​बच्‍चों की हाइट बढ़ाने के तरीके Ways to increase the height of children

Image
बच्चों की हाइट नहीं बढ़ने के कारण / बच्चों की हाइट बढ़ाने के नेचुरल तरीके Reasons for children not growing in height / Natural ways to increase children's height लड़के और लड़कियों की लंबाई किस उम्र तक बढ़ती है? Till what age do boys and girls grow in height? आज के समय में हर कोई अच्छी हाइट पाना चाहता है, क्योंकि लंबाई न केवल व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती है, बल्कि आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। यहां जानिए, लड़के और लड़कियों की लंबाई कब तक बढ़ती है? जन्म के बाद बच्चों के सही विकास की जिम्मेदारी माता-पिता की होती है। किसी भी बच्चे की शारीरिक संरचना कैसे होगी यह पूरी तरह से माता-पिता पर निर्भर करता है। अक्‍सर पेरेंट्स शिकायत करते हैं कि उनके बच्‍चे की हाइट नहीं बढ़ रही है या अपने साथ के बच्‍चों के मुकाबले उनके बच्‍चे की हाइट कम है। आजकल तो बच्‍चों की हाइट न बढ़नी या कम बढ़ने की प्रॉब्‍लम ज्‍यादा देखी जा रही है। कम हाइट होने की वजह से बच्‍चों के आत्‍मविश्‍वास में कमी आती है और वो लोगों के सामने जाने से भी कतराने लगते हैं। बच्‍चों के सही मानसिक विकास के लिए उचित शारीरिक विकास होना भी जरूरी ह...

ब्रीच पोजीशन गर्भ में बच्चा उल्टा हो तो क्या करें What to do if the baby is breech in the womb

 

पेट में बच्चा उल्टा है यानी सिर नीचे नहीं आया? जानिए प्रेग्नेंसी में कब होता है ऐसा और क्या हैं इसके खतरे Is the baby in the womb breech? Learn when this happens during pregnancy and what the risks are.

पेट में बच्चा उल्टा हो जाए तो क्या करें, ये सावधानियां जरूर बरतें What to do if the baby turns upside down in the womb, take these precautions

एक सुरक्षित डिलीवरी के लिए बच्चे की सही पोजिशन बेहद महत्वपूर्ण होती है। अगर शिशु सही स्थिति में न हो, तो प्रसव के दौरान कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

आमतौर पर प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में ज्यादातर बच्चों के सिर गर्भाशय में नीचे की ओर हो जाते हैं, जिससे डिलीवरी में आसानी होती है। लेकिन कुछ मामलों में बच्चे का सिर नीचे नहीं आता है यानी कि वह पेट में उल्टे पोजिशन में होते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में ब्रीच पोजिशन कहा जाता है।

यह स्थिति न सिर्फ डिलीवरी को मुश्किल बनाती है, बल्कि मां और शिशु दोनों के लिए खतरे का कारण भी बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते इसका पता चले और सही निर्णय लिया जा सकें। ऐसे में आइए जानते हैं कि ब्रीच पोजिशन क्या होती है,

हैलो फ्रेंड्स!

मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }

मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।

आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय में शिशु की स्थिति में कई बदलाव आते हैं जिनमें से एक गर्भ में बच्‍चे का घूमना या उल्‍टा होना भी शामिल है। गर्भावस्‍था में कुछ स्थितियों में बच्‍चा उल्‍टा हो जाता है जिसकी वजह से डिलीवरी में दिक्‍कत आती है।

गर्भावस्‍था एक बहुत ही मुश्किल और महत्‍वपूर्ण समय होता है। इस दौरान कई तरह की परेशानियां आने की संभावना रहती है, जिसमें से एक गर्भ में बच्‍चा उल्‍टा होना भी शामिल है। लगभग 3 से 4 फीसदी महिलाओं में प्रेगनेंसी (Pregnancy) के दौरान गर्भ में बच्‍चा उल्‍टा होने की समस्‍या देखी जाती है।

इस स्थिति में गर्भाशय के अंदर शिशु का सिर ऊपर की तरफ और पैर नीचे बर्थ कैनाल की ओर आ जाते हैं। नॉर्मल प्रेगनेंसी में डिलीवरी से पहले अपने आप ही शिशु का सिर नीचे की ओर आ जाता है। नॉर्मल डिलीवरी के लिए इस स्थिति को सबसे सही माना जाता है। वहीं जब शिशु का सिर ऊपर और पैर नीचे आते हैं तो इस स्थिति को 'ब्रीच बर्थ' कहा जाता है।

