं
- भावनात्मक बंधन :- Emotional bond :- इस दौरान आप गर्भ में पल रहे शिशु के साथ एक गहरा भावनात्मक बंधन महसूस करती हैं।
प्रेगनेंसी का सातवां महीने में बच्चे का विकास Baby Development in the Seventh Month of Pregnancy
गर्भावस्था के सातवे महीने में शिशु लगभग 70% विकास कर चूका होता है। साथ ही, वह ध्वनि, संगीत या गंध के प्रति संवेदनशील हो जाता है। सातवां महीना, बच्चे के विकास के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान बच्चे में किस तरह के बदलाव होते हैं और गर्भावस्था के 7 महीने में बच्चे की स्थिति (7 मंथ प्रेगनेंसी बेबी पोजीशन) क्या होती है। आइए जानते हैं
- आकार और वज़न :- Size and Weight :- प्रेगनेंसी के सातवें महीने (28-31 सप्ताह) के अंत तक, बच्चे का वजन लगभग 1.2 से 1.8 किलोग्राम (2½ से 3½ पाउंड) और लंबाई लगभग 15 से 17 इंच (36-40 सेमी) के बीच हो जाती है। इस दौरान बच्चा तेजी से फैट जमा करता है और उसके फेफड़े व मस्तिष्क विकसित हो रहे होते हैं। 7वें महीने के अंत तक शिशु का वज़न 1000 ग्राम से लेकर 1.8 किलो या उससे अधिक तक पहुंच सकता है। बच्चा लगभग 15-17 इंच या 36-40 सेंटीमीटर तक लंबा हो जाता है। शिशु की त्वचा के नीचे चर्बी (Fat) जमा होने लगती है, जिससे त्वचा चिकनी होने लगती है और वह एक नवजात शिशु की तरह दिखने लगता है। सातवें महीने में बच्चा रोशनी और आवाज़ पर प्रतिक्रिया देने लगता है, और पलकें खोलना-बंद करना शुरू कर देता है। बच्चा पेट में ज्यादा लात मारता है, अंगड़ाई लेता है और करवट बदलता है, जिसे आप ज्यादा महसूस कर सकती हैं। शिशु पूरी तरह से विकसित कानों के साथ आवाज़ों, जैसे मां की आवाज़, पर प्रतिक्रिया दे सकता है। सातवें महीने में पोषण पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि बच्चा अपनी ऊर्जा का अधिकांश भाग वसा जमा करने में लगाता है।
- फेफड़ों का विकास :- Lung Development :- फेफड़े में सर्फ़ेक्टेंट (एक पदार्थ) बनना शुरू हो जाता है, जो जन्म के बाद फेफड़ों को फैलने में मदद करता है।प्रेगनेंसी के सातवें महीने (24-28 सप्ताह) में शिशु के फेफड़ों में महत्वपूर्ण विकास होता है, जहाँ वे वायुकोश (Alveoli) बनाना शुरू करते हैं और सर्फ़ेक्टेंट (Surfactant) नामक पदार्थ का उत्पादन शुरू करते हैं, जो जन्म के बाद सांस लेने में मदद करता है। इस दौरान, फेफड़े परिपक्व होने की प्रक्रिया में होते हैं और बच्चा सांस लेने की "प्रैक्टिस" (छद्म-सांस) भी करता है, हालांकि ये अभी पूरी तरह से परिपक्व नहीं होते हैं। फेफड़ों की कोशिकाएं विशेष तरल पदार्थ (सर्फेक्टेंट) बनाना शुरू कर देती हैं, जो फेफड़ों को फूलने में मदद करता है और उन्हें चिपकने से रोकता है। फेफड़ों के अंदर tiny air sacs यानी वायुकोश (Alveoli) बनने लगते हैं। फेफड़े अपनी संरचना को इस तरह विकसित करते हैं कि वे जल्द ही ऑक्सीजन को सोख सकें। बच्चा अपने सीने की मांसपेशियों और डायाफ्राम को हिलाकर सांस लेने का अभ्यास करता है। 28वें सप्ताह के आसपास, शिशु के फेफड़े इतने विकसित हो जाते हैं कि अगर समय से पहले जन्म (Premature birth) हो, तो बच्चा सांस लेने में सक्षम हो सकता है, हालांकि उसे चिकित्सा सहायता की आवश्यकता हो सकती है। सातवें महीने के अंत तक, फेफड़ों का विकास जारी रहता है, लेकिन वे पूरी तरह से परिपक्व 37वें सप्ताह के आसपास होते हैं।
