जुड़वा बच्चे कैसे होते है / जुड़वा बच्चे पैदा होने का कारण How are twins born? / Reasons for twins
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जुड़वा बच्चे कैसे होते है / जुड़वा बच्चे पैदा होने का कारण How are twins born? / Reasons for twins
आप प्रेग्नेंट हैं! इन संकेतों से जानिए कहीं आपके पेट में जुड़वा तो नहीं! You're pregnant! Find out if you're carrying twins with these signs!
जब भी कोई महिला गर्भवती होती है तो उसके मन में पहला सवाल आता है कि कहीं उसके गर्भ में जुड़वा बच्चें तो नहीं है? जब किसी महिला के प्रेग्नेंसी के दौरान जुड़वा बच्चें होते है तो खुशियां भी दोहरी हो जाती है। प्रेग्नेंसी के दौरान जुड़वा बच्चों वाली गर्भवती को खास ध्यान रखना होता है। हर चीज डबल हो जाती है, चाहे वो खाना पीना हो या एक्स्ट्रा केयर।
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
जुड़वां गर्भधारण सामान्य गर्भधारण से काफी अलग हैं। जुडवां गर्भधारण में समय से पहले डिलिवरी और जन्म के समय बच्चे के वजन कम होने की अधिक संभावना होती है।
जुड़वा बच्चे कैसे होते है how twins are born
जुड़वा या मल्टीप्ल गर्भधारण तब होता है जब एक अंडा प्रत्यारोपित (implant) होने से पहले ही अलग हो जाता है या जब प्रत्येक अंडे को अलग अलग स्पर्म द्वारा फ़र्टिलाइज़ किया जाता है। जुड़वा बच्चे दो प्रकार के होते है-
मैटरनल या आइडेंटिकल ट्विन्स Maternal or Identical Twins
आइडेंटिकल ट्विन्स तब होते है जब एक ही अंडे के फर्टिलाइजेशन के साथ ही अंडा बाद में दो या तीन समान भ्रूणों में विभाजित हो जाता हैं। आइडेंटिकल ट्विन्स की एक ही जेनेटिक पहचान होती है, हमेशा एक ही तरह के सेक्स होते हैं मतलब या तो दोनों लड़के होंगे या दोनों लड़कियां और दोनों बच्चे लगभग एक जैसे ही दिखते हैं।
फ्रेटर्नल या नॉन आइडेंटिकल ट्विन्स Fraternal or Non-Identical Twins
नॉन आइडेंटिकल ट्विन्स अलग-अलग अंडों से विकसित होते हैं जो अलग अलग स्पर्म द्वारा फ़र्टिलाइज़ होते हैं। फ्रेटर्नल जुड़वां बच्चे एक ही लिंग के या तो अलग अलग लिंग के भी हो सकते हैं और यह बिलकुल जरूरी नहीं कि अगर वो एक ही माता-पिता से पैदा हुए भाई बहन है तो उनकी शक्ल एक दूसरे से मिलती हो। इसलिए इस तरह के जुड़वा बच्चे नॉन आइडेंटिकल ट्विन्स कहलाते है।
परन्तु अगर महिला तीन या अधिक बच्चे से गर्भवती है तो, सभी बच्चे या तो समान, या सभी अलग, या दोनों का मिश्रण हो सकते हैं। यह स्थिति तब हो सकती है जब मां द्वारा कई अंडे जारी किए जाते हैं और फ़र्टिलाइज़ होते हैं। यदि इनमें से एक या अधिक निषेचित (fertilized) अंडे दो या अधिक भ्रूणों में विभाजित हो जाते हैं, तो बच्चों में आइडेंटिकल और नॉन आइडेंटिकल का मिश्रण उत्पन्न होगा।
जुड़वा बच्चे पैदा होने का कारण Reasons for the birth of twins
बहुत सी महिलाओं के मन में यह सवाल आता है की जुड़वा बच्चे होने के पीछे ऐसे कौन से कारण होते है जिससे जुड़वा या ट्रिपल बच्चे होने की संभावना बढ़ जाती है, तो चलिए जानते है उन कारणों के बारे में जिसकी संभावना से आप जुड़वा बच्चे पैदा कर सकती है
यदि आपके परिवार में सदियों से जुड़वा बच्चे पैदा होने की परंपरा चली आ रही हैं, तो आपके द्वारा भी जुड़वा बच्चे पैदा करने की अधिक संभावना रहेगी।
गर्भ में जुड़वा बच्चे के कारण आप पहले भी गर्भधारण कर चुकी हों You have had a previous pregnancy due to twins in the womb
महिलाओं को जुड़वा बच्चे पैदा होने की संभावनाएँ आपकी प्रत्येक गर्भावस्था के साथ बढ़ जाती हैं और यदि आपने पहले भी कभी जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है, तो आपके साथ दोबारा ऐसा होने की संभावना अधिक है।
जुड़वा बच्चे होने का कारण वजन The reason for having twins is weight
कुछ शोधकर्ताओं का दावा है कि उच्च बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाली महिलाओं में जुड़वा बच्चों के पैदा होने की संभावना अधिक होती है। 25 या उच्चतर बीएमआई वाली महिला को अधिक वजन वाली कहा जाता है, जबकि 30 और उससे अधिक बीएमआई वाली महिला को मोटापे से ग्रस्त माना जाता है। कई शोध में ऐसा पाया गया है की जो महिलाएं गर्भावस्था से पहले मोटापे से ग्रस्त थीं, उनमें नॉन आइडेंटिकल जुड़वा बच्चों को जन्म देने की संभावना अधिक है।
जुड़वा बच्चे होने का कारण फर्टिलिटी ट्रीटमेंट Fertility treatment is the reason for having twins
जुड़वा बच्चे होने की संभावना को बढ़ाने वाला मुख्य कारक प्रजनन उपचार का उपयोग है। विभिन्न प्रकार के प्रजनन उपचार जो विभिन्न तरीकों से जुड़वा बच्चे पैदा होने की संभावना को बढ़ाते हैं। कुछ प्रजनन दवाईयां भी महिला के अंडाशय को उत्तेजित करने का काम करती हैं, जिसके कारण महिला कभी-कभी एक से अधिक अंडे जारी करती हैं। यदि स्पर्म इन दोनों अंडों को फ़र्टिलाइज़ कर देते हैं, तो इससे जुड़वा बच्चे पैदा हो सकते हैं। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) से भी जुड़वा बच्चों के गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है।
जुड़वा बच्चे होने का कारण स्तनपान Breastfeeding as a reason for having twins
जो महिलाएं स्तनपान कराते समय गर्भधारण करती हैं, उन महिलाओं में जुड़वा बच्चे पैदा होने की संभावना अधिक होती हैं। यह सच है कि स्तनपान से प्रजनन क्षमता कम हो जाती है और गर्भावस्था को रोका जा सकता है, विशेष रूप से बच्चे के पहले छह महीनों के दौरान अगर बच्चा विशेष रूप से स्तनपान कर रहा है। हालांकि, स्तनपान कराने के दौरान गर्भवती होना संभव है और वो भी जुड़वा बच्चों के साथ।
जुड़वा बच्चे पैदा होने के लक्षण Signs of having twins
मल्टीप्ल प्रेगनेंसी के कुछ शुरुआती संकेत होते हैं जो महिलाएं देख सकती हैं या महसूस कर सकती है कि क्या उन्हें जुड़वा बच्चे होने वाले हैं। जुड़वा बच्चे होने कुछ शुरूआती लक्षणों में शामिल है-
जुड़वा बच्चे होने के यह सभी लक्षण एक महिला से दूसरी महिला में भिन्न भिन्न हो सकते हैं।
मॉर्निग सिकनेस :- morning sickness :- जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं को प्रारंभिक लक्षण में मॉर्निग सिकनेस बहुत ज्यादा होती है। 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं अपनी गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण में ही मतली और जी मिचलाना बढ़े हुए स्तर का अनुभव शुरू कर सकती हैं। महिला जिनके जुड़वा बच्चे होने वाले है अन्य गर्भवती महिलाओं की तुलना में मॉर्निग सिकनेस का अनुभव अधिक करती है साथ ही उनके स्तन की कोमलता भी नार्मल डिलीवरी की अपेक्षाकृत अधिक होती है।
ब्लीडिंग और स्पोटिंग :- Bleeding and spotting :- एक महिला जो जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती है उसको स्पोटिंग और ब्लीडिंग होने की संभावना अधिक होती है। अगर आप गुलाबी और भूरे रंग के धब्बे नोटिस करते है तो यह अत्यंत सामान्य बात है। यदि आपके ब्लीडिंग हो रही है और साथ में बुखार और लाल खून के धब्बे नहीं है तो डरने की कोई बात नही हैं।
वजन बढ़ना :- Weight gain :- जुड़वां गर्भावस्था में वजन सामान्य गर्भावस्था की तुलना में अधिक होता है क्योंकि आपके दो बच्चे, दो प्लासन्टा और अधिक एमनियोटिक द्रव के साथ होते है। एक औसत गर्भावस्था में सामान्य वजन 25 पाउंड होता है जबकि जुड़वां गर्भावस्था में यह 30 से 35 पाउंड के बीच हो सकता हैं। यह जुड़वा बच्चे होने का शुरुआती संकेत नहीं माना जाता है, क्योंकि दूसरी तिमाही के बाद भी गर्भवती महिला का वजन बढ़ता है।
माँ कि उम्र :- mother's age :- बड़ी उम्र की महिलाओं को जुड़वां बच्चे पैदा होने की संभावना अधिक होती है क्योंकि अधिक उम्र की महिला के अंडाशय हर महीने एक से अधिक अंडे छोड़ने लगते है। महिलाये जिनकी उम्र 35 या उससे अधिक है वो FSH हार्मोन को कम उम्र कि महिलाओ कि अपेक्षा ज्यादा मात्रा में बना सकती है। यह हार्मोन अंडाशय ओवुलेशन के लिए अंडे को रिहा करने की अनुमति देता है। जितना ज्यादा हार्मोन का लेवल होगा उतने ही अंडे ओवुलेशन के लिए निकलेंगे और फलस्वरूप उतनी ही मात्रा में भूर्ण का निर्माण होता है।
आनुवांशिकता :- genetics :- अगर पति या पत्नी में से कोई स्वयं जुड़वाँ है या आपके परिवार में कोई जुड़वाँ है तो आपके भी यहाँ जुड़वाँ होने की संभावना रहती है। ये बात पूरी तरह आपके ऊपर निर्भर करती है क्योकि अंडो का निर्माण आपके द्वारा होता है अगर आप या आपकी माँ जुड़वाँ है तो जुड़वाँ बच्चे होने की संभावना ज्यादा होती है।
दो दिल :- Two hearts :- बच्चे के दिल की धड़कन पहली बार सुनना हर माता पिता के लिए सबसे यादगार अनुभव होता है। बच्चे के जन्म से पहले आप डॉपलर प्रणाली के माध्यम से अपने बच्चे के दिल की धड़कन सुन सकते हैं। गर्भावस्था के नौवें सप्ताह से जुड़वा बच्चों के दिल की धड़कन अलग-अलग से सुनी जा सकती है। हालांकि, यह इतना आसान नहीं है क्योंकि इनकी पहचान को कभी-कभी अलग नहीं किया जा सकता है।
बड़ा बेबी बंप :- Big baby bump :- गर्भाशय में दो या दो से अधिक बच्चे होने से समायोजित करने वाला गर्भाशय एक बड़े आकार में फैल जाता है, जिससे महिला का बेबी बंप साफ तौर पर बड़ा नजर आने लगता है।
जल्दी डिलीवरी और सिजेरियन :- Early delivery and cesarean :- जुड़वां गर्भावस्था के साथ महिलाओं में समय से पहले डिलिवरी होने की अधिक संभावना होती है। लेबर पेन गर्भावस्था के 36 या 37 सप्ताह के बीच में हो सकते है। इसके अलावा, जुड़वां गर्भावस्था में बच्चे ज्यादातर बीच स्थिति में होते है जिस कारण डिलिवरी नॉर्मल की जगह सिजेरियन होने की संभावना बढ़ जाती है।
गर्भाशय का आकार :- Uterine size :- अगर दिन प्रतिदिन गर्भवती महिला के गर्भाशय का आकार बढ़ता ही जा रहा हो, तो यह भी गर्भ में दो भ्रूण होना दर्शाता है। पेट के आकार को देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि गर्भ में जुड़वा बच्चें हैं।
हमेशा भूख लगना :- always feeling hungry :- बढ़ते भ्रूण की दोगुनी पोषण संबंधी जरूरतों के कारण, जुड़वा बच्चे पैदा करने वाली महिला की भूख में अचानक वृद्धि होती है। गर्भावस्था के लक्षणों में से सबसे बड़ा लक्षण यह है कि आपको हमेशा भूख लगेगी। जुड़वां गर्भावस्था में महिला को सामान्यग र्भवती महिलाओं की तुलना में अधिक खाने की जरूरत महसूस होती है। यदि आप भी जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती हैं तो आपको भी लगातार भूख लग सकती है यह शरीर का एक नेचुरल मैकेनिज्म है जिससे शरीर में पोषक तत्वों की जरुरत बढ़ने लगती है।
प्रेग्नेंसी में रखी जाने वाली सावधानियां Precautions to be taken during pregnancy
एक बार जब आपको जुड़वा गर्भधारण का पता चल जाये, तो कुछ सावधानियां रखने से आप किसी भी संबंधित जटिलताओं से बच सकती हैं।
उच्च पोषक तत्वों का सेवन :- high nutrient intake :- जैसे-जैसे बढ़ते भ्रूणों की पोषण संबंधी माँगें दोगुनी होती हैं, पोषक तत्वों की खपत में वृद्धि शिशुओं और माँ दोनों के लिए अल्पपोषण के जोखिम का कारण बन सकती है इसलिए भरपूर पोषण लेकर आप इसके जोखिम को कम कर सकती है।
निगरानी :- Supervision :- एक से अधिक भ्रूण वाली गर्भवती महिलाओं को अक्सर शिशु और मां के स्वास्थ्य का निरंतर मूल्यांकन करने के लिए बार बार डॉक्टर से मिलने और जांच करवाने की सलाह दी जाती है। गर्भावस्था के हर चरण में किसी भी तरह की विसंगति की जांच के लिए आपको नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाते रहना चाहिए।
भरपूर आराम :- plenty of rest :- जुड़वा या ट्रिपल बच्चों वाली गर्भवती महिला को बहुत सारे आराम की जरुरत होती हैं क्योंकि ये गर्भावस्था में बहुत सारी जटिलतायें उत्पन्न कर सकती हैं। गर्भवती महिला के जोखिम कारकों के आधार पर, डॉक्टर भी जुड़वां गर्भधारण वाली महिलाओं को पर्याप्त बेड रेस्ट करने की सलाह देते हैं।
दवाएं :- Medicines :- डॉक्टर अक्सर मल्टीप्ल प्रेगनेंसी में सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए दवाओं और कॉर्टिकॉस्टिरॉइड्स जैसे अन्य हार्मोनों के रूप में पोषक तत्वों की खुराक लेने की सलाह देते हैं।
परामर्श :- Consultation
आमतौर पर महिलाएं पीरियड्स और प्रेगनेंसी को लेकर बहुत कम जागरूक होती हैं। इसलिए पीरियड्स में अनियमितता आने, सामान्य से अधिक या कम ब्लीडिंग होने, ब्लीडिंग के रंग में बदलाव या उससे बदबू आने या प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कोई समस्या होने पर वे तुरंत घबरा जाती हैं।
अगर आपको ऐसा लग रहा है कि ओव्यूलेशन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जांच करा कर इलाज करवाना चाहिए।
अगर महिलाओं को गर्भधारण करने में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
अगर महिलाओं को र्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं एवं सप्लीमेंट का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।
अगर आपको पीरियड्स या प्रेगनेंसी से संबंधित किसी तरह की कोई परेशानी या कन्फ्यूजन है तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर इस बारे में बात करना चाहिए।
यह एक सामान्य जानकारी है अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए
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