बच्चेदानी का मुंह खोलने के उपाय Ways to open the cervix

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बच्चेदानी का मुँह खोलने के उपाय: घरेलू, डाइट और Exercise द्वारा Ways to open the cervix: Home remedies, diet and exercise जैसे-जैसे गर्भवस्था का समय बढ़ता जाता है, वैसे ही महिलाएं अधिक उत्साहित होती जाती हैं। नौवा महीना आखिरी महीना होता है जब आपकी सारी मेहनत रंग लाती है। डॉक्टर जांच कर के पहले ही बता देते है की आपकी डिलीवरी होगी। कई मामलों में कुछ महिलाओं को डॉक्टर की दी गई डेट से पहले ही डिलीवरी हो जाती है। क्या आप बैठते समय असहज महसूस करते हैं, जैसे कि आप एक छोटे से उभार के ऊपर हों? इसका एक कारण यह हो सकता है कि आपका गर्भ या गर्भाशय आपकी कमजोर पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों के कारण नीचे गिर रहा है या नीचे खिसक रहा है। हैलो फ्रेंड्स! मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन } मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख (...

प्रेगनेंसी का आठवां महीना लक्षण Eighth Month of Pregnancy Symptoms

प्रेगनेंसी का आठवां महीना लक्षण, खान पान, शारीरिक बदलाव और शिशु का विकास Eighth Month of Pregnancy Symptoms, Body Changes, and Baby Development, Diet

प्रेग्नेंसी का आठवां महीना, प्रेग्नेंसी के आखिरी चरणों में शामिल होता है। आठवें महीने में एक तरफ जहां महिलाएं बेहद उत्सुक रहती हैं। वहीं, दूसरी तरफ उनमें डिलीवरी को घबराहट भी बनी होती है। खासकर, जो महिला पहली बार मां बनने वाली होती है, उसे ज्यादा चिंता और डर रहता है। लेकिन इस महीने में भी महिलाओं को कुछ लक्षणों और बदलावों का सामना करना पड़ता है। आठवें महीने में गर्भाशय का आकार काफी बढ़ जाता है, जिसकी वजह से उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

हैलो फ्रेंड्स!

मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }

मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।

आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।

प्रेगनेंसी का आठवां महीना चुनौतिपूर्ण भरा हो सकता है। जैसे-जैसे आप प्रेगनेंसी के अंतिम चरण के क़रीब आती हैं, आपके शिशु का विकास तेज़ी से होने लगता है और आपका शरीर डिलीवरी के लिए ख़ुद को तैयार करने में जुट जाता है। आठवां महीना न सिर्फ़ उत्साह और चुनौतियों का होता है, बल्कि इस समय आपको आने वाले दिनों की तैयारियां भी शुरू करनी होती हैं। वजह साफ़ है महीने भर बाद आपके घर में किलकारी गूंजने वाली है।

प्रेगनेंसी की इस स्टेज में आपको अपने खान पान और दैनिक जीवन पर बहुत ही खास ध्यान देना चाहिए। क्योंकि आपके गर्भ में पल रहा शिशु इस दुनिया में आने के लिए लगभग पूरी तरह से तैयार हो चुका होता है। आपका खान पान और दैनिक जीवन की गतिविधियां किसी न किसी तरह से आपके शिशु को प्रभावित करती हैं। इसलिए यह आवश्यक है की आप इन सभी चीजों का खास ध्यान रखें। खान पान के अलावा प्रेगनेंसी के आठवें महीने के दौरान आपको कुछ सावधानियां बरतनी भी जरूरी है।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में आपके शरीर में होने वाले बदलाव Changes in your body during the eighth month of pregnancy

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में आपके शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। ये सभी बदलाव आपके शरीर में हो रहे हार्मोनल असंतुलन और गर्भ में बढ़ रहे शिशु के कारण होते हैं। इसलिए आपको इससे घबराने की जरूरत नहीं है।

आपका शरीर, शिशु के विकास के हिसाब से ढालने के लिए ख़ुद में बदलाव करता रहता है। आठवें महीने में होने वाले बदलावों के हिसाब से ख़ुद को अडजस्ट करना बेहद ज़रूरी है। इसलिए, आइए जानते हैं कि प्रेगनेंसी के आठवें महीने में आपके शरीर में किस तरह के बदलाव होते हैं।

