स्तनों में पर्याप्त दूध ना बनने के कारण Due to insufficient production of milk in the breasts
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महिलाओं के स्तनों में पर्याप्त दूध ना बनने के कारण Reasons for insufficient milk production in women's breasts
हर स्तनपान कराने वाली महिलाए चाहती है कि, वो अपने शिशु को अच्छा पोषण दे और इसके लिए वो अपनी ब्रेस्टफीडिंग डाइट का पूरा ध्यान रखती है। लेकिन कई बार महिलाओं को स्तनों में कम दूध बनने की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्तनपान के दौरान शिशु का चिड़चिड़ा होना या दूध पीने के एक घण्टे बाद ही उसे दोबारा भूख लगना, आपके स्तनों में कम दूध बनने के संकेत हो सकते हैं
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
संख्या में दुग्ध ग्रन्थियां ना होने से स्तनों में कम दूध बनता है Due to the lack of milk glands in sufficient numbers, the breasts produce less milk.
विभिन्न कारणों से कुछ महिलाओं के स्तन सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाते हैं और उनमें दूध बनाने के लिए पर्याप्त दुग्ध ग्रन्थियां नहीं होती हैं। हर गर्भावस्था के दौरान स्तनों में दुग्ध नलिकाएं और दुग्ध ग्रन्थियां विकसित होती रहती हैं, इसलिए कुछ महिलाओं के स्तनों में पर्याप्त दूध ना बनने की समस्या पहली डिलीवरी के बाद दिखाई देती है। इसके अलावा बच्चे को स्तनपान करवाने से स्तनों में दुग्ध ग्रन्थियां बढ़ती हैं और इससे दूध का उत्पादन बढ़ सकता है। स्तनों में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए आप ब्रेस्ट पम्पिंग हाथों से या एक विशेष उपकरण से स्तनों से दूध निकलने की मदद ले सकती हैं। ऐसा माना जाता है कि ब्रेस्ट पम्पिंग से स्तन ज्यादा दूध बनाने के लिए प्रेरित होते हैं और इससे शिशु के स्तनपान के लिए पर्याप्त दूध बनने लगता है।
हॉर्मोन संबंधी समस्याओं की वज़ह से स्तनों में पर्याप्त दूध नहीं बन पाता है Hormonal problems can cause the breasts to not produce enough milk.
अगर महिलाओं को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), थायरॉइड कम या ज्यादा होना, शुगर, हाई ब्लड प्रेशर या प्रेगनेंसी हॉर्मोन एस्ट्रोजेन व प्रोजेस्ट्रॉन संबंधी समस्याएं हैं, तो उसके स्तनों में शिशु के स्तनपान के लिए पर्याप्त दूध नहीं बन पाता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया इन हॉर्मोन्स के स्तर पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में अपनी हॉर्मोन संबंधी परेशानी का इलाज करवाने से स्तनों में दूध का उत्पादन सामान्य हो सकता है, इसके बारे में डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।
स्तनों का ऑपरेशन होने की वजह से उनमें कम दूध बनता है Breast surgery can cause them to produce less milk
महिलाओं की ब्रेस्ट सर्जरी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे स्तन की गाँठ आदि। इन ऑपरेशन की वजह से स्तनपान में आने वाली समस्याएं अलग अलग हो सकती हैं। ये इन बातों पर निर्भर करता है कि, ऑपरेशन को कितना वक्त बीत चुका है, ऑपरेशन से स्तन को कितना नुकसान हुआ है। अधिकांश मामलों में डॉक्टर की सलाह से ली गयी थैरेपी और दवाएँ स्तनों में दूध का उत्पादन बढ़ा सकती हैं, लेकिन अगर आपका दूध नहीं बढ़ रहा है तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
हॉर्मोनल गर्भ निरोधक के उपयोग से स्तनों में दूध की मात्रा घट सकती है Using hormonal contraceptives can decrease the amount of breast milk.
