नसों में कमजोरी के लक्षण Symptoms of nerve weakness

Image
नसों में कमजोरी आने पर दिख सकते हैं ये लक्षण These symptoms can be seen when there is weakness in the nerves नर्वस सिस्टम हमारे शरीर का कमांड सेंटर होता है। यह मस्तिष्क और शरीर के सभी अंगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने के लिए कोशिकाओं का इस्तेमाल करता है। साथ ही नसों का काम पूरे शरीर में रक्त प्रवाह करने का होता है। ऐसे में जब नसों में कोई दिक्कत आती है या फिर नसें कमजोर होती हैं, तो व्यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। संक्रमण, स्ट्रोक, डायबिटीज, गठिया और ट्यूमर नसों की कमजोरी के मुख्य कारण हो सकते हैं। इस स्थिति में आपको सिरदर्द और मासंपेशियों में दर्द महसूस हो सकता है। इसके अलावा भी आपको नसों में कमजोरी के कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं। आइए, नसों की कमजोरी के क्या लक्षण है? नसें कमजोर होने के क्या लक्षण है? या फिर नसों में कमजोरी आने के लक्षण क्या होते हैं? जानते हैं- हैलो फ्रेंड्स! मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन } मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा ...

सोते समय या नींद में झटके क्यों लगते हैं Why do we get jerks while sleeping?

क्या सोते समय अचानक झटके लगना कोई बीमारी है?



सोते समय कई बार लगता है कि आप कहीं ऊंचाई से गिर रहे हैं।

आप बिस्त से गिर रहे है और अचानक निंद खुल जाती है। तो आइए आज जानते हैं इसका कारण।

नींद में सोते वक्त, जो झटके लगते हैं उन्हें हाइपनिक जर्क या फिर स्टार्टर स्लीप के नाम से जानते हैं। ये झटके तब महसूस होते हैं, जब व्यक्ति न पूरे तरीके से सोया रहता है और न ही जागा रहता है। ये झटका उस समय महसूस होता है, जब आप कच्ची नींद में होते हैं। अक्सर सोते समय कई बार लगता है कि आप कहीं ऊंचाई से गिर रहे हैं। तो, कई बार झटका जैसा लगता है। एैसा लगता है जैसे आप बिस्त से गिर रहे है और अचानक निंद खुल जाती है। तो आइए आज जानते हैं इसका कारण।

हैलो फ्रेंड्स!

मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }

मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें।

आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।

सोते समय झटके लगना

नींद में अचानक से झटका महसूस करना, आमतौर पर बहुत से लोगों की समस्या है। कई बार तो लोग इस चीज से इतना डर जाते हैं कि उन्हें दोबारा नींद नहीं आती। लेकिन, कभी आपने सोचा है कि ये होता क्यों है। आप अचानक से कैसे, नीचे गिरता हुआ महसूस करते हैं। दरअसल, ये सब आपके दिल और दिमाग का खेल है। क्यों और कैसे, जानते हैं इस बारे में।

क्यों सोते समय अचानक झटके लगते हैं

आमतौर पर यह घटना नींद के पहले चरण में होती है जब हार्ट रेट और सांस धीरे होने लगती है। हाइपनिक जर्क कोई डिजीज नहीं है और ना ही कोई नर्वस सिस्टम डिस्‍ऑर्डर है। यह अचानक मसल्‍स के झटके हैं जो नींद आने के कुछ घंटों में आ सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक, सोते समय झटके महसूस होना सामान्य बात है।

नींद में झटके लगने के कारण

नींद में झटके लगने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे कि नींद के समय आपकी मांसपेशियां पूरी तरह से आराम करती हैं। भले ही यह नींद आने का एक सामान्य हिस्सा है, आपका मस्तिष्क गलती से मान लेता है कि आप वास्तव में गिर रहे हैं और आपकी मांसपेशियों को मरोड़ कर प्रतिक्रिया करता है कई बार जब आपके दिल की गति कम होती है तो आपका ब्रेन चेक करता है और आप को एक मैसेज करता है जिससे शरीर अचानक से झटके से जग जाता है। ज्यादा कैफीन लेना, तेज एक्सरसाइज, भावनात्मक तनाव और नींद की कमी भी इसका कारण बन सकती है।

