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पहला पीरियड कैसा होता है: सभी संकेत, लक्षण और जरूरी उपाय
पहला पीरियड्स शुरू होने से पहले मां को मिलने लगते हैं ये संकेत
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
पहले पीरियड्स के होते हैं ये संकेत
पहला मासिक धर्म या माहवारी का मूल कारण क्या होता है़?
पीरियड कैसा होता है: सभी संकेत, लक्षण और जरूरी उपाय
मासिक धर्म या माहवारी का मूल कारण क्या होता है़?
ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे आप ये जान सकें कि लड़कियों को किस दिन उसका पहला पीरियड आएगा, लेकिन कुछ संकेतों की मदद से आप लड़कियों को उसके पहले पीरियड के लिए तैयार जरूर कर सकती हैं।
हर मां को अपनी बेटी को उसके पहले पीरियड के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करना चाहती है, लेकिन उनके लिए यह जानना बहुत मुश्किल होता है कि उनकी बेटी का पहला मासिक चक्र कब आएगा ताकि वो इसके लिए अपनी बेटी को तैयार कर सकें।
अगर आपकी बेटी भी प्यूबर्टी एज में है और आप उसके पीरियड्स शुरू होने का अंदाजा लगाने की कोशिश कर रही हैं, तो यहां बताए गए कुछ संकेत आपकी मदद कर सकते हैं।
पहला पीरियड
आपके पहले मेंस्ट्रुअल पीरियड को मिनार्की कहा जाता है। यह आमतौर पर 10-12 साल की उम्र के आसपास होता है। आपका पहला पीरियड कब आएगा इसके संकेत और लक्षणों के बारे में और जानें।
पहला पीरियड या मिनार्की - एक जैविक प्रक्रिया है जो हर लड़की में प्यूबर्टी आने पर होती है। यह एक इशारा है किअब आपका शरीर प्रजनन के लिए तैयार है। प्यूबर्टी आपके जीवन की वह अवस्था है जब आप एक लड़की से एक औरत बन जाती हैं।इसमें कई तरह के बदलाव भी देखने को मिलते हैं। बाहर से आप पाएंगी कि आपकी कांख और प्यूबिक एरिया के आस-पास बाल आने लगे हैं, और आपके स्तन भी विकसित होने लगेंगे। अंदर से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन जैसे मादा फ़ीमेल हॉर्मोन के स्त्रावित होने पर आपका पीरियड शुरू हो जाएगा।
ज़्यादातर लड़कियों में उनका पहला पीरियड 12 साल की उम्र तक आता है। हालंकि, हर लड़की एक दूसरे से अलग होती है और उनका विकास भी अलग-अलग होता है। कुछ लड़कियों में पीरियड 8 साल की उम्र से ही शुरू हो जाते हैं जबकि कुछ में यह 15 साल की उम्र तक भी हो सकता है। दोनों ही सूरत में यह एकदम सामान्य बात है, और इसमें परेशान होने जैसी कोई बात नहीं है।
मासिक धर्म या माहवारी का मूल कारण क्या होता है़?
पीरियड यानी मासिक धर्म मेंस्ट्रुएशन तब होता है जब शरीर प्रजनन के लिए सक्षम हो जाता है। जब मासिक धर्म चक्र शुरू होता है तो आपके एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है। इससे आपके गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है। और यह एक निषेचित अंडों का समर्थन कर सकती है और गर्भावस्था में विकसित हो सकती है।
और यदि निषेचित अंडा नहीं है, तो आपका शरीर परत/लाइनिंग तोड़ देगा और इससे आपके गर्भाशय से बाहर निकाल देगा। जिसके परिणामस्वरूप रक्तस्राव होता है। जिसे हम माहवारी, पीरियड, मेंस्ट्रुएशन, मासिक धर्म चक्र आदि नामों से जानते हैं।
इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपको कई साल से पीरियड आ रहे हैं, या फिर पहली बार आने वाले हैं- पीरियड को नेविगेट करना मुश्किल ही होता है।
कब होगा लड़कियों पहला पीरियड / मासिक धर्म पहले पीरियड्स के होते हैं ये संकेत
ज्यादातर लोगों के पीरियड 12 से 13 साल की उम्र के बीच शुरू हो जाते हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इससे पहले या बाद में शुरू होने पर कुछ गड़बड़ है। वह भी सामान्य है। कई बार इससे पहले या इस उम्र के बाद भी आ सकते हैं। इससे कोई दिक्कत नहीं है।
पीरियड होने की कोई उम्र फिक्स नहीं होती है। किसी को 13 साल की उम्र में पहली बार पीरियड होता है तो किसी को 11 साल की उम्र में भी पीरियड्स हो जाते हैं। ऐसे में आप बेटी के शारीरिक बदलाव से उनके पहले पीरियड्स का अंदाज लगा सकती हैं।
और अच्छी तरह समझने के लिए यह जाने लें कि स्तनों के विकसित होने के लगभग दो साल बाद मासिक धर्म शुरू होता है
शुरुआती संकेत क्या हैं जिनसे लड़कियों पता चले कि मेरा पहला पीरियड आने को है?
