प्रेगनेंसी का तीसरा महीना। लक्षण, शिशु का विकास Third month of pregnancy: Symptoms, baby development
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प्रेगनेंसी का तीसरा महीना। लक्षण, शिशु का विकास, आहार और सावधानियां Third Month of Pregnancy: Symptoms, Baby Development, Diet, and Precautions
प्रेगनेंसी नौ महीने की एक प्रक्रिया है जो आपके जीवन का एक बहुत ही खूबसूरत पल होता है। प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में अपने अंदर कुछ लक्षणों को देखने के बाद डॉक्टर की मदद से आपको इस बात की पुष्टि होती है की आपने गर्भ धारण (Conceive) कर लिया है। गर्भ धारण करते ही आपके शरीर में कई तरह के बदलाव शुरू हो जाते हैं। लेकिन सबसे बुनियादी बदलाव प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में होता है और यही कारण है की यह आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
आमतौर पर प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में आपके शरीर में बाहरी तौर पर उतने बदलाव नहीं होते हैं जिनके बेसिस पर कोई इस बात का अंदाजा लगा सके की आप प्रेगनेंट हैं। इस दौरान आप कैलेंडर की मदद से अपने दिनों का हिसाब रखती हैं और साथ ही अपने खान पान और शरीर के अंदर हो रहे बदलाव को महसूस करती हैं। प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में आपके गर्भ में मौजूद डिंब एक भ्रूण के रूप में बदल जाता है।
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
प्रेगनेंसी का तीसरा महीना कैसा होता है? What is the third month of pregnancy like?
प्रेगनेंसी के नौ महीनों को तीन भागों में बांटा गया है जिसे पहला ट्राइमेस्टर, दूसरा ट्राइमेस्टर और तीसरा ट्राइमेस्टर के नाम से जानते हैं। शुरुआती तीन महीने को पहला ट्राइमेस्टर (First Trimester), चार से छः महीने तक की अवधि को दूसरा ट्राइमेस्टर (Second Trimester) और अंत के तीन महीनों को तीसरा ट्राइमेस्टर (Third Trimester) में विभावित किया गया है।
पहला ट्राइमेस्टर में आने वाले तीसरा महीना, प्रेगनेंसी की शुरुआत है। इस दौरान, शिशु का विकास होता है, महिला के शरीर में हार्मोनल उचार चढ़ाव होता है जिससे उसे अनेक लक्षण अनुभव होते हैं।
प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में क्या होता है? What happens in the third month of pregnancy
इस दौरान गर्भवती महिलाओं को र्भावस्था के दौरान महिला के शरीर और उसके गर्भ में पल रहे शिशु में ढेरों बदलाव आते हैं। प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में शिशु का विकास शुरू हो जाता है और महिला इस बदलाव को आसानी से महसूस कर सकती है।
प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में पेट दर्द क्यों होता है। Why does stomach ache occur in the third month of pregnancy?
प्रेगनेंसी की शुरुआती स्टेज यानी तीसरे महीने में महिला के शरीर में अनेक बदलाव होते हैं, जैसे कि हार्मोनल बदलाव, अत्यधिक रक्त का उत्पादन और बच्चेदानी का आकार बढ़ना आदि। इन सबके कारण महिला को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, पेट में दर्द होना भी उनमें शामिल है। यह एक सामान्य समस्या है जो किसी खतरा की ओर इशारा नहीं करता है, इसलिए आपको डरने या घबराने की ज़रूरत नहीं है।
पेट दर्द का असली कारण कब्ज और गर्भाशय का आकार बढ़ना है। हालाँकि, कुछ मामलों में अन्य कारणों से भी पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। इसलिए यह आवश्यक है कि आप दर्द पर ध्यान दें। अगर दर्द तेज़ है या लगातार रहता है तो आपको डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए, ताकि डॉक्टर समय पर इसका सही इलाज कर सकें।