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप गहरी नींद में सो रहे हैं और अचानक एक झटका महसूस होने के कारण नींद खुल जा रही है? क्या आप सोते समय अचानक उछल पड़ते हैं? वास्तव में ऐसा हाइपनिक जर्क (hypnic jerks) के कारण होता है। ये कोई रोग नहीं है और ना ही कोई नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर है। यह अचानक मांसपेशियों के या शारीरिक झटके हैं जो नींद आने के कुछ घंटों में आ सकते हैं। इसे मायोक्लोनिक जर्क के रूप में भी जाना जाता है। दुनिया में लगभग 70 फीसदी लोगों को इसका अनुभव हो सकता है।

  1. अगर आप परेशान या तनाव ग्रस्त हैं तो आपको सोते समय हाइपनिक जर्क अनुभव हो सकता है।
  2. सोने से पहले शराब या कैफीन लेना इसका एक कारण हो सकता है। इसलिए सोने से पहले इन चीजों को पीने से बचें।
  3. शाम के समय ज्यादा एक्सरसाइज कर लेना, यह कैल्शियम, मैग्नीशियम या आयरन की कमी के कारण हो सकता है।
  4. अनकम्फ़र्टेबल पोजीशन में सोना या कच्ची नींद में सोना। ऐसा माना जाता है कि ऐसे में दिमाग का आधा हिस्सा एक्टिव रहता है।

नर्व को उत्तेजित (stimulants) करने वाली दवाओं का ओवरडोज़ हो जाने पर या बिना डॉक्टर की सलाह के केमिस्ट की दुकान से ली गई दवाओं (ओटीसी) से यानि जिन दवाओं की सामग्री (ingredients) के बारे में आपको जानकारी न हो के अधिक इस्तेमाल से भी हाइपनिक जर्क होने का खतरा होता है।

क्यों और कब होता है

यह आमतौर पर सोने के पहले तब होता है जब हार्ट रेट और सांस धीरे होने लगती है। हालांकि अगर आप थके हुए हैं, तो आपको ये जल्दी हो सकता है।

जब मल्सल रिलैक्स होती हैं और ब्रेन एक्टिव होता है, तो यह स्थिति झटके का संकेत है। क्योंकि ब्रेन कैमिकल के साथ झटका दे सकता है जिससे आपको झटका लग सकता है और आप उठ सकते हैं।

कई मामलों में मैग्नीशियम, कैल्शियम और विटामिन बी 12 जैसे पोषक तत्वों की कमी के कारण भी झटका लग सकता है।

इससे बचने के लिए क्या करें

  1. रोजाना कम से कम आठ घंटे की नींद लें और सुबह लगभग एक ही समय पर उठने की कोशिश करें।
  2. सोने से छह घंटे पहले एक्सरसाइज़ करने से बचें।
  3. सोने से पहले रिलैक्सेशन टेक्निक्स या गर्म पानी से नहाकर थोड़ा रिलैक्स हो जाएं।
  4. सोने से पहले सोडा, कॉफ़ी या अन्य कैफीन वाली चीजें पीने से बचें।
  5. तनावपूर्ण कामों को दिन के समय ही खत्म करने की कोशिश करें।

इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम और कैल्शियम का सेवन करें। मीठे और नमकीन पदार्थ कम खाएं बजाय इसके फ्रूट्स और वेजिटेबल ज्यादा खाएं।

परामर्श

अगर आपके शारीर में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए।

शारीर में कोई भी परेशानी हो रहा है तो कोई भी उपाय करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें।

किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत डॉक्टर से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।

कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।

यह एक सामान्य जानकारी है अगर आप किसी भी बीमारी से ग्रसित हैं या कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।

Comments

Popular posts from this blog

किशोरावस्था क्या है? What is adolescence?

अपने प्यार को मजबूत बनाने के लिए: कुछ तरीके

लड़की के पीरियड्स क्या होते हैं ?