ब्रीच पोजीशन गर्भ में बच्चा उल्टा हो तो, उसे सही पोजिशन में लाने के लिए क्या करें Breech position: What to do to get the baby back into the correct position if it's upside down in the womb

गर्भ में शिशु अपनी पोजिशन बदलता रहता है और प्रसव के लिए शिशु की सबसे अच्छी पोजिशन वह होती है; जब उसका सिर नीचे और पैर ऊपर की तरफ़ होते हैं. लेकिन, तीन से पांच प्रतिशत मामलों में वह अच्छे से घूम नहीं पाता, जिससे उसका सिर ऊपर की तरफ़ रहता है. ऐसी स्थिति को ब्रीच पोजिशन कहते हैं. ऐसी स्थिति में शिशु का सिर अटकने की संभावना बढ़ जाती है और इससे बच्चे को ऑक्सीजन ना मिलने का चांस भी रहता है, जिस वजह से इस स्थिति में डॉक्टर गर्भवती महिला को सी-सेक्शन से डिलीवरी करने की सलाह देते हैं.

ब्रीच पोजिशन क्या होती है what is breech position

इस अवस्था में गर्भाशय के भीतर शिशु का सिर ऊपर की ओर होता है, जबकि उसके पैर या नितंब नीचे की ओर यानि योनि के सबसे करीब होते हैं। यही अवस्था ब्रीच पोजिशन कहलाती है। इसका मतलब यह है कि डिलीवरी के समय शिशु के सिर के बजाय उसका निचला हिस्सा यानी कि पैर या नितंब सबसे पहले बाहर आने की स्थिति में होता है।

गर्भ में बच्चा उल्टा होने के प्रकार / ब्रीच पोजिशन के प्रकार Types of breech position/breech position

ब्रीच प्रेग्‍नेंसी के तीन प्रकार होते हैं फ्रैंक, कंप्‍लीट और फुटलिंग ब्रीच। फ्रैंक बीच में शिशु का सिर और पैर ऊपर की ओर जबकि कूल्‍हे नीचे की ओर आ जाते हैं। वहीं, कंप्‍लीट ब्रीच में शिशु के पैर और कूल्‍हे नीचे की ओर रहते हैं और दोनों घुटने मुड़े रहते हैं। फुटलिंग ब्रीच में शिशु क्रॉस कर के बैठा होता है।

ब्रीच पोजिशन मुख्यतौर पर तीन तरह से हो सकती है इन तीनों पोजिशन में शिशु का सिर ऊपर की तरफ़ और कूल्हा प्रसव नलिका के क़रीब होता है.

  1. कंपलीट ब्रीच :- Complete Breech :- इस पोजिशन में शिशु ऐसा नज़र आता है, जैसे कि वह गर्भ में बैठा हुआ हो क्योंकि इसमें शिशु के दोनों घुटने मुड़े होते हैं और उसके पैर व कूल्हा नीचे प्रसव नलिका के क़रीब होता है. 
  2. फ्रैंक ब्रीच :- Frank Breech :- इस पोजिशन में शिशु का सिर व पैर ऊपर की तरफ़ और कूल्हा प्रसव नलिका के क़रीब होता है.
  3. फ़ुटलिंग ब्रीच :- Footling Breech :- इस पोजिशन में शिशु गर्भ में अपने दोनों पैरों को क्रॉस करके बैठा होता है.

गर्भ में बच्चा उल्टा होने के कारण Reasons for the baby being upside down in the womb

अगर गर्भस्‍थ श‍िशु की पोज‍िशन आड़ी है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे

  1. पहले कई बार गर्भवती होने के कारण
  2. जुड़वा बच्‍चे होने और पहले प्रेग्‍नेंसी में 9 महीने से पहले डिलीवरी होने के कारण ब्रीच प्रेग्‍नेंसी होती है।
  3. गर्भाशय में अधिक या कम एमनियोटिक फ्लूइड होने के कारण
  4. गर्भाशय का आकार असामान्‍य होने या गर्भाशय में रसौली होने और प्‍लेसेंटा प्रिविआ की स्थिति में भी ऐसा हो सकता है।
  5. पेट की मांसपेश‍ियां ज्‍यादा लचीली होना।