  1. ब्रेक्सटन हिक्स कंट्रैक्शन :- Braxton Hicks Contractions :- इस दौरान ब्रेक्सटन हिक्स कंट्रैक्शन कई बार महसूस हो सकता है। इसे प्रैक्टिस कंट्रैक्शन भी कहा जाता है, क्योंकि ये असल में लेबर पेन जैसा महसूस होता है, लेकिन इसकी तीव्रता उतनी ज़्यादा नहीं होती। यह अनियमित और कम दर्द भरा होता हैं और यह यूटरस को डिलीवरी के लिए तैयार करता है।
  2. सांस लेने में तकलीफ :- Difficulty breathing :- शिशु और गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण सांस लेने में परेशानी। यूटरस यानी गर्भाशय के बढ़ने से डायाफ़्रैम पर दबाव बढ़ता है, जिससे गहरी सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है। इस वजह से आपको रोज़मर्रा के काम करने के दौरान थकान का अनुभव हो सकता है।
  3. सूजन और फ़्लूइड का संचय :- Swelling and fluid accumulation :- शरीर में और हाथ, पैर और चेहरे पर सूजन होना। गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान टखनों, पैरों और हाथों में हल्की सूजन सामान्य है। ऐसा शरीर में द्रव यानी फ़्लूइड के संचय और रक्त प्रवाह के बढ़ने की वजह से होता है। परेशानी को कम करने के लिए लेटते समय अपने पैरों को ऊंचा रखें और लंबे समय तक खड़े रहने से बचें।
  4. कमर दर्द :- Back pain :- गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान शिशु के बढ़ते वजन और हार्मोन में होने वाले बदलावों की वजह से आपकी कमर पर दबाव बढ़ता है। इससे बचने के लिए सपोर्टिंव पिलो (तकिया) का इस्तेमाल करें और सही पोश्चर अपनाएं।
  5. योनि से होने वाले डिसचार्ज में बढ़ोतरी :- Increased vaginal discharge :- गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के आठवें महीने में योनि से होने वाले डिसचार्ज में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसका मतलब है कि आपका शरीर ख़ुद को डिलीवरी के लिए तैयार कर रहा है। यह बेहद सामान्य लक्षण है। हालांकि, अगर डिसचार्ज में दुर्गंध हो या इस दौरान खुजली और जलन भी महसूस हो, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
  6. पेल्विक में दबाव :- Pelvic pressure :- गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के आठवें महीने में बेबी बंप का आकार बड़ा हो जाता है। और आपके शरीर का संतुलन नीचे की तरफ़ झुकता है इसलिए पेल्विक हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है। इस वजह से आपको जल्दी जल्दी पिशाब लगना। कभी-कभी पिशाब लीकेज भी हो सकता है। और चलने और बैठने में असुविधा हो सकती है।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में शिशु का विकास Baby Development in the Eighth Month of Pregnancy

प्रेगनेंसी के आठवें महीने यानी की प्रेगनेंसी के 29 से 32वें सप्ताह के दौरान शिशु अपने विकास के आखिरी स्टेज में होता है और इस समय उसके शरीर में काफी तेजी से बदलाव आते हैं। इस दौरान शिशु जन्म लेने के लिए तैयार होता है और उसके अंदर हो रहे सभी बदलाव को आप महसूस भी करती हैं।

गर्भावस्था के आठवें महीने तक आपका शिशु प्री-टर्म चरण में होता है, लेकिन अब वह बाहरी दुनिया में जीने के लिए लगभग तैयार हो चुका होता है। अगर इस समय डिलीवरी होती है (जिसे मेडिकल भाषा में प्रीमैच्योर बर्थ कहते हैं), तो शिशु को थोड़ी मेडिकल सहायता की ज़रूरत हो सकती है, लेकिन बच्चे के स्वस्थ रहने की संभावना बहुत ज़्यादा होती है। आइए जानते हैं, इस समय शिशु में क्या-क्या बदलाव होते हैं:

  1. आकार और वजन :- Size and Weight :- शिशु की लंबाई अब लगभग 16 से 18 इंच और वजन 2 से 2.5 किलोग्राम तक हो जाता है। उसके वजन में तेज़ी से बढ़ोतरी होती है और त्वचा के नीचे फ़ैट की परतें जमा हो जाती हैं। इससे जन्म के बाद शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
  2. मस्तिष्क का विकास :- Brain Development :- शिशु का दिमाग काफी तेजी से विकसित होता है क्योंकि इस समय न्यूरॉन्स तेजी से बढ़ते हैं। शिशु का मस्तिष्क इस महीने तेज़ी से विकसित होता है। नई नर्व कनेक्शन बनने लगती हैं, जो शिशु के सीखने, सोचने और महसूस करने की क्षमता की नींव तैयार करती हैं। मस्तिष्क अब सांस और शरीर के तापमान जैसी ज़रूरी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लायक़ हो जाता है।
  3. फेफड़े और रेसपेरेटरी सिस्टम यानी श्वसन प्रणाली :- Lungs and Respiratory System :- शिशु के फेफड़े अभी परिपक्व नहीं होते, लेकिन ये लगभग पूरी तरह विकसित होने के क़रीब पहुंच जाते हैं। सांस लेने की प्रक्रिया में मदद करने वाले सर्फ़ैक्टेंट नामक पदार्थ का निर्माण हो रहा होता है। अगर शिशु का जन्म इस समय होता है, तो उसे सांस लेने में थोड़ी सहायता की ज़रूरत पड़ सकती है।
  4. मूवमेंट :- Movement :- शिशु का आकार और वजन बढ़ने से गर्भ में कम जगह बचती है जिसके कारण वो कम से कम घूम या हिल डुल पाता है।यूटरस यानी गर्भाशय में जगह कम होने की वजह से शिशु की हरकतें पहले के मुक़ाबले अब थोड़ी धीमी पड़ सकती है, लेकिन आप अभी भी उसकी लात मारने, पलटने और अन्य गतिविधियों को महसूस कर सकती हैं। चूसने जैसी स्किल उसके भीतर विकसित हो रही होती है, जो बाद के दिनों में स्तनपान के लिए ज़रूरी है।
  5. त्वचा और बाल :- Skin and Hair :- शिशु की त्वचा पर मौजूद लैनुगो (नरम बाल) धीरे-धीरे झड़ने लगता है। हालांकि, कुछ बाल जन्म के समय भी शरीर पर मौजूद रह सकते हैं। वर्निक्स केसोसा नामक मोम जैसा पदार्थ डिलीवरी की तैयारी में मोटा होने लगता है। इसका मुख्य काम त्वचा की सुरक्षा करना होता है।
  6. पोज़िशन :- Position :- आठवें महीने तक ज़्यादातर शिशु का सिर नीचे की तरफ़ आ जाता है, जो डिलीवरी के लिए सबसे उपयुक्त है। अगर आपका शिशु अभी भी उल्टी पोजिशन में है, तो आपका डॉक्टर शिशु को सही पोज़िशन में लाने के विकल्पों के बारे में आपको बता सकता है।

गर्भावस्था के आठवें महीने के लक्षण Symptoms of the Eighth Month of Pregnancy

अब आप अपनी प्रेगनेंसी के आठवें महीने में कदम रख चुकी हैं। आपने इस खूबसूरत पल के सात महीनों को पूरा कर चुकी हैं, उनका अनुभव कर चुकी हैं। इसलिए अब आप इस बात से भी रूबरू हो चुकी हैं की प्रेगनेंसी के 29 से 32 सप्ताह के दौरान आपके अंदर प्रेगनेंसी के लक्षण दिखाई देंगे और यह बिलकुल नेचुरल है। नीचे हम उन सामान्य लक्षणों के बारे में बात कर रहे हैं जिन्हे आप इस समय अपने अंदर महसूस कर सकती हैं।