गर्भावस्था के तीसरे महीने में शिशु का विकास Baby Development in the Third Month of Pregnancy
प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में आपके गर्भ में पल रहे शिशु में विकास की प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिसे आप बहुत आसानी से महसूस कर सकती हैं। गर्भावस्था के दसूरे महीने की तुलना में इस दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में तेजी आ जाती है। गर्भावस्था के तीसरे महीने में गर्भ में पल रहे शिशु में अनेक बदलाव आते हैं जैसे कि:-
- दिल धड़कना दिल काम करना शुरू कर देता है
- शिशु का लंबाई लगभग 2.5 इंच होता है
- शिशु का वजन बढ़कर 25-35 ग्राम होना
- उँगलियों के निशान बनने लगते हैं
- जबान और जबड़े का विकास होना शुरू हो जाता है
- आंखें, किडनी और जननांग का विकास होना शुरू हो जाती हैं
- मांसपेशियों और हड्डियों का ढांचा भी बनने लगता है
- इस दौरान, शिशु की त्वचा पतली और पारदर्शी होती है जिसके आसपार नसें दिखाई देती हैं
प्रेगनेंसी के तीसरे महीने के लक्षण Symptoms of the third month of pregnancy
हार्मोन में उतार चढ़वा के कारण, प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में महिलाएं खुद में कुछ लक्षणों को अनुभव करती है। इसमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हैं:
कब्ज :- Constipation :- जब एक महिला गर्भवती होती है तो उसके शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का निर्माण बढ़ जाता है। इससे उसकी पाचन शक्ति धीमी और कमज़ोर हो जाती है जिससे कब्ज की शिकायत पैदा होती है। साथ ही हार्मोन में बदलाव और गर्भाशय के बढ़ने के कारण स्नायुबंधन (Ligaments) पर प्रेशर पड़ता है। स्नायुबंधन में खिचाव एवं तनाव आने की वजह से आपके पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है। ये दोनों प्रेगनेंसी के तीसरे महीने के लक्षणों में एक हैं अगर आप भी कब्ज या दर्द से परेशान हैं तो डॉक्टर इस बारे में बात करें। वे आपको कुछ दवा और जीवनशैली में बदलाव जैसे कि तैलीय और मसालेदार चीज़ों से परहेज़, पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन, फल और सब्जियों का सेवन, सिगरेट और अत्याधिक कॉफी से परहेज़ आदि का सुझाव देंगे जिससे कब्ज की समस्या से राहत मिलेगी।
पेट दर्द :- Abdominal pain :- प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में बच्चेदानी में पल रहे शिशु का आकार बढ़ता है, जो लिगामेंट्स पर दबाव पैदा करता है। लिगामेंट्स पर दवाब और खिचाव से पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है। पेट में दर्द होने पर आपको डरने या घबराने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि कुछ दिनों में ये अपने आप ही दूर हो जाता है। अगर ऐसा नहीं होता है या तेज़ दर्द है तो बिना देरी किए डॉक्टर से मिलें और उन्हें इस बारे में बताएं।
सीने में जलन और सूजन :- Heartburn and swelling :- गर्भ में पल रहे शिशु का आकार धीरे धीरे बढ़ना शुरू हो जाता है। गर्भ में पल रहे शिशु का आकार बढ़ने से बच्चेदानी का आकार भी बढ़ता है, जिसके कारण पेट पर प्रेशर पड़ता है जिससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है। और आपकी पाचन क्रिया धीमे काम करने लगती है। इससे खाना हजम करने वाला एसिड ऊपर की तरफ आने लगता है जो सीने में जलन पैदा करता है। प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में सीने में जलन होना सामान्य है। साथ ही, बच्चेदानी का आकार बढ़ने के कारण रक्त वाहिकाएं ब्लड वेसेल्स (Blood Vessels) सिकुड़ जाती हैं जिससे ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है जिसके कारण आपके पैरों में सूजन की समस्या होती है।
