​बच्‍चों की हाइट बढ़ाने के तरीके Ways to increase the height of children

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बच्चों की हाइट नहीं बढ़ने के कारण / बच्चों की हाइट बढ़ाने के नेचुरल तरीके Reasons for children not growing in height / Natural ways to increase children's height लड़के और लड़कियों की लंबाई किस उम्र तक बढ़ती है? Till what age do boys and girls grow in height? आज के समय में हर कोई अच्छी हाइट पाना चाहता है, क्योंकि लंबाई न केवल व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती है, बल्कि आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। यहां जानिए, लड़के और लड़कियों की लंबाई कब तक बढ़ती है? जन्म के बाद बच्चों के सही विकास की जिम्मेदारी माता-पिता की होती है। किसी भी बच्चे की शारीरिक संरचना कैसे होगी यह पूरी तरह से माता-पिता पर निर्भर करता है। अक्‍सर पेरेंट्स शिकायत करते हैं कि उनके बच्‍चे की हाइट नहीं बढ़ रही है या अपने साथ के बच्‍चों के मुकाबले उनके बच्‍चे की हाइट कम है। आजकल तो बच्‍चों की हाइट न बढ़नी या कम बढ़ने की प्रॉब्‍लम ज्‍यादा देखी जा रही है। कम हाइट होने की वजह से बच्‍चों के आत्‍मविश्‍वास में कमी आती है और वो लोगों के सामने जाने से भी कतराने लगते हैं। बच्‍चों के सही मानसिक विकास के लिए उचित शारीरिक विकास होना भी जरूरी ह...

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन क्या है। कारण लक्षण और इलाज What is pelvic floor dysfunction? Symptoms, Causes, and Treatment

 पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन क्या है। कारण लक्षण और इलाज What is pelvic floor dysfunction? Symptoms, Causes, and Treatment

पेल्विक फ्लोर उन सभी मांसपेशियों का समूह है जो मूत्राशय, गर्भाशय, प्रोस्टेट, योनि, मलाशय, और गुदा से जुड़ी रहती हैं। पेल्विक क्षेत्र जांघ के ऊपर और नाभि के नीचे मौजूद होता है। लोगों को पेल्विक फ्लोर से जुड़ी समस्याएं तब होती हैं जब पेल्विक मसल्स काम करना बंद कर देते हैं। पेल्विक फ्लोर की मसल्स का एक्टिव रहना बहुत जरूरी है। यह क्षेत्र शरीर के अंदर होने वाले कई जरूरी कार्यों के लिए बना हुआ है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पेल्विक फ्लोर से जुड़ी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। महिलाओं में सेक्सुअल इंटरकोर्स के दौरान भी पेल्विक मसल्स सहायता करते हैं।

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन क्या है। What is pelvic floor dysfunction?

पेल्विक मसल्स कमजोर पड़ने पर पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन की समस्या होती है। स्वस्थ व्यक्ति का पेल्विक मसल्स पर पूरा कंट्रोल होता है। लेकिन जब पेल्विक मसल्स कमजोर होने लगते हैं तब इन पर कंट्रोल भी धीरे धीरे कम होने लगता है। पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन होने पर पेल्विक मसल्स को कड़ा और रिलैक्स करने की क्षमता खत्म हो जाती है।

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन से इन मसल्स पर थोड़ा बहुत दबाव तो डाला जा सकता है लेकिन इन्हें ढीला करना मुश्किल हो जाता है। इससे स्टूल पास करने में असहजता होती है और शौच कार्य अधूरा रह जाता है। जिसकी वजह से कभी भी अचानक से स्टूल पास हो जाता है। पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन को लगातार नजरअंदाज करने पर बड़ी समस्या हो सकती है। पेट से संबंधित समस्याएं और इंफेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन के कारण। Causes of pelvic floor dysfunction

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन की समस्या अचानक से हो जाती है। इसके अचानक से हो जाने का क्या कारण है? इसका पता अभी तक नहीं लग पाया है। लेकिन कुछ ऐसे कारण हैं जो ज्ञात हैं जिनसे पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन होने की संभावना ज्यादा होती है।

बच्चे को जन्म देने के बाद :- After giving birth to a child :- जब कोई महिला बच्चे को जन्म देती है तो उसके पेल्विक क्षेत्र की मसल्स में भारी दबाव और खिंचाव पैदा होता है। जिससे पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन हो सकता है। डिलीवरी के बाद महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। हालांकि, सही खान-पान और व्यायाम कर इस बीमारी से जल्द ही छुटकारा पाया जा सकता है।

पेल्विक सर्जरी :- pelvic surgery :- अगर पेल्विक क्षेत्र में कभी किसी कारण से सर्जरी हुई है तो पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन होने की संभावना अधिक होती है।

मोटापा :- obesity :- मोटापे से पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन का खतरा बढ़ जाता है। भारी पेट वाले व्यक्ति में यह खतरा अधिक होता है।

चोट लगना :- getting hurt :- अगर पेल्विक क्षेत्र में गहरी चोट लगती है तो पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन हो सकता है। ऐसा होने पर पेल्विक मसल्स पर कंट्रोल नहीं रहता है और चोट के कारण हर समय तेज दर्द की शिकायत भी रहती है। इससे इंफेक्शन बढ़ने का भी खतरा रहता है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच और इलाज करवाना चाहिए।

वजायनल चाइल्ड बर्थ :- vaginal childbirth :- वजायनल चाइल्ड बर्थ (Vaginal childbirth) होने की वजह से मसल्स का जरूरत से ज्यादा स्ट्रेच कर जाना।

पेल्विक दर्द कब होता है। When does pelvic pain occur?

पीआईडी तब हो सकता है जब शरीर के कुछ हिस्सों से रोगाणु लड़की के शरीर में एक विशेष स्थान पर चले जाते हैं जिसे गर्भाशय कहा जाता है। ऐसा तब हो सकता है जब किसी को कुछ ऐसे संक्रमण हों जो अंतरंग संपर्क से फैलते हों। जब ऐसा होता है, तो लड़कियों को पेट में दर्द महसूस हो सकता है और उनके निजी अंगों से अजीब चीजें निकल सकती हैं।

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन के लक्षण। Symptoms of pelvic floor dysfunction

पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन होने पर इसके कई लक्षण नजर आते हैं। आमतौर पर ये लक्षण रोज नजर आते हैं लेकिन कभी कभी कुछ विशेष कार्य के दौरान बढ़ जाते हैं।

  1. यूरिन से जुड़ी परेशानी जैसे यूरिनेशन (Urination) के दौरान दर्द होना या यूरिन पास करने में कठिनाई होना।
  2. कब्ज डाइजेशन में दिक्कत, आंत में खिंचाव जैसे लक्षण नजर आते हैं।
  3. कमर के आस पास तेज दर्द। यह दर्द मसल्स में होता है।
  4. प्राइवेट पार्ट्स में तेज दर्द। मलाशय (Rectum) में भी दर्द हो सकता है।
  5. महिलाओं को सेक्स के दौरान दर्द होता है।
  6. पेल्विक क्षेत्र में दबाव महसूस होता है। दबाव होने पर ऐंठन हो सकती है।
  7. स्टूल पास करते समय जोर नहीं लग पाता है। उठते बैठते यूरिन और स्टूल अचानक से निकल जाता है।
  8. पेट में गुड़गुड़ाहट और आंत के अंदर मूवमेंट महसूस होता है।
  9. अचानक से यूरिन करने का मन होता है लेकिन यूरिन नहीं निकलता है या कई बार में थोड़ा थोड़ा करके निकलता है।

पेल्विक फ्लोर मसल्स को मजबूत बनाने के लिए एक्सरसाइज Exercises to strengthen the pelvic floor muscles

सेतुबंधासन :- Bridge Pose :-

सेतुबंधासन को नियमित रूप से करने पर आप पेल्विक मसल्स में सुधार ला सकते हैं। यह एक्सरसाइज पेल्विक मसल्स के अलावा हिप्स को भी मजबूती देता है और शेप को टोन (Tone) करता है।

सेतुबंधासन करने का तरीका। How to do Setubandhasana

  1. किसी समतल जगह में पीठ के बल लेट जाएं।
  2. अब पैरों को सामने की ओर फैलाएं और हाथों को बॉडी से सटा लें।
  3. लंबी गहरी सांस लें। घुटनों को धीरे-धीरे मोड़ना शुरू करें। कमर को ऊपर उठाएं। शरीर का बल एड़ी और कंधे पर रखें और फिर धीर धीरे एड़ी को हिप्स के नजदीक लाएं।
  4. हाथों से जमीन की तरफ दबाव बनाएं| इससे कमर को ऊपर तक उठाने में आसानी होती है। ध्यान रखें कि आसन करते वक्त सिर सीधा होना चाहिए।
  5. इसी स्थिति में 30 से 40 सेकंड तक बने रहें। फिर सांस छोड़ते हुए आसन से बाहर आ जाएं।

कीगल एक्सरसाइज। Kegel exercises

कीगल एक्सरसाइज पूरी तरह से पेल्विक क्षेत्रों को लाभ पहुंचाती है। यह स्टूल-यूरिन में असामान्यता और पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम करती है। वयस्कों को कीगल एक्सरसाइज जरूर करना चाहिए।

कैसे करें कीगल एक्सरसाइज। How to do Kegel exercises

  1. पलथी मारकर बैठ जाएं।
  2. अब आपको ध्यान लगाने की जरूरत है।
  3. आंखों को बंद करें और ब्लैडर की मसल्स में ध्यान लगाएं।
  4. उन्हें सिकोड़ने और रिलैक्स करने का प्रयास करें।
  5. मांसपेशियों में दबाव डालकर उन्हें 4-5 सेकंड के लिए सिकोड़े फिर छोड़ दें।
  6. ऐसा ही लगातार दस बार करें। ऐसा रोज करने से पेल्विक मसल्स से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

स्क्वाट्स :- Squats :-

स्क्वाट्स से आप अपने पेल्विक फ्लोर की मसल्स को लचीला और मजबूत बना सकते हैं।

स्क्वाट्स करने का तरीका। How to do squats

  1. सीधा खड़े हो जाएं और हाथों को सामने की ओर करें।
  2. छाती को हल्का बाहर निकालें और घुटनों के बल झुकना शुरू करें। जैसे ही हिप्स घुटनों की बराबरी में आए, उसी स्थित में रुक जाएं। आपको लगेगा कि आप कुर्सी पर बैठे हैं। ध्यान रहे कि हाथ सीधा होना चाहिए।
  3. इस पोजीशन में 30 से 40 सेकण्ड्स तक रहें फिर उठ जाएं। ऐसा लगातार 8 से 10 मिनट तक करें। एक महीने तक इस एक्सरसाइज को करने से पेल्विक क्षेत्र काफी मजबूत हो जाता है।

परामर्श :- Conclusion :-

पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन की समस्या अगर एक बार हो जाए तो यह लंबे समय तक रहती है। इसलिए इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय है कि अपने खान पान पर विशेष ध्यान दें। पाचन तंत्र को कमजोर बनाने वाले आहार न खाएं,

पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन के ये सभी अहम कारण माने जाते हैं। अगर किसी महिला को पेल्विक फ्लोर से जुड़ी परेशानी होती है, तो डॉक्टर पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन से जुड़े टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।

अगर आपको किसी भी कारण से पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन की समस्या हो जाए, तो इसे नजरअंदाज ना करें। इस बीमारी को इग्नोर कर आप अपनी परेशानी खुद बढ़ा रहीं हैं।

अगर आप ऐसे लक्षणों को महसूस कर रहीं हैं, तो इन्हें इग्नोर ना करें। हालांकि पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन के कारणों को समझकर और डॉक्टर से कंसल्टेशन कर इस परेशानी को दूर की जा सकती है।

अगर आपके शारीर में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए।

शारीर में कोई भी परेशानी हो रहा है तो कोई भी उपाय करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें

किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत डॉक्टर से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।

कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले |

यह एक सामान्य जानकारी है अगर आप किसी भी बीमारी से ग्रसित हैं या कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए

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