​बच्‍चों की हाइट बढ़ाने के तरीके Ways to increase the height of children

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बच्चों की हाइट नहीं बढ़ने के कारण / बच्चों की हाइट बढ़ाने के नेचुरल तरीके Reasons for children not growing in height / Natural ways to increase children's height लड़के और लड़कियों की लंबाई किस उम्र तक बढ़ती है? Till what age do boys and girls grow in height? आज के समय में हर कोई अच्छी हाइट पाना चाहता है, क्योंकि लंबाई न केवल व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती है, बल्कि आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। यहां जानिए, लड़के और लड़कियों की लंबाई कब तक बढ़ती है? जन्म के बाद बच्चों के सही विकास की जिम्मेदारी माता-पिता की होती है। किसी भी बच्चे की शारीरिक संरचना कैसे होगी यह पूरी तरह से माता-पिता पर निर्भर करता है। अक्‍सर पेरेंट्स शिकायत करते हैं कि उनके बच्‍चे की हाइट नहीं बढ़ रही है या अपने साथ के बच्‍चों के मुकाबले उनके बच्‍चे की हाइट कम है। आजकल तो बच्‍चों की हाइट न बढ़नी या कम बढ़ने की प्रॉब्‍लम ज्‍यादा देखी जा रही है। कम हाइट होने की वजह से बच्‍चों के आत्‍मविश्‍वास में कमी आती है और वो लोगों के सामने जाने से भी कतराने लगते हैं। बच्‍चों के सही मानसिक विकास के लिए उचित शारीरिक विकास होना भी जरूरी ह...

गर्भावस्था में उठने बैठने का सही तरीका The right way to sit and stand during pregnancy

प्रेगनेंट महिलाओं के लिए खतरनाक हो सकता है इस पोजीशन में बैठना, जानें होने वाले नुकसान Sitting in this position can be dangerous for pregnant women, learn about the potential harm.

क्या है गर्भावस्था में उठने, बैठने व सोने का सही तरीका What is the correct way to get up, sit and sleep during pregnancy?

हैलो फ्रेंड्स!

मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }

मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। 

आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।

प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं के सामने कई शारीरिक व मानसिक चुनौतियां आती हैं, इनका सावधानी पूर्वक व डटकर मुकाबला करने से न सिर्फ महिला बल्कि पेट में पल रहा शिशु भी स्वस्थ रहता है। यही वजह है कि गर्भावस्था के दौरान महिला का ध्यान रखना व सावधानी बरतना काफी जरूरी है। पर यह सावधानी सिर्फ खान-पान को लेकर ही नहीं बरतनी होती, बल्कि बच्चे को स्वस्थ व फिट रखने के लिए उसे शारीरिक गतिविधियों के दौरान भी एक्स्ट्रा केयर करना पड़ता है। जैसे :-

उठने, बैठने व सोने के दौरान भी कई बातों का ध्यान रखना चाहिए।गलत तरीके से बैठने की वजह से गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान हो सकता है।

गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान कई तरह के उतार चढ़ाव आते हैं। कभी स्वास्थ्य प्रभावित होता है तो कभी मन बेचैन हो जाता है। इस सफर में कुछ भी स्थाई नहीं होता है। इसलिए महिलाओं को कई तरह की सावधानियां बरतनी पड़ती है ताकि वह खुद की और गर्भ में पल रहे शिशु का पूरा ध्यान रख सके। महिलाओं को अपने बैठने की पोजीशन का भी ध्यान रखना चाहिए।

आलती-पालथी मारकर :- sitting cross-legged

कई लोगों को आलती-पालथी मारकर बैठना अच्छा लगता है। इस अवस्था में आमतौर पर फर्श पर बैठना चाहिए, इससे बैठने वाले को काफी आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। इस पोजीशन में बैठने के और भी कई फायदे होते हैं। लेकिन गर्भवती महिलाओं को इस पोजीशन में नहीं बैठना चाहिए।