​कैसे पता करें उल्‍टा हो गया है बच्‍चा How to know if the baby is upside down

गर्भावस्था के 35वें या 36वें सप्ताह तक बच्चे को ब्रीच पोजीशन में नहीं माना जाता है। नॉर्मल प्रेग्नेंसी में आमतौर पर बच्चे का सिर डिलीवरी के लिए नीचे आ जाता है। प्रेग्नेंसी के 35वें हफ्ते से पहले ऐसा हो जाता है लेकिन अगर इस समय तक बच्चा नीचे ना आए तो इसके बाद साइज में बड़ा होने और पेट में जगह कम पड़ने की वजह से उसे डिलीवरी के लिए सही पोजीशन में आने में दिक्कत होती है।इस पोजिशन में वजाइनल डिलीवरी नामुमकिन हो जाती है। मां और होने वाले बच्चे के लिए प्रेगनेंसी का समय कॉम्प्लिकेशन से भरा हुआ होता है। अगर गर्भस्थ शिशु की पोजिशन आड़ी स्थिति में है तो उससे मां को परेशानी हो सकती है।

  1. बच्चे का सिर आपको पेल्विस के पास नहीं महसूस हो रहा है तो या बगल में महसूस हो रहा है तो शिशु की पोजिशन ब्रीच हो सकती है।
  2. अल्ट्रासाउंड की मदद से आप जान सकती हैं कि डिलीवरी डेट से पहले बच्चा सही पोजीशन में आया है नहीं।

ब्रीच पोजिशन में नॉर्मल डिलीवरी कराने के बड़े जोखिम Major risks of normal delivery in breech position

ब्रीच पोजिशन में नॉर्मल डिलीवरी कराने के बड़े जोखिम हो सकते हैं, जैसे बच्चे के पैरों या बांहों में चोट लग सकती है, हड्डियां उखड़ सकती है या टूट सकती हैं।

  1. अगर ब्रीच पोजिशन वाले बच्चे की डिलीवरी नॉर्मल कराई जाए तो ऐसी स्थिति में बच्चे का मस्तिष्क फंस सकता है। साथ ही गर्भनाल चपटी या मुड़ सकती है, जिससे बच्चे के सिर को नुकसान हो सकता है।
  2. अगर आप प्रेग्नेंट हैं और आपके शिशु की पोजिशन ब्रीच है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। धैर्य से काम लें और ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी है कि आप स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह का पूरी तरह पालन करें और उनके निर्देशानुसार ही डिलीवरी की प्रक्रिया अपनाएं।
  3. अगर बच्चा ब्रीच पोजिशन में होता है, तो फिर इस परिस्थिति में नॉर्मल डिलीवरी एक जोखिम भरा ऑप्शन हो सकता है। इसलिए डॉक्टर ऐसे केसेज के लिए सी सेक्शन की सलाह देते हैं।

गर्भ में बच्चा उल्टा हो तो सीधा कैसे करें How to straighten the baby if it is upside down in the womb

अगर प्रेग्‍नेंसी के दौरान बच्‍चा उल्‍टा हो गया है तो बच्‍चे की स्थिति को ठीक किया जा सकता है। अब यह कोशिश कितनी सफल होगी, ये इस बात पर निर्भर करती है कि ब्रीच प्रेग्‍नेंसी का कारण क्‍या है। गर्भ में बच्‍चा उल्‍टा होने की स्थिति में अगर आप ऑपरेशन नहीं करवाना चाहती हैं तो एक बार डॉक्‍टर से सलाह जरूर ले

इसके अलावा ब्रीच प्रेग्‍नेंसी में कुछ व्‍यायाम और पोजीशन भी बच्‍चे को सही स्थिति में लाने में मदद करते हैं। इसमें लिफ्ट की जगह सीढियों का इस्‍तेमाल करने से भी फायदा हो सकता है।

गर्भ में बच्चा उल्टा हो तो, उसे सही पोजिशन में लाने के लिए उपाय If the baby is upside down in the womb, then measures can be taken to bring it back to the correct position.

36 से 37वें सप्ताह तक अगर बच्चा सही पोजिशन में नहीं आता, तो एक्सटर्नल सेफालिक वर्शन तकनीक की मदद से बच्चे को सही स्थिति में लाने की कोशिश की जाती है. इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले डॉक्टर गर्भवती महिला को कुछ दवाइयां या इंजेक्शन देते हैं; जिससे गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम मिलता है और इससे बच्चे को सही स्थिति में लाने की प्रक्रिया भी आसान होती है.

इस प्रक्रिया में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड के जरिए गर्भ में शिशु की पोजिशन को देखते हुए; गर्भवती महिला के पेट को हल्के से दबाते हुए शिशु को सही स्थिति में लाते हैं. हालाँकि, यह प्रक्रिया महिला के लिए थोड़ी पीड़ाजनक होती है और 50% मामलों में यह प्रक्रिया सफल होती है. विशेषतौर पर तब जब इस प्रक्रिया को गर्भावस्था के 35 से 37वें सप्ताह के भीतर किया जाए.