आपके पीरियड कितने करीब हैं इसे जानने का सबसे सही तरीका है यह ध्यान रखना कि आप में प्यूबर्टी के संकेत दिखने लगे हैं या नहीं। जैसे ही आप में प्यूबर्टी शुरू होती है, पहले पीरियड के ऐसे कुछ संकेत हैं जिनका आप ध्यान रख सकती हैं। इससेआपको अपने पहले पीरियड के लिए घबराहट भी कम होगी, और आप पहले से ही आने वाले समय के लिए ज़रूरी प्रोडक्ट के साथ तैयार रहेंगी।
ब्रैस्ट बड्स: इसकी शुरुआत में आपके निप्पल्स के आसपास छोटे और ऊँचे उभार बनने लगेंगे और साथ ही निप्पल के आसपास का काले रंग का एरिया भी बढ़ने लगेगा जिसे एरिओला कहते हैं। एरिओला फूला सा दिखने लगेगा। यह आपके स्तन के विकसित होने की शुरुआत है। लड़कियों के स्तन का विकास होने के दो साल बाद लड़कियों को पहला पीरियड आता है। अगर 9 साल की उम्र में ब्रेस्ट बड्स का विकास होता है तो 12 से 13 साल की उम्र में पीरियड्स हो सकते हैं।
प्यूबिक हेयर: प्यूबर्टी की शुरुआत ही में आप देखेंगे कि आपके गुप्तांगों के आसपास बाल आने लगते हैं। इसके अलावा वेजाइना में भी हेयर ग्रोथ शुरू हो जाती है। जो कि पहले पीरियड का संकेत होता है। इसकी शुरुआत छोटे बालों से होती है जोकि बाद में जैसे-जैसे बढ़ते जाते हैं और भी घने और घुंघराले होते जाते हैं। आपके पहले पीरियड के आसपास ही आप की कांख में भी बाल उगने लगते हैं।
आपके शरीर में होने वाले कुछ और बदलाव: पहले पीरियड के शुरुआती संकेतों में आपके शरीर के आकार में तेजी से बदलाव होना। आप देखेंगी कि आपके कद के साथ-साथ आपका वज़न भी एकदम से थोड़ा बढ़ गया है। आपकी कमर सुडौल हो जाएगी और शरीर का नीचला हिस्सा भी थोड़ा सा बड़ा हो जाएगा।
फ्लूइड डिस्चार्ज द्रव पदार्थ रिसना: आपके पहले पीरियड के समय आपके जननांग से एक द्रव जैसा पदार्थ स्त्रावित होता है, जिसे वेजाइनल डिस्चार्ज भी कहते हैं। यह म्यूकस की तरह दिखने वाला डिस्चार्ज गाढ़ा या पतला, रंगहीन से सफ़ेद या हल्का सफ़ेद रंग का हो सकता है जिसकी कोई गंध नहीं होती है। इस डिस्चार्ज का रंग और दूसरी विशेषताएं हर लड़की में अलग-अलग होती है, और आपको इसका एहसास आपका पहला पीरियड आने के 6 से 12 महीने पहले हो सकता है।
पहले पीरियड के संकेतों को समझने की जरूरत है?