कुछ दवाएँ खाने से स्तनों में दूध बनना कम हो सकता है
स्तनपान करवाने वाली कई महिलाए सेक्स के दौरान हॉर्मोनल गर्भ निरोधक दवाइयां लेती हैं, लेकिन कुछ महिलाओं को उनके स्तनों में दूध की मात्रा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। लेकिन कुछ महिलाओं में हॉर्मोनल गर्भ निरोधक दवाओं की वजह से दूध का उत्पादन कम हो सकता है। अगर आप शिशु के चार माह का होने से पहले इन गर्भ निरोधक दवाओं का उपयोग करने लगती हैं, तो आपके स्तनों में दूध की मात्रा घटने की संभावना ज्यादा होती है। स्तनों में दूध की मात्रा फिर से सामान्य करने के लिए सबसे पहले हॉर्मोनल गर्भ निरोधक दवाएँ लेना बंद करें। अगर आप किसी रोग के इलाज के तौर पर ये दवाएँ ले रही हैं, तो एक बार डॉक्टर को अपनी समस्याएं ज़रूर बताएं।
अगर शिशु ठीक से स्तनपान नहीं कर पा रहा है, तो महिलाओं के स्तनों में दूध बनना घट सकता है If the baby is not able to breastfeed properly, the milk production in the women's breasts may decrease
अगर शिशु को किसी प्रकार की शारीरिक समस्या या विकार होने की वजह से स्तनपान करने में परेशानी हो हो रहीं है, तब भी आपके स्तनों में दूध बनना कम हो सकता है।
रात के समय शिशु को स्तनपान ना करवाने से महिलाओं के स्तनों में दूध बनना कम हो सकता है
कई महिलाए शिशु को ज्यादा देर तक सुलाने के लिए कुछ ऐसे तरीके अपनाती हैं, जिनसे वह रात को स्तनपान करने के लिए भी नहीं जागता है। कुछ महिलाओं को यह तरीका बेहतर लग सकता है, लेकिन शिशु को रात में स्तनपान ना करवाने से उनके स्तनों में दूध का उत्पादन घट सकता है और इससे शिशु के विकास में रुकावट भी आ सकती है। हर महिलाओं के स्तनों की दूध स्टोर करने की क्षमता अलग अलग होती है, रात में शिशु को स्तनपान नहीं कराने से उसके स्तनों में दूध भरा रह सकता है, जिससे दूध बनाने वाले हॉर्मोन का स्राव कम हो जाता है और दूध का उत्पादन घटने लगता है। महिलाओं को अपने स्तनों में दूध का उत्पादन बढ़ाने या नियमित रखने के लिए, शिशु को रात के समय स्तनपान करवाना बेहद ज़रूरी है।
ज्यादा देर रुक कर शिशु को स्तनपान करवाने से महिलाओं के स्तनों में दूध का उत्पादन कम हो सकता है Breastfeeding for too long can reduce the production of milk in women's breasts.
महिलाओं के स्तनों में शिशु को स्तनपान कराने के लिए लगातार दूध बनता रहता है, लेकिन दूध बनने की दर इस बात पर निर्भर करती है , कि स्तन कितने खाली रहते हैं। आपके स्तन खाली होने पर उनमें ज्यादा दूध बनता है और उनके भरे रहने पर दूध का उत्पादन घट जाता है। ऐसे में अगर आप शिशु को अनियमित रूप से स्तनपान करवाती हैं, तो आपके स्तन ज्यादा समय तक भरे रहने के कारण उनमें दूध बनना कम हो जाता है। अगर आप बच्चे को नियमित रूप से स्तनपान करवाती हैं, तो आपके स्तनों में दूध की मात्रा भी नियमित रहती है।
प्रसव के समय दी गई दवाओं या शिशु को पीलिया होने की वजह से भी महिलाओं के दूध का उत्पादन घट सकता है woman's milk production may also decrease due to medications given during delivery or jaundice in the baby.
ज्यादातर महिलाएं यह बात नहीं जानतीं कि प्रसव के दौरान उन्हें दी गयी दवाएँ, जैसे एपीड्यूरल एनेस्थीसिया या डेमेरोल आदि शिशु के सही तरह से लैच करके स्तनपान करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। शिशु पर इनका असर कितने दिनों तक रहेगा, यह दवा की मात्रा और समयावधि पर निर्भर करता है,
शिशु को बाहर दूध पिलाने से महिलाओं के स्तनों में दूध बनना कम हो जाता है Breastfeeding reduces the production of milk in the breasts of women.
डिलीवरी के बाद शुरुआती कुछ हफ़्तों में अगर आप शिशु को स्तनपान कराने की जगह बाहर दूध पिलाती हैं, तो इससे आपके स्तनों में दूध का उत्पादन कम हो सकता है। प्रसव के बाद के शुरुआती समय में स्तनों में बनने वाले दूध की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है, कि स्तनों से बाहर कितना दूध निकल रहा है। अगर आप शिशु को कम स्तनपान करवाएंगी और बाहर का दूध पिलाएँगी, तो स्तनों में दूध भरा रहने की वजह से दूध बनना कम हो जाएगा। शिशु को केवल स्तनपान ही करवाएं, उसे फॉर्मूला दूध ना पिलाएं। लेकिन अगर किसी कारण से शिशु को बाहर का दूध पिलाना पड़ता है, तो भी उस के साथ ही साथ स्तनपान करवाना जारी रखें। इसके अलावा स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को पौष्टिक भोजन खाना चाहिए, ताकि उनके स्तनों में पर्याप्त दूध बन सके। अगर आपके स्तनों में शिशु के स्तनपान के लिए पर्याप्त दूध नहीं बन पा रहा है, तो आप डॉक्टर से सलाह ले
परामर्श Consultation
बच्चे की अच्छी हेल्थ के लिए स्तनों में दूध की बराबर मात्रा होना बहुत जरूरी है। अगर आपको भी डिलिवरी के बाद स्तनों में दूध की कमी महसूस हो रही है तो आप डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।
स्तनों में दूध की कमी होने पर आप डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर आपको कुछ दवाएं सजेस्ट करेंगे।
अगर लड़कियों और महिलाओं के स्तनों में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए
कोई भी उपाय करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
स्तनों में कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।
यह एक सामान्य जानकारी है अगर लड़कियों और महिलाओं के स्तनों { ब्रेस्ट } से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए
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