पेट में उल्‍टा हो जाए बच्‍चा, तो इन तरीकों से करवाई जाती है डिलीवरी If the baby is upside down in the stomach, then delivery is done through these methods.

पेट में बच्‍चे के उल्‍टा होने पर कई तरह की जटिलताएं आने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, इसे ठीक करने के कुछ तरीके भी मौजूद हैं।

नौंवे महीने में डिलीवरी के लिए बच्‍चे का सिर नीचे जन्‍म नलिका की ओर और पैर ऊपर पेट की ओर आने होते हैं। डिलीवरी के लिए यह पोजीशन सबसे सही होती है और अगर बच्‍चा समय पर इस पोजीशन में आ जाए तो डिलीवरी के समय होने वाली कई तरह की जटिलताओं के आने की संभावना कम हो जाती है।

हालांकि, कुछ मामलों में बच्‍चा डिलीवरी की पोजीशन में नहीं आता है और उसका सिर ऊपर और पैर की नीचे ओर होते हैं। गर्भ में इस पोजीशन में होने का बच्‍चा उल्‍टा होना या ब्रीच पोजीशन कहते हैं। डिलीवरी से पहले पेट में बच्‍चा उल्‍टा हो जाए तो शिशु को सुरिक्षत बाहर निकालने और मां के शरीर को कम से कम नुकसान पहुंचाने के लिए डॉक्‍टर कुछ विशेष तरीकों का उपयोग करते हैं, जिनमें से कुछ के बारे में यहां बताया गया है

  1. एक्‍सटरनल वर्जन :- External Version :- इस प्रक्रिया में डॉक्टर महिला के पेट पर हाथ रखकर शिशु को सही पोजीशन में लाने की कोशिश करते हैं। प्रेग्नेंसी के 36वें और 38वें सप्ताह में बच्चा उल्टा होने पर डॉक्टर एक्सटरनल वर्जन की ही सलाह देते हैं। आमतौर पर यह प्रक्रिया अस्पताल में ही की जाती है और इसके लिए दो लोगों की जरूरत पड़ती है। इस दौरान शिशु को मॉनिटर किया जाता है।
  2. ​एसेंशियल ऑयल :- Essential Oils :- कुछ महिलाओं का कहना है कि एसेंशियल ऑयल जैसे कि पुदीने के तेल से पेट की मालिश करने पर बच्चा अपने आप सही पोजीशन में आ सकता है। हालांकि, इस तरीके के इस्तेमाल से पहले आपको डॉक्टर से जरूर बात कर लेनी चाहिए। इसके अलावा इनवर्जन भी पेट में शिशु को डिलीवरी के लिए सही पोजीशन में जाने का एक तरीका है। इसमें महिला को स्विमिंग पूल में अपने हाथों पर खड़ा कर के, तकियों पर बैठाकर या पेल्विस को ऊंचा उठाने के लिए सीढियां चढ़ने जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
  3. सिजेरियन डिलीवरी :- Cesarean delivery :- यदि उपरोक्त तरीकों और डिलीवरी डेट के पास आने तक भी बच्चे का सिर नीचे की ओर नहीं आया है, तो इस स्थिति में सिजेरियन डिलीवरी की प्लानिंग की जाती है। बहुत कम ही ऐसे मामले होते हैं जब बच्चे के उल्टा होने पर सी-सेक्शन की सलाह ना दी जाए। यदि जुड़वा बच्चों में एक का सिर नीचे की ओर आ चुका है लेकिन दूसरा बच्चा उल्टा है तो इस स्थिति में नॉर्मल डिलीवरी करवाना ही सही रहता है।

बच्‍चे की पोज‍िशन ब्रीच होना ठीक नहीं है Breech position of the baby is not good

अगर श‍िशु की पोज‍िशन आड़ी होती है तो इससे कई गंभीर समस्‍याएं हो सकती हैं। अगर बच्‍चे की पोज‍िशन आड़ी होती है तो सी-सेक्‍शन करवाने की जरूरत पड़ सकती है। लंबे समय तक लेबर में रहने के कारण इंफेक्‍शन की समस्‍या हो सकती है। गर्भनाल आगे होने के कारण ऑक्‍सीजन सप्‍लाई खराब हो सकती है और खून की कमी हो सकती है ज‍िससे बच्‍चे की जान को भी खतरा हो सकता है।

ब्रीच बेबी को सही पोजीशन में लाने की तकनीक Techniques for Bringing a Breech Baby into the Correct Position