मॉर्निंग सिकनेस :- Morning sickness :- गर्भ में पल रहे भ्रूण को पोषक तत्वों की जरूरत होती है। पूर्ति करने के लिए शरीर को ज्यादा खून ज्यादा मात्रा में खून का उत्पादन करने लगता है जिसके कारण ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर प्रभावित होते हैं और आपको कमजोरी तथा थकान महसूस होती है। प्रेगनेंसी की इस अवस्था में मॉर्निंग सिकनेस की समस्या काफी ज्यादा होती है यह प्रेगनेंसी के शुरुआती सबसे सामान्य लक्षणों में से एक है। प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में यह चरम पर हो सकता है, लेकिन तीसरा सप्ताह यानी 12वां सप्ताह ख़तम होते-होते यह लक्षण भी दूर हो जाता है। अक्सर मॉर्निंग सिकनेस के साथ-साथ उल्टी भी होती है। अगर आप इस लक्षण से परेशान हैं तो अपने डॉक्टर से इस बारे में अवश्य बात करें। वो कुछ दवा या उपाय सुझाव दे सकते हैं जिससे आपको इस लक्षण से राहत पाने में मदद मिलेगी।
कमज़ोरी और थकान :- Weakness and fatigue :- प्रेगनेंसी जब अपने तीसरे महीने में पहुँचती है तो गर्भ में पल रहे शिशु को पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है ताकि वह प्रॉपर तरीके से विकसित हो सके। पोषक तत्वों की खुराक को पूरा करने के लिए शरीर अधिक मात्रा में खून का उत्पादन करता है। इससे शरीर का ब्लड प्रेशर और शुगर दोनों प्रभावित होता है जिसके कारण महिला को थकान और कमज़ोरी महसूस होती है।
बार-बार पेशाब लगना :- Frequent urination :- प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में हार्मोन एच.सी.जी उत्पन्न करता है। जिसके कारण खून का उत्पादन ज्यादा होता है और यूरिनरी ट्रैक्ट पर प्रेशर पड़ता है। इसलिए आपको बार बार पेशाब लगती है। गर्भ में पल रहे शिशु को पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है। इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए शरीर में एचसीजी हार्मोन उत्पन्न होता है जो खून के उत्पादन के लिए ज़िम्मेदार है। खून का उत्पादन होने से गर्भवती महिला के मूत्र पथ (Urinary Track) पर दबाव पड़ता है जिसके कारण बार-बार पेशाब करने की ज़रूरत महसूस होती है। प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में बार-बार पेशाब लगना सामान्य है। अगर आपको पेशाब के रंग में कोई असामान्य बदलाव दिखे तो इस बारे में डॉक्टर से अवश्य बात करें।
वाइट डिस्चार्ज :- White Discharge :- जब एक महिला प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में पहुँचती है तो उसे अनेक लक्षण अनुभव होते हैं, योनि से सफ़ेद रंग का गाढ़ा पानी निकलना भी उन्हीं में शामिल है। प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में, महिला के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ता है और योनि की दीवार खुलती है जिससे वाइट डिस्चार्ज होता है। यह डिस्चार्ज संक्रमण को बच्चेदानी में जाने से रोकता है। अगर आप इसे खुद में देखती हैं तो डरने की ज़रूरत नहीं है। अगर आप फिर भी परेशान हों तो डॉक्टर से मिलकर उनसे इस बारे में बात कर सकती हैं। अगर इस डिस्चार्ज के साथ गंध आए और खुजली हो तो डॉक्टर से मिलना इस बारे में बात करना आवश्यक हो जाता है।
प्रेगनेंसी के तीसरे महीने का आहार Diet for the third month of pregnancy
पानी पीएं :- Drink water :- प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में आपको ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। आपके शरीर में कभी भी पानी की कमी महसूस नहीं होनी चाहिए। ऐसा करने से आप कब्ज से दूर और हमेशा हाइड्रेट रहती हैं। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले अधिक मोटापे से बचती हैं। पानी के अलावा आप किसी भी ऐसे फल या सब्जी का सेवन कर सकती हैं जिसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है।