- पाचन तंत्र :- Digestive System :- बच्चे का पाचन तंत्र अब मज़बूत हो जाता है और वह कई पोषक तत्वों को पचाना सीख जाता है।प्रेगनेंसी के सातवें महीने (तीसरी तिमाही की शुरुआत) में शिशु का पाचन तंत्र तेजी से परिपक्व होता है। आंतें, यकृत (Liver) और अग्न्याशय (Pancreas) काम करना शुरू कर देते हैं, जिससे बच्चा पोषक तत्वों को पचाना और निगलना सीखता है। शिशु पेट में एमनियोटिक द्रव (amniotic fluid) पीता है और आंतों में मिकोनियम (पहली पॉटी) बनने लगती है। शिशु सक्रिय रूप से एमनियोटिक द्रव निगल रहा है, जिससे पाचन तंत्र को विकसित होने में मदद मिलती है।पेरिस्टलसिस (peristalsis) यानी आंतों की लहरदार हरकतें शुरू हो जाती हैं, जो भोजन को पचाने के लिए बहुत जरूरी है। बच्चे के जीभ पर स्वाद कलिकाएं (taste buds) विकसित हो जाती हैं, जिससे वह मां के भोजन का स्वाद महसूस कर सकता है। पाचन तंत्र अब इतना मजबूत हो जाता है कि वह जन्म के बाद के लिए अभ्यास कर रहा होता है। आंतों में मिकोनियम का निर्माण हो जाता है, जो जन्म के बाद शिशु की पहली पॉटी होती है। इस समय तक शिशु का पाचन तंत्र काम करना सीख जाता है, हालांकि यह जन्म के बाद के लिए पूरी तरह से तैयार होने की प्रक्रिया में रहता है।
- मस्तिष्क का विकास :- Brain Development :- बच्चे के दिमाग़ का विकास इस समय बेहद तेज़ी से होता है और इस वजह से वह आवाज़, संगीत या गंध के प्रति संवेदनशील हो जाता है।प्रेगनेंसी के सातवें महीने (तीसरी तिमाही की शुरुआत) में बच्चे के मस्तिष्क का विकास बहुत तेजी से होता है। इस दौरान अरबों न्यूरॉन्स बनते हैं और वे आपस में जुड़ने लगते हैं। दिमाग में 'मायलिनेशन' (myelination) की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जो न्यूरॉन्स के बीच संकेत भेजने की गति को तेज करती है, जिससे बच्चा आवाज़ और प्रकाश पर प्रतिक्रिया (किक या हलचल) देने में सक्षम हो जाता है। मस्तिष्क तेजी से विकसित होकर अपना आकार बढ़ाता है, और सेरेब्रम में सिलवटें (grooves and ridges) बनने लगती हैं। तंत्रिका कोशिकाओं (neurons) के चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत बनने लगती है, जो सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज और कुशल बनाती है। मस्तिष्क के विकसित होने के साथ-साथ बच्चे की सुनने की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है। अब बच्चा बाहर की आवाज़ें, संगीत और माँ की आवाज़ को सुन और पहचान सकता है। सेरेबेलम (cerebellum) के तेज़ी से बढ़ने के कारण बच्चा अधिक समन्वित (coordinated) हरकतें करता है, जैसे अंगूठा चूसना, हिचकी लेना या लात मारना। बच्चा 'आरईएम' (REM - Rapid Eye Movement) नींद लेने लगता है, जो मस्तिष्क के विकास के लिए एक सक्रिय चरण है।प्रकाश और दर्द के प्रति बच्चा संवेदनशील हो जाता है, जिससे मस्तिष्क को और अधिक कनेक्शन बनाने में मदद मिलती है। इसके अलावा, बच्चे अपनी पलकें खोलना और बंद करना सीख जाता है। वह गर्भाशय में तेज़ी से घूमना और लातें मारना शुरू कर देता है।
प्रेगनेंसी के सातवें महीने के लक्षण Symptoms of the seventh month of pregnancy
गर्भावस्था के सातवे महीने में गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण आपके अंदर काफी तरह के लक्षण दिखाई देते हैं।
आपको इन लक्षणों से घबराने या डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये लक्षण नेचुरल हैं जो कुछ समय के बाद अपने आप ही दूर चले जाते हैं। आपके मन में चिड़चिड़ापन आना, अचानक से मूड बदलना, जरा सी बात पर हंसना, गुस्सा करना, रोना और जिद्द करना ये इसके सामान्य लक्षण हैं।
- पीठ में दर्द होना :- Back pain :- प्रेगनेंसी के सातवें महीने में आपका वजन काफी बढ़ता है जिसके कारण आपके पीठ में दर्द की समस्या सामने आ सकती है। इस दौरान संतुलित आहार लेने की कोशिश करें और उन सभी पदार्थों से परहेज करने जो मोटापा का कारण बन सकते हैं।
- ब्रेक्सटन हिक्स अनुभव करना :- Experiencing Braxton Hicks :- प्रेगनेंसी की इस अवस्था में आप ब्रेक्सटन हिक्स अनुभव कर सकती हैं जो थोड़े समय के लिए होता है। इसके अलावा आप पेट की समस्या से भी जूझ सकती हैं। ज्यादा परेशानी होने की स्थिति में आपको डॉक्टर से मिलकर बात करनी चाहिए।
- अचानक मूड बदलना :- Sudden mood swings :- हार्मोन में असंतुलन होने के कारण आपका मूड अचानक से बदल सकता है। किसी भी बात पर कभी आप हंस सकती हैं और किसी भी बात पर आपको कभी भी रोना भी आ सकता है। लेकिन आपको इससे घबराने की जरूरत नहीं है। ये सब आपके हार्मोन में बदलाव होने के कारण होता है जो प्रेगनेंसी के सातवें महीने में होने वाले सामान्य लक्षणों में से एक है।
- बार बार पिशाब लगना :- Frequent urination :- इस दौरान शिशु का आकार काफी तेजी से बढ़ता है जिसके कारण आपके यूरिनरी ब्लैडर और पैरों पर ज्यादा प्रेशर पड़ता है। इस वजह से आपको बार बार पिशाब लगता है और चलने में परेशानी हो सकती है। अगर आप सुबह के समय पैदल चलती हैं तो ध्यान रहे की आप प्लेन यानी की बराबर जमीन पर चलें। उबड़ खाबड़ रास्ते पर चलना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
- योनि से स्राव होना :- Vaginal discharge :- प्रेगनेंसी के सातवें महीने में शिशु के सिर का आकार बढ़ता है और यह पेल्विक क्षेत्र पर प्रेशर डालता है। जिसके कारण योनि से स्राव हो सकता है और यह बिलकुल सामान्य बात है। प्रेगनेंसी के शुरूआती महीनों में भी योनि से स्राव होता है जिसका मकसद संक्रमण को गर्भ में जाने से रोकना होता है। प्रेगनेंसी के 24 से 28 सप्ताह के दौरान योनि से रिसाव होना आम बात है लेकिन अगर इससे दुर्गंध आए तो आपको अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। इस दौरान आपके स्तनों से भी रिसाव हो सकता है जो की सामान्य लक्षणों में से एक है।
- खाना हजम नहीं होना :- Indigestion :- खाना हजम नहीं होना, पेट में गैस और कब्ज की समस्या होना, पेट फूलना, सीने में जलन होना, जी मिचलाना और तरह तरह की चीजों को खाने के मन होना आदि भी प्रेगनेंसी के सातवें महीने के लक्षण हैं। इन सभी लक्षणों की वजह से ज्यादा परेशानी होने या फिर उनके कारण किसी तरह की कोई दूसरी समस्या होने पर अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
- गतिविधि और व्यवहार :- Movement and Behavior :- मां को अक्सर बच्चे की गतिविधियों में बढ़ोतरी महसूस होती है, जैसे कि लातें मारना और पलटना। बच्चा अब बाहरी चीज़ों को लेकर संवेदनशील हो जाता है। वह अपने आस-पास के वातावरण को समझना शुरू कर देता है और स्पर्श पर भी प्रतिक्रिया जताने लग सकता है।
प्रेगनेंसी के सातवें महीने में आहार Diet in the seventh month of pregnancy
प्रेगनेंसी के सातवें महीने के लक्षण जानने के बाद यह जानना ज़रूरी है कि इस दौरान खाने में क्या-क्या लेना चाहिए, ताकि बच्चे के विकास को बढ़ावा मिल सके और मां का स्वास्थ्य भी बेहतर हो सके।
आपको आयरन, कैल्शियम, फाइबर, डीएचए, मैग्नीशियम, विटामिन और प्रोटीन आदि से भरपूर दूसरे पदार्थों का भी सेवन करना चाहिए। आपके खान पान में वो सभी चीजें शामिल होनी चाहिए जो प्रेग्नेंसी के सातवें महीने में मां और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होती हैं। इसके संबंध में आप अपने डॉक्टर से उनकी राय ले सकती हैं।
इसके अलावा, यह बेहद ज़रूरी है कि शरीर को तरल बनाए रखने यानी हाइड्रेशन बरकरार रखने के लिए दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।
प्रेगनेंसी के 7 महीने में क्या-क्या सावधानी रखनी चाहिए? What precautions should be taken during the 7th month of pregnancy?
- नींद और आराम :- Sleep and Rest :- प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में गहरी नींद मिलना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, मैटरनिटी के लिए ख़ास तौर पर बनी तकिया का इस्तेमाल करें। बाईं ओर सोने से बच्चे का रक्त प्रवाह बेहतर होता है।सोने से पहले कैफ़ीन का सेवन न करें और ज़्यादा खाने से बचें।
- बच्चे की गतिविधियों पर नजर रखना :- Monitoring your baby's movements :- बच्चे की गतिविधियों पर नज़र रखें, ताकि नियमित रूप से उसके स्वास्थ्य का आकलन किया जा सके। स्वस्थ बच्चे आम तौर पर 2 घंटे में कम से कम 10 बार मूवमेंट करते हैं। अगर आपको लगता है कि बच्चे की गतिविधि बहुत कम है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
- मानसिक स्वास्थ्य :- Mental Health :- अपने साथी, परिजन या क़रीबी दोस्तों से अपने दिल की बात कहें। ध्यान और सांस से जुड़े व्यायाम, तनाव को कम करने में मददगार होते हैं। दूसरी गर्भवती महिलाओं से बातचीत करने से आपका आत्मविश्वास बढ़ता है।
- यात्रा :- Travel :- आम तौर पर छोटे सफर में कोई तकलीफ़ नहीं होती, लेकिन डॉक्टर से पूछे बग़ैर यात्रा करने से परहेज बरतें। साथ ही, अगर डॉक्टर ने यात्रा संबंधी कोई सलाह दी है, तो उस पर ज़रूर अमल करें।
- पैरों में ऐंठन :- Leg cramps :- सोने से पहले पैरों को स्ट्रेच करें, आहार में मैग्नीशियम की मात्रा बढ़ाएं और अपनी प्यास के हिसाब से पानी पिए, ताकि आपके शरीर में पानी की कमी न हो।
- सांस फूलना या घबराहट होना :- Shortness of breath or anxiety :- गर्भाशय का आकार बढ़ने से डायाफ़्राम पर दबाव बढ़ता है। इससे सांस फूलने लगती है। सांस से जुड़ी हल्का व्यायाम करने से आपको मदद मिल सकती है।
- बड़ा पेट :- Large belly :- पेट का आकार मां के आकार, बच्चे की स्थिति और एमनियोटिक फ़्लुइड की मात्रा पर निर्भर करता है। बड़ा पेट जुड़वां बच्चों का संकेत नहीं होता है।
- सीने में जलन :- Heartburn :- सीने में जलन और बच्चे के बालों की मात्रा के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। यह सिर्फ़ हार्मोनल बदलाव की वजह से होने वाले सामान्य बदलाव के लक्षण हैं।
- व्यायाम करना ख़तरनाक :- Exercise is dangerous :- अगर कोई जटिलता नहीं है, तो हल्का और मध्यम व्यायाम अमूमन सुरक्षित होते हैं, जैसे कि चलना, स्विमिंग या प्रीनेटल योग।
- सी-फ़ू़ड :- Seafood :- सभी सी-फ़ूड हानिकारक नहीं होते। ज़्यादा मरकरी वाले मछली से बचना चाहिए, लेकिन सैल्मन और झींगा जैसी बाक़ी चीज़ें सुरक्षित होते हैं और इनसे लाभकारी ओमेगा-3 फ़ैटी एसिड मिलता है।
- सेक्स :- Sex :- अगर डॉक्टर ने मना नहीं किया है तो गर्भावस्था के दौरान सेक्स करना आमतौर पर सुरक्षित होता है। अगर आपके मन में कोई सवाल है, तो डॉक्टर से सलाह लें
- अंगों का विकास :- Development of organs :- गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान शरीर के कई अंगों का विकास होता है, जैसे कि स्तन, कूल्हे, जांघ वगैरह।
डिलीवरी की तैयारी :- Preparing for Delivery
गर्भावस्था का सातवां महीना प्रेगनेंसी की तैयारी शुरू करने का समय होता है। इस दौरान मां को संतुलित आहार लेने, सक्रिय रहने और अपनी सेहत की निगरानी करने पर ध्यान देना चाहिए। पार्टनर को भावनात्मक और शारीरिक रूप से महिलाओं की मदद करनी चाहिए, इससे डिलवरी तक की यात्रा आसान हो जाती है।
प्रेगनेंसी के 7 महीने के बाद नियमित रूप से अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें और किसी भी असामान्य लक्षणों की सूचना उन्हें तुरंत दें।
परामर्श :- Consultation
गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
कोई भी उपाय करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
गर्भावस्था के दौरान कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।
डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।
यह एक सामान्य जानकारी है। अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं। तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।
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