जब आप अपनी प्रेगनेंसी की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखती हैं तो अपने बच्चे को ब्रीच पोजीशन में देख कर परेशान होना जायज है। लेकिन अच्छी बात यह है कि आपके बच्चे का सिर स्वाभाविक रूप नीचे करने की कई तकनीकें मौजूद हैं। यदि आप जानना चाहती हैं कि अपने ब्रीच बेबी को सामान्य तरीके से कैसे सीधा करें, तो निम्नलिखित प्रभावी तकनीकें अपनाएं

  1. लाइट :- light :- लाइट कई तरह के चमत्कार कर सकती है। जब आपको अपनी गर्भावस्था के आखिरी चरण में पता चलता है कि बच्चे का सिर नीचे की ओर नहीं है, तो हो सकता है कि आपको समझ नहीं आए कि आगे क्या करना है। लेकिन केवल नीचे के पेल्विक एरिया पर फ्लैश लाइट लगाने से आप जादू होते हुए देख सकती हैं। यह आपको जरूर पता होना चाहिए कि दूसरी तिमाही के अंत तक, भ्रूण बाहर से प्रकाश को पहचान जाता है। जब आप अपने पेल्विक अंगों पर लाइट फ्लैश करती हैं, तो इस बात की बहुत अच्छी संभावना है कि बच्चा उस प्रकाश को फॉलो करेगा और अपना सिर नीचे की ओर ले जाएगा। हालांकि इससे जुड़ी कोई स्टडी नहीं हुई है, लेकिन इस सरल तकनीक को आजमाने में कोई नुकसान नहीं है।
  2. फ्रॉस्ट का मैजिकल टच :- Magical Touch of Frost :- अपने बच्चे के सिर को नीचे की दिशा में घुमाने का यह एक और आसान तरीका है। आइस पैक या फ्रोजन मटर पैक रखने से काम चल जाएगा। आपको बस अपने पेट पर एक तौलिया रखना है, खासकर जहां बच्चे का सिर है और फिर धीरे से उस पर आइस पैक रखें। यह संभावना है कि बच्चे को ठंड लगेगी और वह इससे दूर जाने की कोशिश करेगा और आपको भी यही चाहिए।
  3. करवट बदलने की कोशिश करें :- Try to change sides :- करवट पर मुड़ने से आपके ब्रीच बेबी को सही पोजीशन में लाने में मदद मिलती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बार-बार दोनों तरफ मुड़ने से आप अपने पेल्विक को लचीला बनाती हैं और यह बच्चे को मुड़ने या नीचे की ओर आने के लिए रास्ता देने में मदद करता है। यह एक नेचुरल प्रक्रिया है और आपको नींद में पता भी नहीं चलेगा कि बच्चा कब सिर के बल नीचे की ओर आ गया है। ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने के लिए दाहिनी ओर की बजाय बाई करवट पर सोएं। साथ ही अपने पैरों और घुटनों को मोड़ लें और पैरों के बीच एक तकिया रख लें।
  4. मोक्सीबस्टन एक्यूपंक्चर का प्रयोग :- Use of moxibustion acupuncture :- ब्रीच बेबी को घुमाने के लिए एक्यूपंक्चर एक शानदार तरीका है। इस तकनीक में डॉक्टर आपके दोनों पैर की उंगलियों पर पतली सुइयों को चुभाएगा। फिर मोक्सीबस्टन नाम की धूप में मगवॉर्ट नाम की एक हर्ब होती है। इस धूप को जलाया जाता है, और इसका धुआं पंजों के चारों ओर दिया जाता है। यह गर्मी, सुई के दबाव और धुएं का मिक्सचर है, जिसकी वजह से बच्चा नीचे की दिशा में मुड़ जाता है।
  5. पानी से होने वाले फायदे :- benefits of water :- इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि गर्भवती महिला पानी में आराम और हल्का महसूस करती है। यदि आप तैराकी जानती हैं। तो आप पानी में आगे और पीछे फ्लिप कर सकती हैं या ब्रेस्टस्ट्रोक भी आजमा सकती हैं। यह बच्चे के सिर को नीचे की तरफ लाने में बहुत मदद करता है। यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यह एक उपयोगी और प्रभावी तकनीक है। हालांकि, पानी में जाते समय सावधान रहने की जरूरत है पानी में शीर्षासन करने से पहले किसी ऐसे व्यक्ति की मदद लें जो आपके दोनों पैरों को पोजीशन में रख सके।
  6. बच्चे के लिए थोड़ा शोर मचाएं :- Make some noise for the baby :- आपको जानकर हैरानी होगी कि जब आप तीसरी तिमाही में पहुंचती हैं तो बच्चा बाहर से आने वाली आवाजों पर अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है। इसलिए यह तरीका भी सकारात्मक रूप से काम करता है। आपको बस कुछ सूदिंग यानी शांत करने वाला संगीत बजाना है और हेडफोन को पेल्विस के हिस्से पर रखना है। बच्चा इस संगीत को सुनेगा और स्वाभाविक रूप से नीचे चला जाएगा जहां से आवाज आ रही होगी।
  7. मसाज करें :- Massage :- प्रीनेटल मसाज पुराने समय से ही काफी लोकप्रिय रही है। मालिश हर उस समस्या का एकमात्र समाधान है जिसका एक गर्भवती महिला को सामना करना पड़ता है। मालिश आराम करने और गर्भावस्था के तनाव और दर्द से बहुत जरूरी ब्रेक पाने में मदद करती है। मालिश बच्चे को सही पोजीशन में लाने में काफी मदद करती है। आपको पता होना चाहिए कि जब आप गर्भवती होती हैं, तो लिगामेंट्स, टेंडन और यहां तक ​​कि पेल्विक के आसपास की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। लेकिन सही तरह की मालिश से आपके शरीर और दिमाग को आराम मिलेगा और इस तरह बच्चे के नीचे की ओर मुड़ने का रास्ता बन जाएगा।