फाइबर :- Fiber :- प्रेगनेंसी के तीसरे महीने के दौरान आपको फल, सब्जी और फाइबर से भरपूर पदार्थों का सेवन करना चाहिए क्योंकि ये आपके यूटेरस की वॉल्स को मजबूत बनाने और शिशु के विकास के लिए फायदेमंद होते हैं। फाइबर की मात्रा को बढ़ाने के लिए आप अपनी डाइट में अनार, अनानास, संतरे, सेब और दूसरे फलों को शामिल कर सकती हैं।
कैल्शियम :- Calcium :- प्रेगनेंसी के 12वें सप्ताह में आपके गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियां विकसित होनी शुरू हो जाती हैं। इसलिए प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में आपको अपनी डाइट में कैल्शिअयम से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। क्योंकि ये आपके शिशु की हड्डियों को मजबूत बनाने में बहुत सहायक होते हैं। दूध और इससे बने दूसरे प्रोडक्ट और केले में कैल्शिअयम काफी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। इनका सेवन करने के अलावा आप अपने डॉक्टर से कैल्शियम के टैबलेट भी ले सकती हैं। ये मां और शिशु दोनों के लिए आवश्यक हैं।
फल और सब्जियां :- Fruits and Vegetables :- आमतौर पर प्रेगनेंसी के दौरान आपके डॉक्टर कुछ ऐसे सप्लीमेंट का सुझाव देते हैं जिनमें आयरन और विटामिन शामिल होते हैं। लेकिन इसके बाद भी अगर आप चाहें तो अपने डाइट में दूसरी उन चीजों को शामिल कर सकती हैं जो प्रेगनेंसी के तीसरे महीने यानि की 8 से 12 सप्ताह के दौरान काफी फायदेमंद होती हैं। आप सेब, संतरा, ब्रोकली, आलू, बिन्स, अनाज, पीनट बटर, बादाम आदि का सेवन कर सकती हैं। इन सब में काफी मात्रा में आयरन और विटामिन पाए जाते हैं जो आपको स्वस्थ रखने का काम करते हैं।
प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में कैसे सोना चाहिए? How should one sleep in the third month of pregnancy?
प्रेगनेंसी की शुरुआती स्टेज यानी तीसरा महीना। इस दौरान पेट का भार (वजन) ज़्यादा नहीं होता है। इसलिए इस दौरान गर्भवती महिला पीठ के बल सीधा या किसी भी करवट नींद सो सकती है।
- अगर आप चाहें तो करवट लेकर सो सकती हैं। करवट लेकर सोने से बच्चेदानी में खून का प्रवाह बेहतर होता है जो शिशु को बढ़ने में मदद और संकोचन का खतरा कम करता है। इतना ही नहीं, बायीं तरफ करवट लेकर सोने से रक्त प्रवाह सही होता है और शिशु को पर्याप्त मात्रा ऑक्सीजन सप्लाई होती है।
- साथ ही, बायीं तरफ करवट लेकर सोते समय कम से कम दो तकिये का इस्तेमाल करें, क्योंकि इससे पेल्विक क्षेत्र पर कम दबाव पड़ता है। करवट झटके से ना बदलें और कम से कम 8-9 घंटे की नींद लें। इसके अलावा, अगर आपको सोने में किसी तरह की कोई दिक्कत होती है तो अपने डॉक्टर से मिलें और उनसे इस बारे में बात करें।
प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में रखें ये सावधानियां Take these precautions in the third month of pregnancy
जैसा की हम पहले ही बात कर चुके हैं की प्रेगनेंसी का यह तीसरा महीना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान आपके शरीर और आपके शिशु में कई तरह के बदलाव आते हैं। इस दौरान आपकी लाइफ स्टाइल कैसी होनी चाहिए और आपको किन किन चीजों का सेवन करना चाहिए, इन सब के साथ साथ आपको यह भी पता होना बहुत जरूरी है की आपको किन चीजों से दूर रहना है, कौन से काम करने हैं और किससे बचना है। प्रेगनेंसी के इस तीसरे सप्ताह में आपको कुछ चीजों को लेकर सावधान होना चाहिए। नीचे हम उन्ही के बारे में बता रहे हैं।
- स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर से परामर्श :- Health Checkups and Doctor Consultations :- प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में अपने डॉक्टर से मुलाकात करें और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं। यह सुनिश्चित करें कि आपके रक्तचाप, शुगर लेवल और आयरन की कमी जैसी किसी समस्या का पता चल जाए। प्रेगनेंसी की शुरुआत में उचित विटामिन जैसे फोलिक एसिड और खनिजों का सेवन करना महत्वपूर्ण है।
