बच्चों को आ रही है बार-बार हिचकी Children are having frequent hiccups
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आमतौर पर बच्चे को हिचकी आना सामान्य है, पर अगर लगातार हिचकियां आ रही हैं तो इसके पीछे स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। छोटे बच्चों को हिचकी आना बहुत आम है, लेकिन इसके कई कारण हो सकते हैं।
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
पेरेंट्स होने के नाते हम सभी चाहते हैं कि हमारे बच्चों को किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो, खासकर नवजात शिशुओं को। अगर बच्चों को थोड़ी भी तकलीफ होती है, तो इससे माता-पिता को भी दुख होता है। छोटे बच्चों का बहुत अधिक ख्याल रखने की जरूरत होती है वे छोटी-छोटी चीजों से भी प्रभावित हो जाते हैं। अक्सर आपने देखा होगा कि छोटे बच्चों को बार-बार हिचकियां आती हैं। जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है। पेरेंट्स होने के नाते हम उनकी हिचकियों को बंद करने के हर मुमकिन कोशिश करते हैं, लेकिन फिर भी बच्चे की हिचकियां बंद नहीं होती हैं। उस समय बस हमारे मन में बस यही सवाल होता है कि बच्चे कि हिचकियों को बंद करने के लिए क्या करें?
बच्चे के जन्म के साथ ही बच्चों को किसी न किसी तरह की परेशानी होती ही रहती है। खासकर नवजात शिशुओं को तो तकलीफें होना आम बात मानी जाती है। कई बार नवजात शिशु दूध को सही तरीके से पचा नहीं पाता है, जिसके कारण दूध की उल्टी, गैस के कारण पेट में दर्द जैसी तकलीफ होती है। बच्चों को होने वाली परेशानियों को देखकर पेरेंट्स भी दुखी हो जाते हैं।
बच्चों को बार-बार हिचकी आने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जिन्हें समझना बहुत जरूरी है।
नवजात शिशु को हिचकी आना सामान्य बात होती हैं आमतौर पर हम सभी को समय समय पर हिचकी का अनुभव होता है, लेकिन जैसे जैसे हम बड़े होते जाते हैं हिचकी आनी कम हो जाती है। नवजात शिशु को सबसे ज्यादा हिचकी आती है, यहां तक कि छह हफ्ते की प्रेगनेंसी के बाद ही भ्रूण को हिचकी आने लगती है। लेकिन इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं होती है। यह हिचकी एक मिनट से लेकर एक घंटे तक रह सकती है लेकिन बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती है।
वास्तव में नवजात शिशु को हिचकी आना बहुत सामान्य होता है और कुछ शिशु तो हिचकी का आनंद भी लेते हैं लेकिन अगर लंबे समय तक हिचकी आये तो यह किसी अन्य समस्या का कारण हो सकता है। इसलिए असल वजह को जानना बेहद जरूरी हो जाता है। हम आपको नवजात शिशु को हिचकी आने के कारण और घरेलू इलाज और बचाव के बारे में बताने जा रहे हैं। जानें बच्चों की हिचकी कैसे रोकें।
बच्चों को बार-बार हिचकी आने के क्या कारण हैं What are the reasons for frequent hiccups in babies?
