​बच्‍चों की हाइट बढ़ाने के तरीके Ways to increase the height of children

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बच्चों की हाइट नहीं बढ़ने के कारण / बच्चों की हाइट बढ़ाने के नेचुरल तरीके Reasons for children not growing in height / Natural ways to increase children's height लड़के और लड़कियों की लंबाई किस उम्र तक बढ़ती है? Till what age do boys and girls grow in height? आज के समय में हर कोई अच्छी हाइट पाना चाहता है, क्योंकि लंबाई न केवल व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती है, बल्कि आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। यहां जानिए, लड़के और लड़कियों की लंबाई कब तक बढ़ती है? जन्म के बाद बच्चों के सही विकास की जिम्मेदारी माता-पिता की होती है। किसी भी बच्चे की शारीरिक संरचना कैसे होगी यह पूरी तरह से माता-पिता पर निर्भर करता है। अक्‍सर पेरेंट्स शिकायत करते हैं कि उनके बच्‍चे की हाइट नहीं बढ़ रही है या अपने साथ के बच्‍चों के मुकाबले उनके बच्‍चे की हाइट कम है। आजकल तो बच्‍चों की हाइट न बढ़नी या कम बढ़ने की प्रॉब्‍लम ज्‍यादा देखी जा रही है। कम हाइट होने की वजह से बच्‍चों के आत्‍मविश्‍वास में कमी आती है और वो लोगों के सामने जाने से भी कतराने लगते हैं। बच्‍चों के सही मानसिक विकास के लिए उचित शारीरिक विकास होना भी जरूरी ह...

ब्लीडिंग और स्पॉटिंग है अलग कैसे जाने फर्क ? Bleeding and spotting are different, how to know the difference?

 ब्लीडिंग और स्पॉटिंग है अलग कैसे जाने फर्क ? Bleeding and spotting are different, how to know the difference?

महावारी के दौरान महिलाओं को कम या अधिक रक्तस्राव होना, सिर दर्द होना, कमर दर्द होना, पैरों में दर्द होना, पेट के निचले हिस्से में मरोड़ तथा मांसपेशियों की खिंचाव होना जैसे अनगिनत प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। माहवारी में दो से तीन दिनों तक हैवी ब्लड फ्लो रहता है और बाकी दिनों में रक्तस्राव थोड़ा कम होता है।

हर महिला की माहवारी एक दूसरे से काफी अलग पाई जाती है; इसीलिए माहवारी के दौरान होने वाली परेशानियां भी एक दूसरे से अलग हो सकती है। माहवारी के दौरान होने वाले रक्तस्राव को “ब्लीडिंग” कहते हैं; जो बहुत ही सामान्य माना जाता है। महावारी खत्म होने के कुछ दिनों बाद तक महिलाओं को थोड़ा-थोड़ा ब्लीडिंग होते रहता है; जिसे “स्पॉटिंग” कहा जाता है।

ब्लडिंग और स्पॉटिंग में काफी अंतर होता है महिलाओं को हमेशा ही सावधान और सतर्क रहना चाहिए। कई महिलाएं स्पॉटिंग को ब्लीडिंग मान लेती हैं। स्पॉटिंग होने के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान भी स्पॉटिंग हो सकती हैं; तो कुछ महिलाएं महावारी के अलावा भी स्पॉटिंग का अनुभव करती हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए।

ब्लीडिंग क्या होता है ? कारण क्या हैं ? What is bleeding? What are its causes?

महिलाओं में ब्लीडिंग योनि से होने वाले रक्तस्राव को कहा जाता है; जो माहवारी के दौरान होता है। माहवारी के दौरान होने वाले रक्तस्राव को सामान्य माना जाता है और यह बहुत ही सामान्य प्रक्रिया होती है; जिससे हर महिला गुजराती है।

कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के अलावा योनि में से असामान्य रक्तस्राव हो सकता है; जिसके पीछे अनगिनत कारण हो सकते हैं। कारण चाहे कोई भी हो; असामान्य रूप से होने वाला रक्तस्राव महिलाओं के स्वास्थ्य के बारे में खतरे का संकेत हो सकता है। इसीलिए, ऐसी स्थिति में महिलाओं को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

मासिक धर्म :- menstruation

महिलाओं में मासिक धर्म एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया होती है; जो हर महीने माहवारी के दौरान एक महिला के योनि से रक्तस्राव होता है; जो कुछ दिनों तक हैवी ब्लड फ्लो रहता है और कुछ दिनों के लिए सामान्य रक्तस्राव होता है। मासिक धर्म के दौरान होने वाले रक्तस्राव को पूरी तरीके से सामान्य माना जाता है और किसी भी खतरे का संकेत नहीं माना जाता है।

गर्भावस्था :- pregnancy

कई महिलाएं गर्भावस्था के दौरान असामान्य ब्लीडिंग का सामना करती है; जो किसी खतरे का संकेत हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान ज्यादा मात्रा में ब्लीडिंग होना गर्भपात होने के संकेत हो सकता है या गर्भावस्था गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब से हो सकती है। इन सभी परिस्थितियों में गर्भावस्था के दौरान असामान्य रक्तस्राव होता है; जिसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और रक्तस्राव होते ही तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

इंफेक्शन :- infection

जनन अंगों में गंभीर संक्रमण भी महिलाओं के योनि से असामान्य रक्तस्राव का कारण बन सकता है। ऐसी स्थिति में जनन अंगों में से रक्तस्राव होने के साथ-साथ जनन अंगों में सूजन की समस्या भी देखी जाती है; जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

हार्मोनल इंबैलेंस :- hormonal imbalance

हार्मोन के असंतुलन की वजह से महिलाओं में पीसीओडी, पीसीओएस जैसी गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं और उनका मासिक चक्र अनियमित को जाता है; जिसके चलते माहवारी में अनियमितता हो जाती है और महिलाओं को अनियमित ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

यूटरीन फाइब्रॉयड :- uterine fibroids

यूटरीन फाइब्रॉयड एक तरह की गर्भाशय से जुड़ी समस्या है आजकल फाइब्रॉयड की समस्या महिलाओं में काफी आम हो गई है। गर्भाशय के हिस्से में फाइब्रॉयड होने की वजह से भी महिलाओं के मासिक चक्र में अनियमितता देखी जाती है; जिसके चलते वह योनि से अनियमित रक्तस्त्राव की शिकार हो जाती हैं।

स्पॉटिंग क्या होता है ? कारण क्या हैं ? What is spotting? What are the causes?

महावारी के दौरान होने वाले रक्त स्त्राव को ब्लीडिंग कहां जाता है। आमतौर पर अगर महिलाओं के पीरियड्स रेगुलर रहते हैं; तो पीरियड्स खत्म होने के कुछ दिनों बाद महिलाओं को हल्के फुल्की ब्लीडिंग हो सकती है; जिसे “स्पॉटिंग” कहां जाता है। महावारी को छोड़कर अगर महिलाओं को कभी योनि में से हल्का-फुल्का रक्त स्त्राव होता है; तो उसे स्पॉटिंग कहां जाता है।

महिलाओं में होने वाली स्पॉटिंग की समस्या के पीछे अनगिनत प्रकार के कारण हो सकते हैं; जिनमें महावारी की अनियमितता या पीरियड्स में देरी होना यह सबसे आम कारण माने जाते हैं। योनि में से होने वाले हल्के फुल्के रक्त स्त्राव के लिए महिलाओं को किसी भी प्रकार के पीरियड प्रोडक्ट यानी सेनेटरी पैड एवं टैम्पोन का इस्तेमाल करने की जरुरत नहीं होती हैं।

योनि में से हल्का-फुल्का स्पॉटिंग कभी कबार होना कोई बड़ी समस्या गंभीर बीमारी नहीं होती है। परंतु, कई महिलाएं स्टार्टिंग को मासिक धर्म से जोड़ लेती है और चिंतित हो जाती है। अगर आपको लगातार कई दिनों तक स्पॉटिंग की समस्या हो रही है; तो आप डॉक्टर से सलाह जरूर ले और उसका कारण पता लगाने की कोशिश करे

स्पॉटिंग होने के निम्न कारण हो सकते हैं। Spotting may be due to the following reasons.

थायरॉयड :- thyroid

अगर महिलाओं में थायराइड से जुड़ी कोई समस्या है; तब उनके शरीर में हारमोंस का असंतुलन हो जाता है; जिसके कारण महिलाओं को स्पॉटिंग की समस्या हो सकता है।

दवाइयां :- medicines

अगर महिलाएं विशिष्ट प्रकार की दवाइयों का सेवन करती है; तभी उन्हें स्पोर्टिंग की समस्या हो सकती हैं। विशिष्ट प्रकार की दवाई जैसे; गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन, स्टीरोइड्स और ब्लड थिनर जैसी दवाइयां का सेवन करने से भी महिलाओं को स्पॉटिंग की समस्या हो सकती हैं।

स्ट्रैस :- Strays

अत्यधिक शारीरिक एवं मानसिक तनाव के चलते महिलाओं के शरीर में मौजूद हारमोंस के कार्य पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है; जिसके कारण महिलाओं को हारमोंस का असंतुलन हो जाता है। ऐसा होने पर महिलाएं असामान्य रक्तस्राव या स्पॉटिंग की समस्या का शिकार हो सकती है।

मेनोपॉज :- menopause

जब एक महिला मेनोपॉज के दौर से गुजरती है; तब उसके शरीर में अनगिनत प्रकार के हार्मोनल चेंजेज देखे जाते हैं। मेनोपॉज के दौर से गुजरते हुए महिलाओं में स्पॉटिंग की समस्या काफी आम मानी जाती है।

चोट लगना :- getting hurt

महिलाओं की योनि में किसी तरह की चोट लग जाने की वजह से भी महिलाओं को स्पॉटिंग की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अगर महिलाओं को योनि में किसी प्रकार की चोट लग गई है तो इसे नजर अंदाज न करें और डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए।

संक्रमण :- Infection

अगर महिलाओं के योनि में गर्भाशय में, सर्विक्स में या फैलोपियन ट्यूब में किसी तरह का इंफेक्शन हो गया है; तो उसके कारण महिलाओं को स्पॉटिंग की समस्या हो सकती है। कभी-कभी यह इन्फेक्शन गंभीर रूप धारण कर लेते हैं; इसीलिए इसे नजर अंदाज न करें और डॉक्टर से जरूर सलाह ले और इसका इलाज कराए

पीरियड्स और स्पॉटिंग में क्या अंतर है। What is the difference between periods and spotting?

ब्लीडिंग और स्पॉटिंग के दौरान होने वाले रक्तस्राव में काफी अंतर पाया जाता है। क्योंकि, पीरियड्स के दौरान होने वाले रक्तस्राव की मात्रा काफी ज्यादा होती है; जबकि स्पॉटिंग के दौरान होने वाला रक्त स्त्राव काफी हल्का-फुल्का होता है। मासिक धर्म के दौरान होने वाली ब्लीडिंग की मात्रा और अवधि ज्यादा होता है।

साथ ही, मासिक धर्म के दौरान होने वाले रक्तस्राव का रंग स्पॉटिंग के रक्तस्राव से काफी गहरा पाया जाता है। महावारी के दौरान होने वाले रक्तस्राव से सुरक्षित रहने के लिए तथा लीकेज से बचने के लिए महिलाओं को सैनिटरी प्रोडक्ट्स जैसे सेनेटरी पैड, टेंपोन या मेंस्ट्रूअल कप का इस्तेमाल करने की आवश्यकता पड़ती है।

महावारी के दौरान होने वाले रक्तस्राव में महिलाओं को कमर दर्द, सिर दर्द, पेट के निचले हिस्से में मरोड़ तथा दर्द मांसपेशियों की खिंचाव जैसे अन्य लक्षण दिखाई देते हैं। वही स्पॉटिंग के दौरान होने वाला रक्तस्राव काफी हल्का-फुल्का होता है; जिसे रोकने के लिए या उससे बचाव करने के लिए सैनिटरी प्रोडक्ट्स की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

क्योंकि, स्पॉटिंग के दौरान होने वाला रक्तस्राव काफी कम मात्रा में होता है; जो अपने आप ही बंद हो जाता है। स्पॉटिंग के दौरान होने वाले रक्तस्राव का रंग ब्लीडिंग से काफी अलग होता है और यह फर्क हम तुरंत पहचान सकते हैं। स्पॉटिंग के दौरान होने वाले रक्तस्राव की वजह से महिलाओं के ब्रेस्ट में दर्द होना या मेंस्ट्रूअल क्रैंप्स होना जैसी अन्य लक्षण नहीं दिखाई देते हैं।

स्पॉटिंग से बचाव कैसे करें। How to prevent spotting?

अगर महिलाएं स्पॉटिंग की समस्या से सुरक्षित रहना चाहती है; तो उन्हें निम्न बातों का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।

गर्भनिरोधक गोलियों का नियंत्रित सेवन। controlled intake of birth control pills

कई महिलाएं गर्भावस्था से छुटकारा पाने के लिए गर्भनिरोधक गोलियों का लंबे समय तक और लगातार सेवन करते रहती हैं। कुछ महिलाएं तो अपने आप ही मेडिकल स्टोर से गर्भनिरोधक गोलियां ले आती है और उनका सेवन करती है। अगर आपको गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करना है; तो आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें। क्योंकि, अनियंत्रित तरीके से किया गया गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन आपके माहवारी के चक्र पर बहुत ही बुरा प्रभाव डाल सकता है और आप स्पॉटिंग का शिकार हो सकती हैं।

हार्मोनल बैलेंस :- hormonal balance

अगर महिलाओं को स्पॉटिंग की समस्या से सुरक्षित रहना है; तो उन्हें अपने शरीर में मौजूद हार्मोन का संतुलन बनाए रखना जरुरी हो जाता है। हार्मोंस को बैलेंस करने के लिए सिर्फ महिलाओं को अपने खानपान पर, अपने वजन पर तथा अपने जीवन शैली पर नियंत्रण बनाए रखना जरूरी होता है। अगर महिलाएं जंक फूड का सेवन करती है या अनियमित जीवन शैली का पालन करती है; तो उसे करना बंद करे और एक हेल्दी डाइट को अपने जीवन शैली में शामिल करें।

आयरन युक्त आहार। Iron-rich diet

अगर महिलाओं के शरीर में पोषक तत्व की कमी होती हैं; तो उन्हें माहवारी की अनियमितता तथा माहवारी के दौरान होने वाले रक्तस्राव की अनियमितता का सामना करना पड़ सकता है और महिलाओं को स्पॉटिंग की समस्या हो सकता है। महिलाओं को स्पॉटिंग की समस्या से सुरक्षित रखने के लिए अपने आहार में आयरन युक्त पदार्थ का सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से महिलाओं के शरीर में पोषक तत्व की आपूर्ति होती है, मासिक चक्र तथा मासिक चक्र के दौरान होने वाला रक्तस्राव नियमित होता है; जिसके चलते स्पॉटिंग की समस्या नहीं होती है।

परामर्श :- Consultation :-

आमतौर पर महिलाएं पीरियड्स और प्रेगनेंसी को लेकर बहुत कम जागरूक होती हैं। इसलिए पीरियड्स में अनियमितता आने, सामान्य से अधिक या कम ब्लीडिंग होने, ब्लीडिंग के रंग में बदलाव या उससे बदबू आने या प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कोई समस्या होने पर वे तुरंत घबरा जाती हैं।

अगर आपको ऐसा लग रहा है कि ओव्यूलेशन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जांच करा कर इलाज करवाना चाहिए।

अगर महिलाओं को गर्भधारण करने में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।

अगर महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।

किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं एवं सप्लीमेंट का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।

अगर आपको पीरियड्स या प्रेगनेंसी से संबंधित किसी तरह की कोई परेशानी या कन्फ्यूजन है तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर इस बारे में बात करना चाहिए।

यह एक सामान्य जानकारी है अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।

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