ब्रीच बेबी को सही पोजीशन में लाने के लिए एक्सरसाइज Exercises to Get a Breech Baby into the Correct Position

व्यायाम भी आपके ब्रीच बेबी को सामान्य पोजीशन में लाने में मदद करता है। साथ ही, व्यायाम करने से आप फिट रहती हैं और मूड भी अच्छा रहता है, तो क्यों न कुछ कोशिश करें कि आपके बच्चे को हिलने-डुलने के लिए कुछ जगह मिले। इन व्यायामों की मदद से बच्चे को गर्भावस्था के 37 हफ्ते से पहले सही पोजीशन में आने के लिए घूमने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। हालांकि, 37 हफ्ते या उसके बाद ब्रीच बेबी को केवल डॉक्टर की मदद से ही घुमाना चाहिए।

  1. अपने शरीर को टेढ़ा करें :- Twist your body :- इस तरीके को टिल्ट मेथड भी कहा जाता है, इस एक्सरसाइज को आयरन बोर्ड की मदद से आसानी से किया जा सकता है। सोफे जैसी कोई स्थिर सतह ढूंढे और आयरन बोर्ड के एक सिरे को ढलान की पोजीशन में सोफे पर और दूसरे सिरे को फर्श पर रखें। अपने सिर को फर्श की ओर और अपने पैरों को सोफे की ओर करके बोर्ड पर लेट जाएं। लेकिन किसी अपने को साथ रखें क्योंकि संतुलन कभी भी बिगड़ सकता है। यह झुकाव बच्चे के सिर पर थोड़ा दबाव डालेगा, और वह शायद अपनी ठुड्डी को टक कर लेगा, इस प्रकार उसके पलटने की संभावना अधिक है। इस एक्सरसाइज को दिन में कम से कम 3 बार करें और बाद में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए प्रत्येक सत्र को 10-15 मिनट तक करें।
  2. घुटने से छाती तक :- knee to chest :- यह एक्सरसाइज गुरुत्वाकर्षण पर आधारित है। यह एक साधारण व्यायाम है जिसमें आप एक चटाई पर अपने घुटनों के बल लेट जाती हैं। इसके बाद, अपने हाथों को जमीन पर रखें, अपनी ठुड्डी को इन पर टिकाएं और अपने बट को हवा में ऊपर उठाएं। इस पोजीशन में लगभग 5-10 मिनट तक रहें। यह व्यायाम आपके गर्भाशय के निचले हिस्से को फैलने में मदद करता है, इस तरह बच्चे को सही दिशा में मुड़ने के लिए अधिक जगह मिलती है। दिन में कम से कम 2 बार इस व्यायाम को करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, इसे खाली पेट करने की कोशिश करें, वरना यह बाद में बेचैनी या मतली को बढ़ा देता है। यदि आपको लगता है कि इस व्यायाम को करते समय आपका बच्चा मुड़ रहा है, तो अपने एक हाथ का उपयोग करके बच्चे के पीछे के हिस्से पर हल्का दबाव डालें जो कि प्यूबिक बोन के ठीक ऊपर होता है।
  3. कैट-काऊ पोजीशन :- Cat-Cow Position :- इसे हैंड एंड नी पोजीशन भी कहा जाता है, एक माँ होने के नाते आप इस एक्सरसाइज पर अपने बच्चे के घूमने के लिए भरोसा कर सकती है। यह पोजीशन शरीर को लचीला बनाने में मदद करती है ताकि बच्चे को आसानी से पलटा जा सके। अपने लिए एक योगा मैट या एक साधारण मैट लें। अब अपने घुटनों और हाथों के बल पर चटाई पर झुकें और पेट को नीचे करें। यह पोजीशन गाय के पोस्चर के समान होती है। इसके बाद अपनी पीठ को कर्व पोजीशन में उठाएं और वहीं रहें। यह बिल्ली की पोजीशन के समान है। इसे दिन में 3-4 बार दोहराएं और देखते ही देखते बच्चा अपनी सही पोजीशन में आ जाएगा।
  4. उल्टा होकर आगे की ओर झुकना :- inverted forward bend :- यह व्यायाम घुटने से छाती तक के व्यायाम के समान होता है, लेकिन इसमें थोड़ा अधिक प्रयास किया जाता है। घुटने से छाती तक के व्यायाम के समान पैटर्न का पालन करें। हालांकि, इस बार अपने निचले शरीर को सोफे या बिस्तर पर और अपने ऊपरी शरीर के हिस्सों, यानी सिर और कोहनी को जमीन पर रखें। अपनी ठुड्डी को मोड़ना न भूलें क्योंकि यह कदम पेल्विक की मांसपेशियों को आराम देने में मदद करेगा। इस एक्सरसाइज को करते समय किसी को अपने पास रखें। लगभग 30 सेकंड तक इसी पोजीशन में रहें और इसे दिन में 3-4 बार दोहराएं।
  5. अपने पोस्चर पर ध्यान दें :- Pay attention to your posture :- व्यायाम करना अहम है, लेकिन जो अधिक जरूरी है वह है अपना पोस्चर सीधा खना। एक सही पोस्चर आपके बच्चे को पलटने के लिए पर्याप्त जगह प्रदान करेगा। अच्छा पोस्चर बनाए रखने का सही तरीका यह है कि अपनी ठुड्डी को जमीन से सीधा करके खड़े हों। अपने कंधों को पीछे की दिशा में ले जाने की कोशिश किए बिना उन्हें स्वाभाविक रूप से आराम करने दें। याद रखें कि झुकी हुई पोजीशन में खड़े न हों जैसे कि आपका पेट फुला हुआ हो और अपने कूल्हों को खींचे ताकि शरीर का ग्रेविटेशनल पुल उन पर बना रहे।

ध्यान रखने योग्य बातें Things to keep in mind

ब्रीच बेबी को घुमाना एक चुनौतीपूर्ण काम हो सकता है। यदि आप ऊपर बताई गई तकनीकों और एक्सरसाइज को आजमाती हैं, तो आप उन्हें सही पोजीशन में ला सकती हैं। हालांकि, कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के दौरान किसी भी समस्या से बचा जा सके।

  1. ब्रीच बेबी की पोजीशन तब तक सामान्य है जब तक आप गर्भावस्था के 30वें हफ्ते तक नहीं पहुंच जाती हैं और 32वें हफ्ते तक ठीक हो जाती हैं।
  2. किसी भी तकनीक या व्यायाम को आजमाने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह जरूर लें क्योंकि आपको या बच्चे को इस स्थिति से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।
  3. यदि गर्भावस्था के 37वें सप्ताह के अंत तक आपका बच्चा अभी भी ब्रीच पोजीशन में है, तो मेडिकल मदद लेने की सलाह दी जाती है।
  4. ऐसे हालात में आपको अपने ऊपर भरोसा रखने और सकारात्मक होने की जरूरत है और दुःखी नहीं होना यह सोचकर कि आपके साथ ऐसा क्यों हुआ।
  5. ईसीवी उन गर्भवती महिलाओं के लिए इस्तेमाल की जाने तकनीक नहीं है जिनके गर्भ में जुड़वां बच्चे हैं या वे गर्भवती महिलाएं जिनके गर्भाशय का आकार दिल जैसा हो और नाशपाती के आकर जैसा नहीं।
  6. अपने आप पर, अपने बच्चे पर और अपने शरीर पर भरोसा करें; कभी-कभी आपको बस इतना करना होता है कि धैर्य रखकर इंतजार करें और बच्चे को सामान्य रूप से सिर नीचे करने की पोजीशन में लाएं। ऐसे में घबराना कोई समाधान नहीं है।
  7. बच्चों में हिप डिस्प्लेसिया या दिमाग तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याओं से बचने के लिए ब्रीच बेबी को घुमाना जरूरी हो जाता है।
  8. बात करना कभी-कभी मददगार साबित होता है। दिल से निकले शब्द आपकी सहायता कर सकते हैं। अपने पेट पर हाथ रखकर बात करें; बच्चे को यह सुनने दें कि आप क्या चाहती हैं और इस पोजीशन में उसे क्या करने की जरूरत है।
  9. जितना हो सके उतना पानी पिएं। शरीर की सभी समस्याओं के लिए तरल पदार्थ पीना एक प्रभावी समाधान है, और इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता है।
  10. यदि कोई अन्य तकनीक काम नहीं करती है तो सी-सेक्शन अपनाना ही आपका अंतिम विकल्प है। बाद में किसी भी समस्या से बचने के लिए सी-सेक्शन के लिए पहले से ही योजना बनाना हमेशा बेहतर रहता है।