- फोलिक एसिड और अन्य सप्लीमेंट्स :- Folic acid and other supplements :- प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में फोलिक एसिड का सेवन बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के सही विकास में मदद करता है। आयरन और कैल्शियम के सप्लीमेंट्स डॉक्टर से सलाह लेकर इसका सेवन करें। डॉक्टर से सलाह जरूर लेना चाहिए।
- तनाव और चिंता से बचें :- Avoid stress and anxiety :- प्रेगनेंसी के तीसरे महीने से मानसिक तनाव और चिंता से बचना बहुत जरूरी है। मानसिक शांति के लिए योग, मेडिटेशन या गहरी श्वास की तकनीकें मदद कर सकती हैं। खुश रहने और आराम करने की कोशिश करें।
- शारीरिक गतिविधि :- Physical activity हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि जैसे वॉकिंग या योगा से शरीर को एक्टिव रखें। इससे आपको ऊर्जा मिलती है और मानसिक स्थिति भी बेहतर रहती है। भारी व्यायाम या अत्यधिक थकान से बचें।
- हेल्दी आहार :- Healthy Diet :- प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में स्वस्थ और संतुलित आहार लेना चाहिए। ताजे फल, सब्जियाँ, अनाज, दालें और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा को शामिल करें। जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड से बचें।
- हाइड्रेटेड रहे :- Stay hydrated :- पानी की पर्याप्त मात्रा पीना महत्वपूर्ण है, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। खासकर प्रेगनेंसी में पानी की कमी से सिरदर्द, थकान और कब्ज जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
- नींद और विश्राम :- Sleep and Relaxation :- प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में शरीर को बहुत आराम की आवश्यकता होती है। जितना हो सके आराम करें और अच्छी नींद लें। गहरी और शांत नींद के लिए रात को सोने से पहले आराम करने का समय निकालें।
- रस्सी न कूदें। :- Avoid jumping rope :- प्रेगनेंसी में रस्सी कूदना आमतौर पर अच्छा नहीं माना जाता क्योंकि यह हाई-इम्पैक्ट एक्सरसाइज है, जिससे पेल्विक फ्लोर पर दबाव, यूरिन लीक और गिरने का खतरा बढ़ सकता है अगर आप पहले से रस्सी कूदती थीं तो डॉक्टर से सलाह लें, लेकिन प्रेगनेंसी में नया शुरू न करें और पेट पर दबाव डालने वाले व्यायामों से बचें, साथ ही शारीरिक आराम और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें.
- अच्छा संगीत सुने। :- Listen to good music :- प्रेगनेंसी में शांत और सुखदायक संगीत सुनना माँ और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि यह तनाव कम करता है और शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करता है संगीत तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) को कम करता है और एंडोर्फिन बढ़ाता है, जिससे गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को अच्छा महसूस होता है। ध्वनि तरंगें शिशु के कान में जाती हैं, जिससे उसके सुनने के कौशल और मस्तिष्क के विकास को बढ़ावा मिलता है। संगीत के माध्यम से आप अपने शिशु से जुड़ सकती हैं, और आपका शिशु आपकी आवाज़ और लय को पहचानने लगता है। शांत संगीत गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को आराम करने और अच्छी नींद लेने में मदद करता है। गर्भावस्था में सुना गया संगीत जन्म के बाद शिशु को शांत करने में मदद कर सकता है।
- अच्छी फिल्में देखें। :- Watch good movies :- प्रेगनेंसी के दौरान आप कई अच्छी फिल्में देख सकती हैं जो आपके मूड को हल्का रखेंगी और आपको प्रेरित करेंगी, जैसे कि हल्की-फुल्की कॉमेडी, फैमिली ड्रामा और गर्भावस्था के विषयों पर आधारित फिल्में,
- प्रेगनेंसी में अच्छी किताबें पढ़ें। :- Read good books during pregnancy :- प्रेगनेंसी में जानकारी, भावनात्मक सहारे और आध्यात्मिक शांति के लिए कई अच्छी किताबें उपलब्ध हैं, जैसे :- नवजात शिशु के बारें में या धार्मिक पुस्तकें मानसिक संतुलन के लिए पढ़ सकते हैं, जो गर्भा संस्कार में भी सहायक होती हैं।
- भारी वजह न उठाएं। :- Avoid lifting heavy :- गर्भावस्था में भारी वजन उठाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे जोड़ों और लिगामेंट्स पर खिंचाव आता है, संतुलन बिगड़ता है, पीठ दर्द और चोट लगने का खतरा बढ़ता है, गर्भावस्था के हार्मोन आपके जोड़ों और लिगामेंट्स को ढीला कर देते हैं, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। पेट बढ़ने से आपका संतुलन बिगड़ता है, जिससे गिरने और चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। भारी वजन उठाने से पीठ और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे दर्द और समस्याएं हो सकती हैं। इससे समय से पहले प्रसव (preterm labor), गर्भपात (miscarriage) और पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन (pelvic floor dysfunction) का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए हल्के काम करें और हमेशा डॉक्टर की सलाह लें, खासकर यदि आप पहले वजन उठाने की आदी थीं।
- ज्यादा झुकने से बचें। :- Avoid excessive bending :- प्रेग्नेंसी में ज़्यादा झुकने से बचना चाहिए क्योंकि इससे पीठ और पेट पर दबाव पड़ता है, संतुलन बिगड़ सकता है, और गिरने का खतरा बढ़ जाता है खासकर तीसरी तिमाही में, इसलिए घुटनों के बल झुकें और पीठ सीधी रखें ताकि आपको और आपके बच्चे को आराम मिले। बढ़ता पेट पहले से ही पीठ पर दबाव डालता है, झुकने से यह दबाव और बढ़ सकता है, जिससे दर्द हो सकता है पेट के बढ़ने से संतुलन (balance) बिगड़ सकता है, जिससे गिरने और चोट लगने का जोखिम होता है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक है इससे रीढ़ (spine) पर भी दबाव पड़ता है और असहजता महसूस हो सकती है.
- कैसे झुके :- How to bend :- घुटनों के बल झुकें (Squat) कोई भी चीज़ उठाने के लिए सीधे झुकने की बजाय, घुटनों को मोड़कर और पीठ सीधी रखते हुए नीचे बैठें (squat करें), यह ज़्यादा सुरक्षित है अगर झुकना ज़रूरी हो, तो धीरे-धीरे और सावधानी से करें अगर कोई चीज़ उठाने में दिक्कत हो, तो मदद मांगने से न हिचकिचाएं ऐसे काम करें जिनमें ज़्यादा झुकना न पड़े और बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें. तीसरी तिमाही (Third Trimester) इस दौरान झुकना और मुश्किल और जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए ज़्यादा सतर्क रहें और ज़रूरत पड़ने पर बिल्कुल न झुकें अपने शरीर की सुनें; अगर झुकने से दर्द या असुविधा हो, तो उस काम से बचें और सुरक्षित तरीके अपनाएं.
- पेट पर ज्यादा प्रेशर न दें। :- Avoid excessive pressure on the abdomen :- प्रेगनेंसी में पेट पर ज़्यादा दबाव (प्रेशर) नहीं देना चाहिए क्योंकि इससे शिशु की स्थिति प्रभावित हो सकती है इसके बजाय, आराम करें, सही मुद्रा में बैठें, हल्का व्यायाम (वॉक, योग) करें, हाइड्रेटेड रहें और डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी तरह का दबाव या भारी काम न करें, क्योंकि शिशु गर्भाशय और एमनियोटिक फ्लूइड से सुरक्षित रहता है, लेकिन ज़ोरदार दबाव हानिकारक हो सकता है।
- क्यों नहीं देना चाहिए पेट पर दबाव :- Why should pressure not be applied on the abdomen :- शिशु की सुरक्षा: शिशु गर्भाशय (uterus), एम्नियोटिक फ्लूइड और पेट की मांसपेशियों से घिरा होता है, जो उसे बाहरी झटकों से बचाता है। गलत धारणा कई बार लोग शिशु के नीचे आने पर पेट दबाने की सलाह देते हैं, लेकिन यह चिकित्सकीय रूप से सही नहीं है और इससे शिशु की स्थिति बिगड़ सकती है, इसलिए हमेशा डॉक्टर से पूछें।असुरक्षित स्थितियाँ ज़ोरदार दबाव या दुर्घटना जैसे गाड़ी का एक्सीडेंट, गिरना शिशु को नुकसान पहुँचा सकता है, इसलिए इससे बचना ज़रूरी है।
- क्या करें जब पेट पर दबाव महसूस हो या दर्द हो :- What to do when you feel pressure or pain in your stomach :- आराम करें: ज़्यादा देर तक खड़े या बैठे न रहें, बाईं करवट लेटें। सही मुद्रा सीधे बैठें और खड़े हों, झुककर न बैठें।हल्का व्यायाम: डॉक्टर से पूछकर हल्की वॉक या स्ट्रेचिंग करें। हाइड्रेशन और डाइट खूब पानी पिएं, फाइबर युक्त भोजन खाएं और एक बार में ज़्यादा खाने से बचें। गर्म सिकाई हल्के गुनगुने पानी से नहाएं या बोतल से पेट की सिकाई करें (डॉक्टर की सलाह पर)। सहायक बेल्ट पेट बढ़ने पर डॉक्टर की सलाह से गर्भावस्था सपोर्ट बेल्ट का उपयोग कर सकती हैं।
- डाइटिंग करने से बचें। :- Avoid dieting :- प्रेगनेंसी में डाइटिंग से बचना चाहिए क्योंकि यह मां और बच्चे के लिए ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी कर सकती है। इसके बजाय, कैलोरी कम करने की बजाय पोषक तत्वों से भरपूर, संतुलित आहार पर ध्यान दें। प्रेगनेंसी में बच्चे के विकास के लिए विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स की बहुत ज़रूरत होती है, जो डाइटिंग से नहीं मिल पाते। प्रेगनेंसी वजन घटाने का समय नहीं है; यह आपके शरीर और बच्चे के लिए आवश्यक वजन बढ़ाने का समय है, लेकिन स्वस्थ तरीके से।
- खाने चीजों से परहेज :- Foods to avoid :- प्रेगनेंसी में एक चीज को बार बार न खाएं। ज्यादा मात्रा में कोई भी चीज न खाएं। ज्यादा खाने के बजाय थोड़ा थोड़ा करने समय के अंतराल पर खाएं। जंक फूड्स और कोल्ड ड्रिंक्स से दूर रहें। पाश्चराइज्ड दूध से बनी चीजों का सेवन करने से बचें। ज्यादा तैलीय और मसालेदार चीजों को खाने से बचें। ज्यादा से ज्यादा आयरन, विटामिन और दूसरे तत्वों का सेवन करें। पैकेट वाली चीजें और माइक्रोवेव में बनाई गई चीजों से का सेवन करने से बचें। सिगरेट, शराब और दूसरी नशीली चीजों से परहेज करें।
- दवा :- Medication :- प्रेगनेंसी में छोटी मोटी समस्या होने पर दवा का सेवन न करें। अपने ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर का ध्यान रखें। प्रदूषण वाली जगह पर जाने से बचें। दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर की राय जरूर लें।
- ड्राइविंग :- Driving :- प्रेगनेंसी में ज्यादा ड्राइविंग न करें। लंबी यात्रा पर जाने से बचें क्योंकि इससे गर्भपात होने का खतरा रहता है। कोई भी काम करते समय सावधानी बरतें।
- पालतु जानवरों के संपर्क में आने से बचें। :- Avoid contact with pets :- प्रेगनेंसी में पालतू जानवरों से पूरी तरह संपर्क से बचना ज़रूरी नहीं, बल्कि सावधानियां बरतनी चाहिए, खासकर बिल्ली के मल (टॉक्सोप्लाज्मोसिस का खतरा), जानवरों के काटने/खरोंचने और उनके पिंजरों की सफाई से बचें; अच्छी स्वच्छता बनाए रखें, हाथ धोएं, कच्चे और बिना धुले फल/सब्जियों से बचें और डॉक्टर से सलाह लें ताकि संक्रमण से बचाव हो सके और आप और आपका बच्चा सुरक्षित रह सके।
- प्रेगनेंसी में लंबे समय तक बैठे या खड़े न रहें। :- Avoid sitting or standing for long periods of time during pregnancy :- प्रेगनेंसी में लंबे समय तक एक जगह बैठना या खड़ा रहना सही नहीं है क्योंकि इससे पैरों में सूजन, ऐंठन और रक्त संचार में कमी हो सकती है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक है इसलिए, थोड़ी-थोड़ी देर में चलना, करवट लेकर सोना, पैरों को ऊपर उठाकर आराम करना और पेट को सहारा देना ज़रूरी है, खासकर दूसरी और तीसरी तिमाही में.
- सेक्स करने से बचें। :- Avoid having sex :- प्रेगनेंसी के शुरुआती दो महीने (पहली तिमाही) में सामान्य और सुरक्षित प्रेग्नेंसी होने पर सेक्स करना आमतौर पर ठीक होता है, लेकिन थकान या हार्मोनल बदलाव के कारण असहज महसूस हो सकता है; हालांकि, अगर ब्लीडिंग, दर्द, या गर्भपात/प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा हो, तो डॉक्टर की सलाह पर ही सेक्स से बचना चाहिए, खासकर प्लेसेंटा प्रीविया जैसी समस्याओं में प्रेगनेंसी में डॉक्टर से बात करने के बाद सही तरीकों से सेक्स करें।
- ज्यादा टाइट कपड़ा पहनने से बचें। :- Avoid wearing overly tight clothes :- गर्भावस्था (प्रेगनेंसी) में ज़्यादा टाइट कपड़े पहनने से बचना चाहिए क्योंकि ये रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) को रोकते हैं, असुविधा बढ़ाते हैं, पाचन और सांस लेने में दिक्कत कर सकते हैं, और नमी फंसने से संक्रमण (इंफेक्शन) का खतरा बढ़ाते हैं इसलिए ढीले-ढाले और आरामदायक मैटरनिटी कपड़ों का चुनाव करना माँ और बच्चे दोनों के लिए बेहतर है, खासकर कमर, पेट और जांघों के आसपास।
- प्रेगनेंसी में ऊंची हिल वाली सैंडल पहनने से बचें। :- Avoid wearing high-heeled sandals during pregnancy :- प्रेगनेंसी में ऊंची हील्स (high heels) पहनने से बचना चाहिए क्योंकि इससे संतुलन बिगड़ता है गर्भावस्था में वजन बढ़ने से गुरुत्वाकर्षण केंद्र आगे की ओर शिफ्ट होता है, और हील्स इसे और बढ़ा देती हैं, जिससे संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है और गिरने का खतरा बढ़ता है. हील्स पहनने से पीठ, कूल्हों (hips) और पेल्विस (pelvis) पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है. गर्भावस्था में पैरों में सूजन (swelling) और मांसपेशियों में ऐंठन (cramps) आम है, हील्स इसे और खराब कर सकती हैं. प्रेग्नेंसी हार्मोन (relaxin) लिगामेंट्स को ढीला करते हैं, जिससे जोड़ों में अस्थिरता (instability) आती है, और हील्स इसे और बढ़ाती हैं. इसके बजाय आरामदायक फ्लैट जूते पहनें जो पैरों को सहारा दें. अगर पहनना ही है, तो बहुत कम हील (1-2 इंच) और चौड़ी हील चुनें, वो भी थोड़े समय के लिए ऐसे जूते चुनें जिनमें अच्छी कुशनिंग (cushioning) और सपोर्ट हो.हालांकि हील्स बच्चे को सीधे नुकसान नहीं पहुंचातीं, पर मां के शारीरिक संतुलन और आराम पर बुरा असर डालती हैं. दूसरी और तीसरी तिमाही में इनसे पूरी तरह बचना सबसे अच्छा है.
किसी भी तरह की कोई परेशानी होने पर तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें और उन्हें अपनी परेशानी के बारे में बताएं। किसी भी चीज का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से बचें। खुश रहें और इस खूबसूरत समय का आनंद लें।
परामर्श :- Consultation
प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में सही खानपान, पर्याप्त आराम और नींद की आदतें बनाए रखने से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है, जो प्रेगनेंसी के इस महत्वपूर्ण समय में बेहद जरूरी है।
प्रेगनेंसी का तीसरा महीना बहुत खास होता है, लेकिन इस दौरान आपको थोड़ी सी सावधानी और समझदारी बरतने की जरूरत होती है। अच्छा खाएं, अच्छी नींद लें, नियमित चेकअप करवाएं और खुश रहें। याद रखें, आपके और आपके शिशु का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है।
अगर गर्भवती महिलाओं को र्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
कोई भी उपाय करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
गर्भावस्था के दौरान कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।
डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।
यह एक सामान्य जानकारी है। अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं। तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।
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