आमतौर पर नवजात शिशु को हिचकी आने के कई कारण होते हैं। माना जाता है कि नवजात शिशु को पहली बार हिचकी तब भी आ सकती है जब वह मां के गर्भ में होता है। वास्तव में बच्चे को दूसरी तिमाही में भी हिचकी आ सकती है क्योंकि वह अम्नियोटिक तरल पदार्थ को निगल जाता है।
जब बच्चा पेट में होता है तो वह तभी हिचकियां लेने लगता है। प्रेगनेंसी के दूसरी तिमाही में बच्चे को पेट में ही हिचकियां आने लगती हैं। बच्चे को हिचकियां आने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। जब बच्चा छोटा होता है तो उसका रिफिक्स पूरी तरह से विकसित नहीं होता है। इस स्थिति में बच्चे के पेट में मौजूद खाना वापस भोजन नली में चला जाता है। जिससे बच्चे की नसों की कोशिकाओं में एसिड पैदा होने लगता है और डायफ्राम में दिक्कत होने लगती है। इससे बच्चे को हिचकियां आने लगती हैं।
बच्चे को बार-बार हिचकी आने की वजहें / नवजात शिशु को हिचकी आने का कारण Reasons for frequent hiccups in a baby / Reasons for hiccups in a newborn baby: -
अधिक मात्रा में दूध पीने के कारण :- Due to excessive consumption of milk
बच्चे को अगर दूध सही तरीके से न पिला जाए तो कई बार दूध पचने के बजाय ग्रास नली में अटक सकता है। एसिड रिफ्लक्स की इस स्थिति में बच्चे को हिचकी आ सकती है।
अगर बच्चे को बोतल से दूध ज्यादा पिलाया जाता है तो इससे बच्चे का पेट फूलता है। इस स्थिति में डाय डायफ्राम खिंचने लगता है जिससे ऐंठन शुरू होती है और बच्चे को हिचकियां आने लगती हैं। इसके अलावा कई अन्य कारण भी हो सकते हैं
वयस्कों की तरह की बच्चों को भी हिचकी आना एक सामान्य प्रक्रिया है। जब पेरेंट्स बच्चों को जल्दी-जल्दी दूध पिलाते हैं या ज्यादा मात्रा में दूध पिला देते हैं, तो उन्हें हिचकी की समस्या होती है। दरअसल, जब बच्चा बहुत कम समय के गैप में दूध पिता है, तो इसकी वजह से बच्चे का पेट फूलने की समस्या होने लगती है। इस कारण बच्चे को हिचकी आती है। वहीं, खाने की नली में दूध या हवा के फंसने के कारण भी हिचकी की समस्या हो सकती है।
जब बच्चे के खाने की नली में दूध फंसता है, तो ब्रीदिंग प्रॉब्लम शुरू होती है, जिसकी वजह से उन्हें हिचकी आती है। अगर बच्चे को 5 से 10 मिनट तक हिचकी समस्या होती है, तो यह एक आम बात है। लेकिन हिचकी के कारण बच्चा ज्यादा परेशान हो रहा है, रोने लगता है, तो इस स्थिति में पेरेंट्स को डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बच्चे को पिलाए जाने वाले दूध में मौजूद प्रोटीन बच्चे की भोजन नली में सूजन पैदा कर सकता है। जो डायफ्राम को प्रभावित करता है और हिचकियों को ट्रिगर करता है।
अधिक हवा निगलने के कारण Causes of swallowing excess air :- बॉटल से दूध पीते समय बच्चा दूध के साथ अधिक मात्रा में हवा भी निगलता है क्योंकि स्तन की अपेक्षा वह बॉटल से तेजी से दूध खींचता है। दूध के साथ बच्चे के पेट में हवा जाने के कारण बच्चे के पेट में सूजन हो जाती है जिसके कारण उसे हिचकी आने लगती है।
एलर्जिक रिएक्शन के कारण :- due to an allergic reaction
फॉर्मूला मिल्क में पाये जाने वाले कुछ प्रोटीन एलर्जिक रिएक्शन पैदा करते हैं जिसके कारण बच्चे के भोजन की नली (esophagus) में सूजन हो जाती है, इसे इओसिनोफिलिक इसोफैजिटिस (Eosinophilic Esophagitis) कहा जाता है। एलर्जी के कारण बच्चे का डायफ्राम बहुत तेजी से स्पंदन करता है जिसके कारण उसे हिचकी आने लगती है।
अस्थमा होने के कारण :- due to asthma
बच्चे को अस्थमा होने पर उसके फेफड़ों के ब्रोंकियल ट्यूब (bronchial tubes) में सूजन आ जाती है जिसके कारण फेफड़ो में वायु का प्रवाह रूक जाता है। इसके परिणामस्वरूप बच्चा सही ढंग से सांस नहीं ले पाता है और उसका गला घरघराने लगता है और उसे हिचकी आनी शुरू हो जाती है।
प्रदूषकों के कारण :- due to pollutants
