गर्भाशय क्या है? सम्बंधित समस्याएं लक्षण और इलाज What is the uterus? Related problems, symptoms, and treatment

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गर्भाशय क्या है? जानें सम्बंधित समस्याएं और इलाज What is the uterus? Learn about related problems and treatments. गर्भाशय महिलाओं का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। इसे प्रजजन अंग के नाम से भी जाना जाता है। बच्चादानी या गर्भाशय वही जगह होती है, जहां भ्रूण का विकास होता है और 9 महीने होने तक उसका पोषण होता है। जो श्रोणि में स्थित होता है। यह गर्भावस्था के दौरान विकासशील भ्रूण के पोषण और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। यह एक मांसपेशीय अंग है जो जो स्त्री प्रजनन काल में माहवारी, गर्भधारणा,और प्रसव के दौरान अहम भूमिका निभाता है। हैलो फ्रेंड्स! मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन } मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें। आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार ...

पीरियड में ब्लड आना कितना खतरनाक ?

पीरियड में ब्लड आना कितना खतरनाक ? जानें किस रंग का ब्लड आना बढ़ा सकता है आपकी परेशानी

हैलो फ्रेंड्स!

मैं { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }

मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।

पीरियड्स के दौरान हेवी ब्लीडिंग (blood in period) नहीं हुई तो पहली बार ब्लीडिंग होते हुए देखना आपके लिए बेहद डरावना भी साबित हो सकता है। जानें पीरियड के दौरान किस प्रकार का ब्लड आने पर आपको चिंतित होना चाहिए।

अगर आपको पहले कभी भी पीरियड्स के दौरान हेवी ब्लीडिंग (blood in period) नहीं हुई तो पहली बार ब्लीडिंग होते हुए देखना आपके लिए बेहद डरावना भी साबित हो सकता है। लेकिन पीरियड्स के दौरान निकलने वाला रक्त, जो कभी-कभी गाढ़ा, चिपचिपा होता है, वह रक्त को लेकर आपकी पूरी जानकारी बदल सकता है। आपको ये जानने में मुश्किल हो सकती है कि सामान्य पीरियड अवधि में रक्त (blood in period) कैसा दिखता है। इस लेख में हम आपको ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि पीरियड के दौरान क्या नार्मल है और क्या नहीं। इतना ही नहीं हम आपको ये भी बताएंगे कि पीरियड के दौरान किस प्रकार का ब्लड आने पर आपको चिंतित होना चाहिए और क्या करना चाहिए। तो आइए जानते हैं।

पीरियड में ब्लड कितना स्वभाविक :-

आमतौर पर पीरियड के दौरान ब्लड आना किसी प्रकार की चिंता का कारण नहीं है। ज्यादातर मामलों में महिलाओं को पीरियड के दौरान एक मामूली का रक्त का थक्का और जेलनुमा ब्लड आता है , जो कि यूट्रस से निकलता है। छोटे-छोटे रक्त के थक्के आना सामान्य होते हैं। हां, इस बात को जरूर याद रखें कि आपका पीरियड प्रत्येक मासिक धर्म चक्र के पहले दिनों की ओर इशारा करता है, जब आपके गर्भाशय की लाइनिंग को आपके शरीर अलग कर देता है। पीरियड के दौरान ब्लड आना इस छोड़े गए गर्भाशय लाइनिंग, रक्त और योनि द्रव का एक मिश्रण है।

आपके पीरियड्स के पहला दिन या फिर दूसरे दिन बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो सकती है। इन दोनों दिनों में आपको अपने शरीर से निकलने वाले रक्त में भिन्नता भी दिखाई दे सकती है।

पीरियड्स के दौरान रक्त निकलना कब चिंता का विषय है।

पीरियड्स में चिपचिपे द्रव के साथ रक्त निकलना :-

पीरियड्स के दौरान चिपचिपे, द्रव के साथ रक्त के छोटे-छोटे धब्बे, जो कि बहुत ज्यादा गाढ़े होते हैं और ये आपके गर्भाशय के अस्तर के साथ अत्यधिक केंद्रित हो सकते हैं। पीरियड के दौरान निकलने वाले इस प्रकार के रक्त के धब्बे आमतौर पर गहरे या चमकदार लाल रंग के होते हैं।

पीरियड्स में भारी रक्तस्त्राव :-

आपके पीरियड के दिन जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, आपको अपना रक्त जेली नुमा जैसा दिखाई दे सकता है या फिर धब्बों का आकार मोटा हो सकता है। यह आमतौर पर आपके शरीर से गुजरने वाले रक्त के थक्कों के कारण होता है। यह आपके पीरियड के दिनों में कभी भी हो सकता है और ये सामान्य है।

हालांकि, ऐसा आपको अपने पीरियड के बाद के दिनों में देखने को मिलेगा क्योंकि तब तक रक्त का प्रवाह धीमा होने लगता है। ये थक्के चमकीले लाल, गहरे लाल या भूरे रंग के हो सकते हैं।

पीरियड के दौरान रक्त के साथ द्रव का निकलना :-

पीरियड के आखिरी दिनों में आपके पीरियड का ब्लड पानी और पतला जैसा दिखाई देने लगता है। इसका रंग भी गहरा हो सकता है क्योंकि रक्त ऑक्सीकरण करना शुरू कर देता है। पीरियड के दौरान निकलने वाला ब्लड जो कि चमकीला लाल और पानी जैसा होता है, वह रक्त सीधा आपके गर्भाशय से आता है। यह चोट या फिर गर्भपात का संकेत भी हो सकता है।

अगर आप अपने गर्भाशय से आने वाले चमकीले लाल, पानी जैसे रक्त को देखती हैं, तो विशेष रूप से आपको डॉक्टर से मिलने की जरूरत है खासकर अगर आप गर्भवती हैं तो। अगर आप अपने पीरियड के दौरान लगातार बड़े-बड़े रक्त के थक्कों को देख रही हैं तो भी आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर से बात करने की जरूरत है। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|

परामर्श :-

आमतौर पर महिलाएं पीरियड्स और प्रेगनेंसी को लेकर बहुत कम जागरूक होती हैं। इसलिए पीरियड्स में अनियमितता आने, सामान्य से अधिक या कम ब्लीडिंग होने, ब्लीडिंग के रंग में बदलाव या उससे बदबू आने या प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कोई समस्या होने पर वे तुरंत घबरा जाती हैं।

अगर आपको ऐसा लग रहा है कि ओव्यूलेशन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जांच करा कर इलाज करवाना चाहिए।

अगर महिलाओं को गर्भधारण करने में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।

अगर महिलाओं को र्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।

किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं एवं सप्लीमेंट का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।

अगर आपको पीरियड्स या प्रेगनेंसी से संबंधित किसी तरह की कोई परेशानी या कन्फ्यूजन है तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर इस बारे में बात करना चाहिए।

यह एक सामान्य जानकारी है अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए

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