क्या कुछ और लक्षण भी हो सकते हैं?
आपको ऐंठन होना
जी मिचलना या उल्टी होना
किसी काम में मन न लगना आदि लक्षण भी हो सकते हैं।
यह जरूरी नहीं, कि यह लक्षण आप हर बार महसूस करें। यह आते जाते रह सकते हैं। कभी हुआ तो कभी नहीं। यह किसी चिंता का विषय भी नहीं। यह नाॅर्मल होता है।
लेकिन कुछ लड़कियों को उनके पीरियडस के दिनों में पीएमएस का अनुभव हो सकता है। जैसे-
एकदम से मुंहासे निकलने लगना।
ब्रेस्ट में दर्द होना / पीठ दर्द होना
कब्ज होना / दस्त होना
पैरों या जांघों में दर्द होना
सामान्य से अधिक थकान महसूस करना ।
बहुत अधिका इमोशनल या चिडचिड़ापन महसूस करना।
नाॅर्मल से ज्यादा भूख लगना। विशेष रूप् से मिठाइयों के लिए मन करना।
योनि से सफेद स्राव निकलना।
आपको अपने बैग में पीरियड किट रखनी होगी। उससे काफी मदद मिल सकती है, ताकि जब कभी या एकदम से पीरियड आ जाएं, तो ‘ब्लैंक’ सी सिचुएशन न उत्पन्न होने पाए।
किट में शामिल है-
एक स्पेयर एक्स्ट्रा अंडरवियर
2 पैड
एक साफ कपड़ा/वाइप्स
पेन किलर
लड़कियों पीरियड अभी शुरू हुए हैं - क्या करे
सबसे पहले तो बिलकुल मत घबराइए। पीरियड आना एकदम सामान्य बात है। अगर आप कर सकें तो बस अपनी पसंद के हिसाब से सही हाइजीन प्रोडक्ट - जैसे पैड, टेम्पन या मेंस्ट्रुअल कप्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दें। और अगर आपको ज़्यादा जानकारी नहीं है तो अपनी माँ या बड़ी बहन से सलाह करें, अगर आप स्कूल में हैं तो अपनी टीचर से बात करें।
पीरियड अभी शुरू हुए हैं? लड़कियों क्या करना चाहिए?
यदि अचानक से आपके पीरियड शुरू हो गए हैं, और आपके पास ब्लीडिंग कंट्रोल करने के लिए कुछ नहीं है, तो पैनिक न करें। अपने साफ रुमाल टाॅयलेट पेपर या टाॅवेल नैपकिन का इस्तेमाल कर लें। हालांकि यह पर्मानेंट/स्थायी निवारण नहीं है। लेकिन यह उपाय पैड लेने जाने तब तक आपकी मदद जरूर कर सकता है।
और यदि आप अपने स्कूल में हैं, तो अपनी क्लास टीचर या मेडिकल रूम से आसानी से मदद ले सकती हैं।
ये सब लड़कियों के साथ ही क्यों होता है?
पीरियड आने का मतलब है आपका सही विकास हो रहा है और आप एक स्वस्थ महिला बन रही हैं। लड़कियों में प्यूबर्टी के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन जैसे फ़ीमेल सेक्स हॉर्मोनअपना काम करना शुरू कर देते हैं और इसलिए पीरियड आता है।
ये आपके शरीर को रिप्रोडक्शन के लिए तैयार करते हैं, जिसके चलते आपके गर्भाशय यूटेरस की दीवारें और भी मोटी हो जाती है ताकि निषेचित डिंबों फर्टिलाइज़्ड एग को संभावित गर्भावस्था के दौरान पोषण मिल सके। पोषण देने के लिए ज़रूरी फर्टिलाइज़्ड एग की अनुपस्थिति में यह मोटी भित्ति दिवार टूट जाती है और आपके वेजाइना से बाहर निकाल दी जाती है। इसी वजह से पीरियड के दौरान रक्त स्त्राव ब्लीडिंग होता है।
कितने दिन चलेगा पहला पीरियड?
आपकी पहली माहवारी केवल कुछ दिनों तक ही चल सकती है। कई बार तो यह केवल स्पाॅटिंग तक भी सीमित रह सकती है।
रेग्युलर पीरियडस को आने या रेग्युलर होने में कुछ महीने लग सकते हैं।
लेकिन जब एक बार पीरियड रेग्युलर हो जाएं तो हर महीने सात से तीन दिनों की अवधि में आते हैं।
पहले पीरियड में मैं किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
भले ही यह आपका पहला पीरियड हो, या इसे शुरू हुए समय हो गया हो, पीरियड में परेशानी हो सकती है, और कभी-कभी तकलीफ बढ़ भी सकती है। पीरियड के दौरान थोड़ी परेशानी होना एक आम बात है और इसमें किसी भी तरह की चिंता की कोई बात नहीं होती।
आपके लिए ऐसा पीरियड प्रोडक्ट चुनना बहुत जरुरी होता है जिसे इस्तेमाल करना और साथ ही हाइजीन बनाये रखना आसान हो। जितना जल्दी हो सके अपने पैड या टेम्पन बदलते रहे और जितना हो सके आराम करें। अगर आपको पीरियड के समय पेट दर्द महसूस हो, तो उससे आराम पाने के लिए गरम पानी की बोतल या गर्म पैड का इस्तेमाल करें। पेट के नीचे वाले भाग में गर्म सेंक देने से दर्द में काफी राहत मिलती है।
पहले पीरियड में कितना ब्लड लाॅस हो सकता है?
पहले कुछ पीरियड अक्सर हल्के ही होते हैं। स्पाॅटिंग टाइप। या फिर बेहद हल्के लाल-भूरे रंग के रक्त के धब्बों के साथ।
बाद में समय के साथ हार्मोन स्थिर होने के साथ ही आपकी मासिक धर्म अधिक हो जाएंगे।
जहां तक ब्लड लाॅस की बात आती है। तो एक बार की मासिक अवधि में करीब 6 टेबल स्पून ब्लड लाॅस का आंकड़ा सामने आता है। जो सुनने में ज्यादा लग सकता है, लेकिन ‘प्लैन्ड पेरेन्टहुड’ के मुताबिक यह एक कप का केवल एक-तिहाई ही होता है।
हालांकि भारी रक्तस्राव बहुत ज्यादा चिंता का विषय नहीं हैं। लेकिन अगर आपको लगता है कि आपको कुछ ज्यादा ही ब्लीडिंग हो रही है, या आपसे मैनेज नहीं हो पा रहा है, तो आप अपने अभिभावकों या मदद के लिए स्कूल नर्स को बता सकती हैं।
आप अपने किसी भरोसेमंद बड़े को अपनी स्थिति से अवगत करा सकते हैं,
हर 1 से 2 घंटे के अंतर पर अपना पैड बदलने की जरूरत पड़ रही है तो!
आप हल्का महसूस कर रही हैं।
चक्कर महसूस हो रहे हैं।
आपको दिल की धड़कने तेज लग रही हों।
यदि ब्लीडिंग 7 दिनों से भी ज्यादा समय तक के लिए हो रही हो।
तो आपके बड़े या अभिभावक आपको डाॅक्टर से पास ले जाए और समय से सही सलाह मिल सके।
डाॅक्टर आपकी सही स्थिति का जायजा लेकर आपको दवा दे देंगे। यदि जरूरत हुई तो!
पीरियड दूसरों को भी पता होता है?
नहीं! आप न तो अलग दिखने लगती हो, और न ही कोई स्मेल आती है। यह तभी संभव है, कि किसी को स्मेल आ जाए, यदि गंदे यानी ब्लीडिंग वाले पैड या अंडरवियर को समय से ज्यादा देर के लिए लगाए रखा जाए।
स्मेल से बचने के लिए अपने जननांगों को गुनगुनो पानी से साफ करें। और सफाई का पूरा ध्यान रखें।
पीरियड के दौरान पेट की ऐंठन से कैसे बचा जा सकता है?
हालांकि ऐंठन असहज होती है। लेकिन इससे राहत पाना मुमकिन है।
पहला तरीका है, पेट की सिंकाई।
गर्म पानी की बोतल या बैग को पेट के निचले हिस्से में लगाकर रखें।
ठंडी चीजें खाने से बचें। गर्म पानी या दूध पिएं।
लेकिन तकलीफ इससे कहीं ज्यादा हो, तो अपनी मम्मी को बताएं। वो आपको डाॅक्टर के पास ले जाएंगी।
रक्तस्राव को रोकने के लिए किन चीजों का उपयोग कर सकती हैं।
आपके पास कई अलग-अलग विकल्प हैं, जिनका उपयोग आप रक्तस्राव को रोकने के लिए कर सकते हैं।
सबसे अच्छा क्या है? इसे जानने से पहले शायद आपको कुछ चीजों को ट्राई करने की आवश्यकता होगी, ताकि आपके लिए बेस्ट क्या रहेगा? इस नतीजे पर आसानी से पहुंचा जा सके।
क्योंकि अच्छा होने से भी ज्यादा जरूरी है कि आप अच्छे से क्या कैरी कर पा रही हैं।
कई बार ऐसा भी होता है, कि शुरुआत में जो हमारे लिए बेस्ट हो वह बाद में जरूरत के हिसाब से बदल जाए। मानें- ब्लींडिंग के आधार पर। इसलिए हमेशा अपनी तबीयत और जरूरत के हिसाब से ही चीजों का चुनाव करें।
जैसे- पैड, लाॅन्ग पैडस और टैम्पोन हल्के से नाॅर्मल पीरियड के लिए काफी अच्छी तरह काम करते हैं। और यह एक बार लगाने पर कम से कम 4 घंटे का आराम तो देते ही देते हैं। हालांकि कई बार यह ब्लीडिंग की मात्रा के हिसाब से थोड़ा आगे पीछे हो सकता है।
जरूरी बाम- स्कूल जाने वाली लड़कियों को हमेशा लाॅन्ग या एक्स्ट्रा लाॅन्ग पैड का ही इस्तेमाल करना चाहिए। यह दाग से कपड़ों को बचाने के लिए बेस्ट काम करते हैं।
इसके अलावा होते तो टैम्पोन और मेन्स्ट्रुअल कप भी हैं। लेकिन पहली बार के या शुरू के पीरियड के लिए शायद यह उपयुक्त न हों। क्यों?
क्योंकि एक तो इनकी जरूरत नहीं।
दूसरे, इनके लिए आपको कुछ गाइडेंस की जरूरत पड़ेगी। इस लिहाज से आपके लिए शुरुआत में सिंपली पैड का ही विकल्प चुनना बेहतरऔर बेस्ट रहेगा।
क्या करें जब आ जाएं कपड़ों पर दाग? क्या वे इस्तेमाल करने लायक नहीं रहते?
जरूरी नहीं है। एक बात अच्छे से जान लें, कि यह हर किसी के साथ होता या हो सकता है।
हम सब समय के साथ चीजों को मैनेज करना सीखते हैं।
लीक हर किसी के साथ हो सकता है। आप बस खुद को प्रीपेयर रखें। इसके लिए, बैग में हमेशा वाइप्स रखें।
इसके अलावा, पीरियड के टाइम में घर से बाहर निकलें तो एक श्रग या आउटर जैसा कुछ जरूर ले लें। यह ‘आॅड टामिंग्स’ में काफी मदद करता है।
खून के दाग कपड़ों से हटाने के लिए :-
इन कपड़ों को बाकी कपड़ों के साथ न धोएं। वरना बाकी कपड़ों पर भी दाग आ सकते हैं।
दाग वाले कपड़े को ठंडे पानी में भिगो दें।
यदि आपके पास दाग हटाने का कोई स्प्रे वगैरह है, तब तो बहुत अच्छा, वर्ना दाग वाली जगह पर वाॅशिंग पाउडर डालकर कुछ देर ऐसे ही छोड़ दें।
बाद में ब्रश या स्क्रब से रगड़ कर साफ करें
कुछ ख़ास बातें लड़कियों के लिए :-
पीरियड्स होना एक स्वाभविक जैविक प्रक्रिया है। इसमें घबराने की कोई बात नहीं है और शर्माने की तो बिलकुल भी नहीं। अगर आप अपने पहले पीरियड को लेकर परेशान है तो अपने किसी करीबी, अपनी माँ, बड़ी बहन या फिर टीचर से बात करना आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।
इस एक बात का ध्यान रखना भी ज़रूरी है कि आपके पहले कुछ पीरियड अनियमित हो सकते हैं। वो अपने आप कुछ समय में नियमित हो जाते हैं। तो ज़्यादा सोचिये मत और आपके शरीर में जो भी बदलाव हो रहे हैं उन्हें होने दीजिए। बस सवाल करना ना भूलें और अपने किसी करीबी जिस पर आप पूरा भरोसा करते हों उनसे खुल कर बात करें, वो आपके जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव में आपकी मदद करेंगे और अगर ज़रूरत हुई तो आपको डॉक्टर के पास भी ले जाएंगे।
मां क्या करे :-
हर मां की जिम्मेदारी है कि वो अपनी बेटी के शरीर में हो रहे इस बड़े बदलाव के लिए उसे मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करे। मासिक चक्र शुरू होने पर अक्सर पेट में तेज दर्द और कई तरह की परेशानियां आती हैं जिन्हें देखकर लड़कियां डर जाती हैं।
ऐसे में अपनी बेटी को समझाएं और उसकी हिम्म्मत बढ़ाएं कि यह प्रकति का एक नियम है जिसके लिए उसे तैयार रहना है।
उसकी डायट में भी ऐसी चीजों को शामिल करें जिनमें आयरन और फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में हों। ये सब पोषक तत्व आगे चलकर भी सेहतमंद रहने और हार्मोनल संतुलन के लिए फायदेमंद होते
माता-पिता/अभिभावकों के लिए टिप्स :-
मता-पिता या अभिभावक के रूप में यह समझ पाना सच में मुश्किल हो सकता है, कि पहली माहवारी के दौरान अपने बच्चे की मदद या मार्गदर्शन कैसे किया जाए?
यदि आपने अब तक ऐसा नहीं किया है या था? तो अब करें। कुछ टिप्स हैं, जो आपकी मदद कर सकती हैं-
उन्हें आश्वस्त करें कि मासिक धर्म आना नाॅर्मल है। सबको होता है। बल्कि इसका समय से न आना चिंता का विषय होता है। इसलिए नो टेंशन।
ज्यादा दिक्कत लगे, तो बच्ची के साथ डाॅक्टर के पास जाएं। वो उन्हें और आपको और भी अच्छी तरह से गाइड कर देंगी।
अपने बच्चे को पीरियड प्रोडक्टस के बारे में बताएं। और अच्छे से अच्छा प्रोडक्ट ला कर दें।
आप क्या करती थीं? या आपकी मम्मी ने क्या किया? प्लीज इस बात पर लकीर की फकीर मत बनी रहना।
शुरुआत में ही उन्हें पैंटी में पैड लगाना सिखाएं। बाहर जाते समय बच्चे को किन बातों का ध्यान रखना है? बताएं।
पीरियड किट बना कर दें। याद रखें- बच्चे का संबल इन सब बातों से बहुत बूस्ट होता है। उसे लगता है कि उसका ख्याल रखा जा रहा है। यह जरूरी है। हर मां के लिए। इसलिए, इन बातों को गांठ बांधें। ताकि हर महीने जब पीरियड आए, तो बच्चा आपसे शेयर करे।
हम उम्मीद करते हैं कि ये जानकारी आपके काम आएगी। ऐसी ही स्टोरीज के लिए पढ़ते रहिये
पहले पीरियड्स पर बेटी को न हो संकोच, उसे इस तरह करें तैयार :-
पीरियड्स जीवन में बदलाव लेकर आता है। ऐसे में इससे जुड़ी हर जानकारी हर बेटी को पता होनी चाहिए।
पहले पीरियड को लेकर लड़की के मन में कई तरह के सवाल आते हैं। वहीं कितनी लड़कियों को पहले पीरियड के बारे में कोई खास जानकारी नहीं होती है। ऐसे में हर मां को अपनी बेटी को उसके पहले पीरियड के लिए तैयार करना चाहिए। लेकिन मां को भी ज्यादा आइडिया नहीं होता है कि बेटी के पहले पीरियड पर क्या करना चाहिए? बेटी को किस तरह से पीरियड्स के बारे में बताना चाहिए। अगर आपके भी दिमाग में इसी तरह के सवाल आते हैं, तो आपके लिए यह लेख बेहद फायदेमंद हो सकता है।
इस लेख की मदद से आप अपनी बेटी के पहले पीरियड को सहज बना सकती हैं, उन्हें बता सकती हैं कि पहले पीरियड्स के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं। 12 से 13 साल की बच्ची को पैड का इस्तेमाल करना भी नहीं आता है? ऐसे में आप बेटी की मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं बेटी के पहले पीरियड्स को कैसे बनाएं टेंशन फ्री।
पीरियड्स साइकिल जरूर समझाएं :-
हर महिला का पीरियड साइकिल अलग-अलग होता है। कुछ महिलाओं का 28 दिन का तो कुछ का 35 दिन का साइकिल होता है। ऐसे में आप अपनी बेटी को इस साइकिल के बारे में जरूर बताएं। जिससे वह अपने पीरियड का ध्यान रखें। शुरुआत के समय में पीरियड डेट याद नहीं रहती हैं ऐसे में आप डेट याद रखने के लिए डायरी या फिर ऐप का इस्तेमाल करने की सलाह दे सकती हैं।
पीरियड्स के लक्षण के बारे में बताएं :-
बेटी को पहले पीरियड्स के लक्षण के बारे जरूर बताएं। इसके अलावा उन्हें बताएं कि पीरियड कितने समय तक रहता है। इसके अगला पीरियड कितने में दिन में होगा। इसके अलावा बेटी को ये जरूर बताएं कि यह हर लड़की को होता है। पीरियड्स आने पर शर्म या झिझक नहीं करनी चाहिए। यह भी बताएं कि इन दिनों पेट में दर्द होता है। इसके अलावा मूड स्विंग भी होते हैं। पीरियड के दर्द से राहत पाने के लिए घरेलू उपाय जरूर बताएं।
पैड यूज करना बताएं :-
13 साल की लड़की को जब पहली बार पीरियड होता है तो उस समय उन्हें पैड का इस्तेमाल करना नहीं आता है। ऐसे में आप अपनी बेटी को पैड दिखाएं साथ ही उसका सही उपयोग करने का तरीका बताएं। पहले पीरियड के दौरान अगर आप बेटी पास नहीं भी हो तो वह खुद से पैड का यूज कर सकें। इसके अलावा उस समय क्या करना चाहिए।
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए :-
अधिकतर लड़कियों को पहले पीरियड्स के दौरान खास समस्या नहीं होती है, लेकिन कुछ मामले में आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत हो सकती है।
16 साल की उम्र तक पहला पीरियड नहीं होता है, तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
पीरियड्स में ज्यादा दिनों का गैप होने पर आप डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं।
परामर्श :-
आमतौर पर महिलाएं पीरियड्स और प्रेगनेंसी को लेकर बहुत कम जागरूक होती हैं। इसलिए पीरियड्स में अनियमितता आने, सामान्य से अधिक या कम ब्लीडिंग होने, ब्लीडिंग के रंग में बदलाव या उससे बदबू आने या प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कोई समस्या होने पर वे तुरंत घबरा जाती हैं।
अगर आपको ऐसा लग रहा है कि ओव्यूलेशन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जांच करा कर इलाज करवाना चाहिए।
अगर महिलाओं को गर्भधारण करने में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
अगर महिलाओं को र्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं एवं सप्लीमेंट का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।
अगर आपको पीरियड्स या प्रेगनेंसी से संबंधित किसी तरह की कोई परेशानी या कन्फ्यूजन है तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर इस बारे में बात करना चाहिए।
यह एक सामान्य जानकारी है अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए
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