नवजात शिशु की श्वसन प्रणाली (respiratory system) बहुत संवेदनशील होती है और धुंआ, प्रदूषण या तीक्ष्ण गंध के कारण बच्चे के श्वसन तंत्र में कफ जम जाता है। बच्चे को बार बार खांसी आने के कारण डायफ्राम पर दबाव पड़ता है और घरघराहट की आवाज आने लगती है जिसके कारण बच्चे को हिचकी शुरू हो जाती है।
तापमान गिरने के कारण :- Due to the drop in temperature
कभी कभी तापमान गिरने के कारण नवजात शिशु की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं जिसके कारण डायफ्राम भी सिकुडने लगता है और इसके परिणामस्वरूप बच्चे को हिचकी आने लगती है।
गैस्ट्रोएसोफैजिएल रिफ्लक्स के कारण :- Causes of gastroesophageal reflux
गैस्ट्रोएसोफैजिएल रिफ्लक्स एक ऐसी अवस्था है जिसमें पेट का भोजन, भोजन नली में जाता है। नवजात शिशु को रिफ्लक्स इसलिए होता है क्योंकि उनका निचला एसोफैजन स्फिन्क्टर (oesophageal sphincter) अविकसित होता है जो एसोफैगस और पेट के बीच में स्थित होता है और यह भोजन को ऊपर जाने से रोकता है जिसके कारण डायफ्राम में घरघराहट शुरू हो जाती है और बच्चे को हिचकी आने लगती है।
नवजात शिशु की हिचकी रोकने के उपाय :- Ways to stop hiccups in a newborn baby
नवजात बच्चों को हिचकी आना कोई बड़ी समस्या नहीं मानी जाती है इसलिए घर पर ही बेहद आसान तरीकों से हिचकी का इलाज किया जा सकता है। आइये जानते हैं शिशु को हिचकी आने पर क्या उपाय करना चाहिए।
बच्चे की पीठ पर मसाज करने से तुरंत बंद हो जाएगी हिचकी Massaging your baby's back will stop the hiccups immediately.
हिचकी से निपटने का एक सीधा तरीका है। बच्चे को अपने कंधे पर एकदम सीधे लिटाएं और बच्चे की पीठ पर सर्कुलर मोशन में पीठ को सहलाएं। इसके बाद बच्चे को बिस्तर पर लेटाकर उसके पेट पर भी इसी तरह से मसाज करें। बच्चे के पेट पर हल्के हाथों से मसाज करें और अधिक दबाव न दें। मसाज करने से डायफ्राम का तनाव कम होता है और हिचकी रूक जाती है।
शिशु को हिचकी आने पर शुगर चटाएं Feed sugar to your baby when he has hiccups
हमेशा से हिचकी के लिए एक पुराना उपाय रहा है। यदि आपका बच्चा कुछ ठोस खा सकता है तो हिचकी आने पर उसकी जीभ पर चीनी के कुछ दाने रखें। लेकिन यदि बच्चा ठोस (solid) नहीं खा सकता है तो घर पर ही चीनी घोलकर एक गाढ़ा द्रव बनाएं और बच्चे को उंगली से चटाएं। लेकिन यह ध्यान रखें कि आपकी उंगली बिल्कुल साफ होनी चाहिए। शुगर बच्चे के डायफ्राम में खिंचाव को कम करता है और हिचकी आनी बंद हो जाती है।
हिचकी बंद करने के लिए बच्चे को ग्राइप वॉटर पिलाएं Give your baby gripe water to stop hiccups.
बच्चे में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं के कारण भी उन्हें हिचकी आती है इसलिए हिचकी रोकने के लिए बच्चे को ग्राइप वॉटर (gripe water) पिलाना चाहिए। गैस्ट्रिक जैसी समस्याओं का इलाज करने के लिए ग्राइप वॉटर बहुत फायदेमंद होता है। और इसे पीने के बाद हिचकी रूक जाती है। ग्राइप वॉटर को आप पीने के पानी के साथ मिलाकर बच्चे को पिला सकती हैं। क्योंकि ग्राइप वॉटर में कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं जिसे नवजात शिशु को हजम करने में दिक्कत हो सकती है इसलिए डॉक्टर से सलाह लेकर ही ग्राइप वॉटर पिलाएं।
नवजात शिशु की हिचकी रोकने के लिए उसका ध्यान भटकाएं Distract your newborn to stop hiccups
नवजात शिशु की हिचकी रोकने का एक बेहतर तरीका यह है कि जब भी उसे हिचकी शुरू हो तो आप शिशु को ध्यान इधर उधर भटकाएं। जैसे आप इसे किसी खिलौने या कोई ऐसी चीज जिसे वह पहचान पाता है और देखने के बाद पकड़ने की कोशिश करता है, उसके सामने वह चीज लाएं। यह मांसपेशियों में अकड़न के कारण आती है जो तंत्रिका आवेगों (nerve impulses) को सक्रिय करती है। बच्चा जब अपने पसंदीदा खिलौनों को छूता है तब उसके तंत्रिका उत्तेजना में परिवर्तन होता है जिसके कारण उसकी हिचकी बंद हो जाती है।
दूध पिलाने के बाद बच्चे को सीधा रखें, नहीं आएगी हिचकी Keep the baby upright after feeding to prevent hiccups.
जब भी बच्चे को दूध पिलाएं, दूध पिलाने के बाद उसे 15 मिनट तक लंबवत पोजीशन में या बिल्कुल सीधे रखें। नवजात शिशु को दूध पिलाने के बाद सीधा रखने से उसका डायफ्राम नैचुरल पोजीशन में रहता है और मांसपेशियों में घरघराहट पैदा नहीं होता जिसके कारण शिशु को हिचकी भी नहीं आती है। छोटे बच्चों को कम समय के गैप में दूध पिलाने से बचें।
बच्चे को कुछ भी खिलाते समय कोशिश करें उसे सीधा लिटाकर खिलाएं। आप बच्चे को तकिए पर सीधा लिटाकर भी खिला सकती हैं। ताकि वह सीधा रहे और खाते समय वह हवा कम अंदर ले।
बच्चे को दूध पिलाने के बाद कंधे पर रखकर उसे हल्की थपकी जरूर दें। ताकि डायफ्राम सही पोजीशन में रहे। इससे हिचकी आने से बचाव होगा।
बच्चे को दूध पिलाते वक्त हमेशा ध्यान रहे बच्चे का सिर थोड़ा ऊंचा रखें, ताकि दूध उल्टी दिशा में ग्रास नली में प्रवाहित न हो।
बच्चे को सीधा बैठाएं या पीठ पर लेकर थपकी देते हुए डकार दिलाए। जब बच्चा दूध पिता है, तो अपने मुंह में कुछ हवा भी लेकर चला जाता है। जब आप पीठ को थपथपाते हैं, तो डकार के जरिए गैस बाहर निकल जाती है। ऐसा करने से बच्चे को हिचकी से राहत मिल जाती है।
बच्चे के मुंह में चीनी डालें या उसे शुगर सिरप पिलाएं, ऐसा तब करें जब बच्चे ने कुछ ठोस या भारी खाया हो।
जब बच्चे को बार-बार हिचकियां आने लगे तो उसे अपनी गोद में उल्टा करके लिटा लें। इसके अलावा आप उसे अपने कंधे पर भी रख सकते हैं उसकी पीठ को सर्कुलर मोशन में रखने की कोशिश करें।
अगर हिचकी के साथ ही बच्चे के सांस लेते वक्त किसी तरह की आवाज आ रही है तो संभव है कि उसे सांस संबंधी समस्या हो। इसके लिए बच्चे को डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
अगर दूध पिलाने के बाद हर बार हिचकी की समस्या आ रही है तो बेहतर होगा कि बच्चे की जांच जरूर कराएं, ताकि संभावित समस्या का पता चल सके।
परामर्श :- Consultation
नवजात शिशु को लंबे समय तक कम मात्रा में कई बार दूध पिलाएं। इससे उसे हिचकी नहीं आएगी।
बच्चे को बॉटल या स्तन से दूध पिलाते समय उसे लंबवत पोजीशन या 35 से 45 डिग्री के कोण पर रखें, शिशु को हिचकी नहीं आएगी।
अगर बच्चा बैठ नहीं पाता है तो उसके पीठ के पीछे तकिया लगाकर उसे बैठाएं या उसके पीछे खुद बैठें और इसके बाद उसे बॉटल से दूध पिलाएं। इससे हवा बच्चे के मुंह में नहीं जाएगी और हिचकी नहीं आएगी।
जब बच्चे को डकार आ जाए तो दूध पिलाना बंद कर दें।
बच्चे को दूध पिलाते समय उसके गले से आने वाली आवाज को सुनें। अधिक हवा निगलने के बाद उसके गले से घरघराहट की आवाज सुनायी देती है तो दूध पिलाना बंद कर दें।
अगर आपके बच्चे को किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए
कोई भी उपाय करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें
बच्चों को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत डॉक्टर से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन कराने से बचें।
बच्चों में कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।
यह एक सामान्य जानकारी है अगर आपके बच्चे को किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए
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