  1. थकान :- Fatigue :- शिशु के बढ़ते वजन और डिलीवरी के लिए शरीर की अतिरिक्त तैयारी की वजह से आराम करें, पौष्टिक भोजन करें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं
  2. पीठ में दर्द होना :- Back pain :- प्रेगनेंसी के आठवें महीने में आपके शिशु का आकार और वजन काफी बढ़ता है जिसके कारण आपके गर्भ का आकार भी बढ़ जाता है। गर्भ का आकार बढ़ने की वजह से आपका पेट सामने की तरफ बाहर निकल जाता है जिससे आपकी पीठ पर भर पड़ता है और उसमें दर्द की शिकायत आती है। लंबे समय तक बैठने या खड़े होने के कारण आपकी पीठ में दर्द शुरू हो जाता है।इससे बचने के लिए लंबे समय तक बैठने या खड़े होने से बचें साथ ही कठोर सतह यानी की सख्त जमीन पर भी बैठने और सोने से बचें। इन सब के अलावा आप कुछ व्यायाम और योग कर सकती हैं जो आपके पीठ की दर्द को दूर करने में मदद करते हैं। लेकिन कोई भी व्यायाम या योग करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर की राय जरूर लें।
  3. स्तनों से दूध का रिसाव होना :- Breast milk leakage :- गर्भावस्था के आठवें महीने के दौरान आपका शरीर पूरी रह से मां बनने की तैयारी में जुड़ जाता है। स्तनपान यानी की ब्रेस्टफीडिंग की शुरुआती तैयारी के तौर पर आपका शरीर पहले ही कोलोस्ट्रम तैयार कर लेता है। इसलिए इस दौरान आप आपके स्तनों से पीले रंग के दूध का रिसाव महसूस कर सकती हैं। यह प्रेगनेंसी के 29 से 32 सप्ताह के बीच होने वाले लक्षणों में से एक है। इस दौरान आपके स्तानों का आकार और वजन भी बढ़ जाता है।
  4. सांस फूलना :- Shortness of breath :- प्रेगनेंसी के आठवें महीने में आपके शिशु का आकार पहले की तुलना में काफी बढ़ जाता है जिसके कारण आपका पेट आगे की तरफ निकल जाता है। साथ ही आपके वजन में भी वृद्धि होती है। शिशु का वजन बढ़ने की वजह से आपके गर्भाशय का आकार भी बढ़ता है जो आगे जाकर आपके फेफड़ों पर दबाव डालता है। फेफड़ों पर दबाव होने और शरीर में दूसरे कई बदलाव होने के कारण आपको सांस लेने में तकलीफ होती है। यह एक आम लक्षण है लेकिन अगर आपको सांस लेने में ज्यादा दिक्कत आने लगे तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर उन्हें अपनी परेशानी के बारे में बताना चाहिए।
  5. कब्ज और बवासीर :- Constipation and Hemorrhoids :- प्रेगनेंसी के 29 से 32वें सप्ताह के दौरान आपके शिशु का विकास काफी तेजी से होता है जिसके कारण गर्भाशय का आकार बढ़ता है। गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेल्विक क्षेत्र में मौजूद आंत और दूसरे आंतरिक अंग के लिए उपलब्ध खाली स्थान संकुचित हो जाते हैं जिसके कारण इस दौरान आपको स्टूल पास (मल त्याग) करते समय काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कभी अभी एनस पर ज्यादा प्रेशर पड़ने के कारण आपके स्टूल के साथ साथ खून भी बाहर निकल सकता है जो आगे बवासीर का रूप ले लेता है। इसके अलावा बढ़ते गर्भाशय के कारण नीचे वाली नसों सूजन की शिकायत भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में आपको अपने डॉक्टर से मिलकर बात करनी चाहिए। इन सब के अलावा भी आप कुछ और लक्षणों को अनुभव कर सकती हैं। इसमें कृत्रिम संकुचन, कब्ज, ब्रेक्सटन हिक्स, थकान, कमजोरी आदि शामिल हैं।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में खान पान Diet in the eighth month of pregnancy

प्रेगनेंसी के आठवें महीने के दौरान आप और आपके शिशु में काफी बदलाव आते हैं। आपका शिशु जन्म लेने के लिए तैयार होता है और आप मां बनने के लिए। इस दौरान आप दोनों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी होता है। इसलिए प्रेगनेंसी के इस महीने में आपको अपने खान पान पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं की इस समय आपको कौन कौन सी चीजों का सेवन करना चाहिए।

