कम उम्र में पीरियड्स? होना
- Get link
- X
- Other Apps
कुछ लड़कियों को कम उम्र में ही क्यों शुरू हो जाते हैं पीरियड्स? जानें कारण
कम उम्र में पीरियड्स होना लड़कियों के लिए सही नहीं है। इसके पीछे मोटापा और जंक फूड का सेवन करने जैसे कारक जिम्मेदार होते हैं।
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।
आमतौर पर लड़कियों को पीरियड्स 12 से 14 साल की उम्र में शुरू होते हैं। ऐसा आमतौर पर प्यूबर्टी के बाद होता है। लेकिन, मौजूदा समय में यह देखा जा रहा है कि कई लड़कियों को 10 साल से कम उम्र में ही पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। यह स्थिति हर पेरेंट्स को डरा देती है। जाहिर है, इतनी कम उम्र में कोई भी बच्ची पीरियड्स साइकिल को न तो समझ सकती है और न ही खुद को सही तरह से संभाल सकती है। इस तरह की स्थिति को हम प्रीकोशियस प्यूबर्टी के नाम से जानते हैं। प्रीकोशियस प्यूबर्टी उस स्थिति को कहते हैं, जब बच्चा समय से पहले ही जवान होने लगता है। ऐसा आपकी बेटी के साथ न हो, उसकी ग्रोथ सामान्य बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि आप प्रीकोशियस प्यूबर्टी के बारे में सब कुछ जानें। सर्टिफाइड न्यूट्रिशनिस्ट-इनफेंट एंड यंग चाइल्ड फीडिंग, बीडीएस डॉ. नितिशा ने इंस्टा में एक वीडिया शेयर कर कम उम्र में पीरियड्स होने की वजह के बारे में बताया। साथ ही पेरेंट्स इस स्थिति से कैसे बच सकते हैं, इस बारे में जानकारी भी दी।
मोटापा है वजह :-
आजकल बहुत सारे ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें कम उम्र में ही प्यूबर्टी की समस्या होने लगती है। ऐसा होना सही नहीं है। अर्ली प्यूबर्टी की वजह से बच्चे की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। बच्चियों को कम उम्र में ही पीरियड्स शुरू होने की एक मुख्य वजह चाइल्डहुड ओबेसिटी है। असल में, मोटापे की वजह से शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ती है और एस्ट्रोजन नाम के हार्मोन के स्तर में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिलती है। एस्ट्रोजन महिलाओं में पाया जाने वाला हार्मोन है। यह हार्मोन महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों के लिए काफी हद तक जिम्मेदार होता है। वहीं, अगर कम उम्र में ही इस हार्मोन में तेजी से बदलाव होने लगें, तो 10 साल से कम उम्र की लड़कियों में पीरियड्स होने की प्रॉब्लम हो सकती है।
जंक फूड का सेवन करना :-
कम उम्र में पीरियड्स शुरू होने के पीछे एक वजह, जंक फूड का काफी ज्यादा मात्रा में सेवन भी है। दरअसल, कुछ सालों पहले तक घरों में मांएं हेल्दी और पौष्टिक चीजें बनाया करती थीं। लेकिन, हाल के सालों में महिलाएं वर्किंग हो गई हैं, इसलिए घर में प्रोसेस्ड फूड या जंक फूड खाए जाने का ट्रेंड बढ़ गया है। जंक फूड या प्रोसेस्ड फूड के सेवन की वजह से मोटापा बढ़ता है और इंसुलिन का स्तर भी बढ़ता है। नतीजतन कम उम्र में लड़कियों को प्रीकोशियस प्यूबर्टी का सामना करना पड़ता है।
प्लास्टिक का इस्तेमाल करना :-
आज की तारीख में प्लास्टिक का इस्तेमाल हर घर में काफी ज्यादा बढ़ गया है। क्या आप जानते हैं, कैसे? बच्चे प्लास्टिक की वॉटर बोतल में पानी पीते हैं, प्लास्टिक के टिफिन में खाना खाते हैं और घर में प्लास्टिक के कंटेनर में मसालें, दाल रखे जाते हैं। प्लास्टिक के तत्व खाने की चीजों में घुस जाते हैं। अगर किसी फूड आइटम में प्लास्टिक घुस जाए, तो यह सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक होता है, क्योंकि प्लास्टिक में बीपीए होता है। इससे हार्मोन प्रभावित होते हैं। यहां तक कि एनसीबीआई में प्रकाशित एक रिपोर्ट से भी यह स्पष्ट होता है कि अर्ली प्यूबर्टी के लिए बीपीए को भी जिम्मेदार माना गया है।
आनुवांशिक वजह का होना :-
किसी लड़की को कम उम्र में पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो इस स्थिति में कुछ किया नहीं जा सकता है। कई बार, लड़कियों को इसलिए कम उम्र में पीरियड्स होने लगते हैं, क्योंकि उसकी फैमिली में किसी के साथ ऐसा हुआ होता है। कम उम्र में पीरियड्स होना किसी बीमारी की ओर संकेत नहीं करता है। अगर इस तरह की समस्या परिवार में पहले से रही है, तो भावी पीढ़ी को भी यह प्रॉब्लम हो सकती है। यही नहीं, कई बार प्रीकोशियस प्यूबर्टी की वजह थायराइड और ट्यूमर का होना भी हो सकते हैं।"
पेरेंट्स क्या करें :-
बच्चों से कहें फिजिकली एक्टिव रहें।
प्लास्टिक की चीजों में बच्चों को खाना खाने न दें।
बच्चों को जंक फूड से दूर रखें और हेल्दी चीजें खाने को दें।
बच्चों को प्लास्टिक रैप फूड खाने के लिए न दें। यह भी कई तरह की समस्याओं से जुड़े होते हैं।
अगर कम उम्र की लड़किया किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो उस वजह से कम उम्र में ही पीरियड्स आ रहें हैं तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें
परामर्श :-
आमतौर पर महिलाएं पीरियड्स और प्रेगनेंसी को लेकर बहुत कम जागरूक होती हैं। इसलिए पीरियड्स में अनियमितता आने, सामान्य से अधिक या कम ब्लीडिंग होने, ब्लीडिंग के रंग में बदलाव या उससे बदबू आने या प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कोई समस्या होने पर वे तुरंत घबरा जाती हैं।
अगर आपको ऐसा लग रहा है कि ओव्यूलेशन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जांच करा कर इलाज करवाना चाहिए।
अगर महिलाओं को गर्भधारण करने में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
अगर महिलाओं को र्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं एवं सप्लीमेंट का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।
अगर आपको पीरियड्स या प्रेगनेंसी से संबंधित किसी तरह की कोई परेशानी या कन्फ्यूजन है तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर इस बारे में बात करना चाहिए।
यह एक सामान्य जानकारी है अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment