प्रेग्नेंसी में दूध पीना Drinking milk during pregnancy
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क्या प्रेग्नेंसी में दूध पीना चाहिए? Should one drink milk during pregnancy?
क्या प्रेग्नेंसी में दूध पीना चाहिए? Should one drink milk during pregnancy?
गर्भावस्था में दूध पीना बेहद फायदेमंद होता है। आपको अपने दैनिक आहार में दूध जरूर शामिल करना चाहिए
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
मां बनना हर महिला के जीवन में एक सुखद एहसास है। साथ ही यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। इस दौरान आपको अपने खान-पीने का भरपूर ध्यान रखने की जरूरत होती है। ताकि पेट में पल रहे बच्चे को अच्छे से पोषण मिल सके और बच्चे के विकास अच्छे से हो सके। सभी पोषक तत्वों के साथ कुछ ऐसी खास चीजें होती है, जिनका सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। फल, सब्जियों, मोटे अनाज के अलावा दूध के एक ऐसी जरूरी चीज है, जिसे हर महिला को लेना चाहिए। हालांकि कुछ खास समस्याओं में आपको दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके बदले आप दही या सोया मिल्क का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा बहुत सारे लोग वीगन भी होते हैं, जो गाय के दूध का सेवन नहीं करना चाहते हैं। वे लोग भी सोया मिल्क, बादाम मिल्क और दही जैसे विकल्पों से पोषण प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि आपको दूध के फायदे और मात्रा के बारे में अवश्य ध्यान देना चाहिए ताकि आपके आहार में कोई गलती न हो। साथ ही आप और बच्चा दोनों स्वस्थ रहे
प्रेग्नेंसी के दौरान दूध के फायदे Benefits of milk during pregnancy
- दूध बहुत पौष्टिक होता है। गर्भावस्था के दौरान दूध के सेवन से महिलाओं को भरपूर मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी मिलता है। विटामिन डी गर्भावस्था के दौरान बच्चे को एलर्जी से बचाने और पोषण के लिए बहुत जरूरी होता है। साथ ही कैल्शियम बच्चे और मां की हड्डियों के लिए भी बहुत अच्छा होता है।
- दूध में मौजूद प्रोटीन बच्चे के विकास के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। प्रोटीन कोशिकाओं के विकास में भी मदद करता है।
- दूध में अमीनो एसिड और फैटी एसिड पाए जाते हैं। ये बच्चे के तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए अच्छा होता है। इससे बच्चे के मस्तिष्क में ऑक्सीजन अच्छे से पहुंच पाता है।
- वहीं दूध के सेवन से मल्टीपल स्केलेरोसिस, नियोनेटल रिकेट्स और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है।
गर्भावस्था में इस तरह के दूध का करें सेवन Consume this type of milk during pregnancy
गर्भावस्था के अगर आपको किसी तरह की परेशानी है या दूध पीने से एसिडिटी की समस्या होती है। साथ ही अगर आप वीगन है और गाय का दूध नहीं पीना चाहते हैं, तो आप इन चीजों से बने दूध का सहारा ले सकते हैं। इसमें भी कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।
1. सोया मिल्क :- Soy milk
सोया मिल्क मां और बच्चे दोनों के लिए अच्छा होता है। इसमें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। साथ ही इसमें गुड फैट पाया जाता है, जिससे कोलेस्ट्रोल और मोटापा बढ़ने जैसी परेशानियां भी नहीं होती है। सोया मिल्क में एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
2. बादाम का दूध :- Almond milk
बादाम के दूध में फोलिक एसिड, विटामिन बी, विटामिन ई, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसमें कैलोरी और फैट की मात्रा कम होती है। बादाम के दूध का सेवन मां और बच्चे के लिए काफी अच्छा माना जाता है। अगर आपको दूध और सोया मिल्क से परेशानी है, तो बादाम के दूध का सेवन कर सकते हैं।
3. ओट्स मिल्क :- Oat milk
ओट्स मिल्क में विटामिन ए, विटामिन बी, पोटैशियम, फॉस्फोरस और मैंगनीज जैसे तत्व पाए जाते हैं। इसमें बादाम के दूध की तुलना में प्रोटीन अधिक पाया जाता है। इसमें कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इससे मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ अच्छा रहता है।
प्रेग्नेंसी में कब और कितनी मात्रा में दूध पीना चाहिए When and how much milk should be consumed during pregnancy
प्रेग्नेंसी में आप अपनी सेहत के हिसाब से कभी भी दूध ले सकते हैं लेकिन सबसे उचित समय सुबह-रात को होता है। इसके अलावा आप शाम में भी दूध पी सकते हैं लेकिन खाना के तीन घंटे बाद ही दूध का सेवन करें ताकि अपच की परेशानी न हो। इसके अलावा आप सुबह-शाम एक गिलास दूध का सेवन जरूर करें या आधा लीटर प्रतिदिन लें क्योंकि गर्भावस्था में चौथे महीने के बाद कैल्शियम की ज्यादा जरूरत होती है, तो इसकी आपूर्ति के लिए आपको दूध जरूर पीना चाहिए। साथ ही अगर आपके शरीर में कैल्शियम की कमी है, तो डॉक्टर से संपर्क के बाद आप कुछ अन्य सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।
गर्भावस्था में कैसे पीना चाहिए दूध How to drink milk during pregnancy
प्रेग्नेंसी के दौरान कच्चा या पाश्चुरीकृत दूध पीना आपके और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है इसलिए आप कोशिश करें कि गाय का शुद्ध दूध ही पीएं या फिर ऊपर बताए गए किसी दूध में से किसी को अपना आहार में शामिल कर सकते हैं। दूध को हमेशा हल्का गर्म कर पीने की कोशिश करें। साथ ही दूध थोड़ा-थोड़ा करके पीने की कोशिश करें। भारी भोजन के बाद दूध न लें। इससे आपका पाचन तंत्र खराब हो सकता है। दिन में कम से कम दो गिलास दूध जरूर पीएं।
सावधानियां :- Precautions
1. अगर आप दूध की जगह दही का सेवन करना चाहते हैं, तो शाम या रात की जगह दोपहर के खाने में दही का सेवन करें। साथ ही आप दही और फलों की स्मूदी बनाकर भी ले सकते हैं।
2. बिना पाश्चुरीकृत दूध और इससे बने डेयरी उत्पादों के सेवन से बचें।
3. गर्भावस्था के दौरान अधिक मात्रा में दूध के सेवन से आपको अपच की समस्या हो सकती है। इसलिए इसका संयमित मात्रा में सेवन करें। आप जिस प्रकार के दूध का भी सेवन करें। आपने डॉक्टर की सलाह के बाद ही उसकी तय मात्रा लें ताकि आपकी और बच्चे की सेहत पर कोई असर न पड़े।
परामर्श Consultation
अगर गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
कोई भी उपाय करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
गर्भावस्था के दौरान कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।
डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।
यह एक सामान्य जानकारी है। अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं। तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।
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