  1. फाइबर :- Fiber :- प्रेगनेंसी के आठवें महीने में कब्ज की समस्या आम बात है और कभी कभी बवासीर की समस्या भी होती है। इन सब से बचने के लिए आपको फाइबर से भरपूर पदार्थों का सेवन करना चाहिए। फाइबर का सेवन आपकी पाचन क्रिया को ठीक रखता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, ऐवकाडो, फ्रूट, ब्राउन ब्रेड, गेंहू और ओट्स फाइबर के सबसे अच्छे स्रोत हैं। आपको इन सभी को अपने डाइट में शामिल करना चाहिए।
  2. आयरन, विटामिन और कैल्शियम :- Iron, Vitamins, and Calcium :- प्रेगनेंसी के आठवें महीने में आप मां बनने और आपके गर्भ में पल रहा शिशु जन्म लेने के लिए लगभग पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं। इस दौरान आपके खान पान में किसी तरह की कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। यही कारण है की डॉक्टर प्रेगनेंसी के 29 से 32 सप्ताह के दौरान आयरन, विटामिन और कैल्शियम से भरपूर पदार्थों का ज्यादा से ज्यादा मात्रा में सेवन करने की सलाह देते हैं। इन अभी चीजों की पूर्ति करने के लिए आपको हरी पत्तेदार सब्जियां, डेयरी प्रोडक्ट, नट्स और दूसरी ऐसी ही चीजों को अपने डाइट में शामिल करना चाहिए।
  3. प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा :- Protein, Carbohydrates, and Fat :- प्रेगनेंसी की यह अवस्था ऐसी होती है जहां आपको प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा से समृद्ध पदार्थों को खासकर अपने खान पान में शामिल करना चाहिए। ये आपके शरीर और शिशु के पौष्टिक की पूर्ती करते हैं तथा प्रेगनेंसी के आठवें महीने में होने वाले लक्षणों को कम तथा आपके शरीर को मां बनने के लिए तैयार होने में मदद करते हैं। इस दौरान आपको दूध, अंडा, मछली, चिकन, सूखा मेवा, शकरकंद, आलू, बिन्स आदि का सेवन करना चाहिए। अगर आपको किसी भी चीज से एलर्जी है तो उसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से मिलकर उनकी राय जरूर लें।

प्रेगनेंसी के 8 महीने में क्या क्या सावधानी रखनी चाहिए? What precautions should be taken during the 8th month of pregnancy?

आठवां महीना कई मायनों में बेहद अहम और संवेदनशील होता है। इसलिए अपने और अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए ये सावधानियां बरतें:

  1. शिशु के मूवमेंट :- Baby's movements :- हर दिन शिशु के मूवमेंट का ध्यान रखें। हरकतों में अगर आपको अचानक कोई कमी महसूस होती है, तो यह किसी समस्या का संकेत हो सकती है। ऐसा होने पर घबराने की ज़रूरत नहीं है। कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
  2. नियमित जांच :- Regular checkups :- इस महीने नियमित रूप से प्रीनेटल टेस्ट कराना ज़रूरी है। इससे डॉक्टर को शिशु की पोज़िशन और उसके विकास को ट्रैक करने में मदद मिलती है और वह आपको सही सलाह दे पाते हैं।
  3. वजन को नियंत्रित रखें :- Maintaining weight control :- बहुत ज़्यादा वजन बढ़ने से जेस्टेशनल डाइबिटीज़ यानी प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली डाइबिटीज़ या फिर हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए ज़रूरी है कि आहार को आप संतुलित रखें।
  4. प्रीटर्म लेबर :- Preterm labor :- मानसिक रूप से प्रीटर्म लेबर के लिए तैयार रहें। इस दौरान नियमित कॉन्ट्रैक्शन या योनि से ब्लीडिंग हो सकता है। इस तरह के लक्षण पाए जाने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
  5. बहुत ज्यादा मेहनत करने से बचें :- Avoid overexertion :- चलना-फिरना और सक्रिय रहना ज़रूरी है, लेकिन इस बात का ध्यान रखना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है कि इस दौरान आपको बहुत ज़्यादा मेहनत से बचना है। अपने शरीर की सुनें और थकान महसूस होने पर आराम करें।
  6. पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं :- Drink plenty of water :- शरीर में पानी की कमी होने से समय से पहले कॉन्ट्रैक्शन शुरू हो सकता है। इसलिए शरीर की ज़रूरत के हिसाब से पानी पीएं। आम तौर पर दिन में 8-10 गिलास पानी पर्याप्त होता है।

परामर्श :- Consultation

प्रेगनेंसी का आठवां महीना आपके और आपके शिशु के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस समय शिशु का विकास तेज़ी से होता है और आपका शरीर डिलीवरी के लिए तैयार हो जाता है। ख़ुद की देखभाल करने, डॉक्टर से नियमित जांच कराने और स्वास्थ्य को लेकर सही जानकारी रखने से आप पूरे आत्मविश्वास और उत्साह के साथ बाक़ी बचे एक महीने की तैयारी पर ध्यान दे सकती हैं।

अगर गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।

कोई भी उपाय करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।

गर्भावस्था के दौरान कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।

डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।

यह एक सामान्य जानकारी है। अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं। तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।

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