गर्भावस्था के दौरान सावधान‍ियां बरतें Precautions to take during pregnancy

अगर आपके श‍िशु की पोज‍िशन आड़ी है ब्रीच आप कुछ बातों का ध्‍यान रखें-

श‍िशु अगर आड़ा है तो आपको कुछ बातों का खास ख्‍याल रखना है जैसे पोज‍ि‍शन ठीक करने के क‍िसी भी घरेलू उपायों को न आजमाएं नहीं तो स्‍थ‍ित‍ि गंभीर हो सकती है।

  1. अगर 36वें सप्ताह के बाद भी बच्चा उल्टा है, तो तुरंत डॉक्टर से बात करें।
  2. अगर आपको एक्सरसाइज के दौरान कोई दर्द या तकलीफ होती है तो तुरंत बंद कर दें।
  3. पीठ के बल लेटकर कूल्हों (hips) के नीचे तकिया लगाकर 10-15 मिनट रहें।
  4. घुटनों और हाथों के बल झुककर (चौपाया होकर) पीठ को ऊपर-नीचे करें।
  5. बैठने की स्थिति में पैरों को तितली की तरह हिलाएं।
  6. हमेशा बाईं ओर करवट लेकर सोएं या आराम करें।
  7. आपको प्रेगनेंसी के दौरान क‍िसी भी तरह इंजरी से बचना है।
  8. इस दौरान आप भारी चीजों को न उठाएं वहीं ज्‍यादा चलने या उठने से बचें।
  9. अगर श‍िशु की ब्रीच पोज‍िशन है तो समय-समय पर डॉक्‍टर से चेकअप करवाते रहें और उनकी सलाह के बगैर क‍िसी दवा का सेवन न करें।
  10. ब्रीच बेबी की स्थिति में आप योगा कर सकती हैं पर इंटेंस वर्कआउट करने से आपको परहेज करना है।
  11. ब्रीच बेबी की स्‍थ‍ित‍ि में आप वॉक कर सकती हैं पर तेज चलने से बचें, आप हल्‍की स्‍ट्रेच‍िंंग कर सकती हैं।
  12. आपको तीसरी त‍िमाही के बाद रूटीन चेकअप के ल‍िए डॉक्‍टर के पास जरूर जाना चाह‍िए।
  13. पेट पर दबाव न डालें।
  14. पेट की मालिश से बच्चा और ज्यादा उल्टा हो सकता है या नाल गले में फंस सकती है।
  15. तनाव कम करें।
  16. देर तक न झुकें।

बच्‍चे की पोज‍िशन आड़ी-त‍िरछी हो जाए तो आप च‍िंता न करें और खुद से इलाज ढूढने के बजाय डॉक्‍टर से संपर्क करें।

परामर्श :- Consultation

पेट में बच्चे का उल्टा (Breech Position) होना 34-36 सप्ताह तक सामान्य हो सकता है, क्योंकि वे खुद घूम सकते हैं। ऐसे में घबराएं नहीं, डॉक्टर से मिलें और ब्रिज टिल्ट या कैट-पोज एक्सरसाइज करें। भारी वजन न उठाएं और अधिक से अधिक बाईं करवट (Left Side) लेकर सोएं।

अगर गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।

कोई भी उपाय करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।

गर्भावस्था के दौरान कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।

डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।

यह एक सामान्य जानकारी है। अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं। तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।

Comments

Popular posts from this blog

किशोरावस्था क्या है? What is adolescence?

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) कारण लक्षण इलाज। Premenstrual syndrome (PMS) causes, symptoms, and treatment

First pireod पहला पीरियड कैसा होता है: सभी संकेत