क्रॉस करके बैठना :- sitting cross-legged

गर्भवती महिलाओं को पैरों को क्रॉस करके बैठने में कोई समस्या नहीं होती है बल्कि इस पोजीशन पर बैठने से डिलीवरी आसान हो सकती है। लेकिन हर गर्भवती महिला पर यह बात लागू नहीं होती है। कुछ प्रेगनेंट महिलाओं को इस अवस्था में बैठने से दिक्कतें होती हैं। दरअसल जब वे इस पोजीशन में बैठती हैं तो इससे ब्लड सर्कुलेशन अवरुद्ध होने लगता है जिससे गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर बढ़ सकता हैं। हाईबीपी से प्रेगनेंट महिला को कई अन्य परेशानियां हो सकती हैं। अगर किसी प्रेगनेंट महिला को इस पोजीशन में बैठना ही है, तो कोशिश करें कि 30 मिनट से ज्यादा इस अवस्था में न बैठें।

किस पोजीशन में बैठें What position to sit in

कुछ पोजीशन ऐसी भी होती है, जो डिलीवरी के दौरान काफी हेल्पफुल होती है। इन्हीं में से एक पोजीशन है, स्क्वॉट पोजीशन। इस पोजीशन में बैठने से पेल्विक एरिया की मांसपेशियां मजबूत और लचीली होती हैं। डिलीवरी के दौरान पेल्विक एरिया का खुलना जरूरी है ताकि प्रसव आसानी से हो।

प्रेगनेंसी में उठने-बैठने में तकलीफ क्यों होती है Why does it hurt to sit or stand during pregnancy?

  1. गर्भाशय का दबाव
  2. बढ़ता वजन
  3. पीठ के निचले हिस्से में दर्द
  4. जोड़ों में दर्द
  5. मांसपेशियों में कमजोरी

गर्भावस्था के दौरान बैठने का सही तरीका The right way to sit during pregnancy

गर्भावस्था में जितनी सावधानी उठने के दौरान बरतनी चाहिए, उतना ही केयर बैठने के दौरान भी करना चाहिए। अब बात बैठने के सही तरीकों पर।

कंफर्टेबल चेयर का इस्तेमाल करें Use a comfortable chair

  1. बैठने के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि आपके दोनों पैर जमीन से सटे हों और आराम से हों। एक पैर के ऊपर दूसरे पैर को रखकर न बैठें।
  2. बैठते वक्त इस बात का भी ध्यान रखें कि शरीर का वजन आपके पेट पर न पड़े। आप किसी चीज का सहारा लेकर धीरे-धीरे बैठ सकती हैं।
  3. आप सोफा, बेड या कुर्सी कहीं भी बैठती हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि आपकी पीठ एकदम सीधी हो। पीठ सीधी रखने के लिए आप तकिये व कुशन का इस्तेमाल कर सकती हैं।
  4. प्रेगनेंसी में बैक कंफर्टेबल रखने के लिए अच्‍छे सपोर्ट की जरूरत रहती है. इसके लिए पीठ के निचले हिस्‍से को सपोर्ट देने वाली कुर्सी (Chair) का उपयोग कर सकती हैं. अपनी पीठ को एक्‍स्ट्रा सपोर्ट देने के लिए छोटे तकिए या कुशन भी लगा सकती हैं. पैरों को लंबे वक्त तक लटकाए न रखें, वरना सूजन आ सकती है. पैरों को ऊपर ही उठाए रखें.
  5. अगर कामकाजी हैं और गर्भावस्था के दौरान ऑफिस जाना पड़ रहा है, तो वहां बैठने के लिए अच्छी कुर्सी का चयन करें। कुर्सी को बार-बार जरूरत पड़ने वाली चीजों या फाइलों के पास ही रखें, ताकि आपको बार-बार न उठना पड़े। कुर्सी पर बैठने के दौरान कंधे को रिलेक्स रखें और अपने हाथों को चेयर के आर्म रेस्ट पर रखें।
  6. या तो एकदम सीधे बैठें या फिर पीछे की तरफ थोड़ा सा झुकाव देकर बैठें। इस तरह बैठें कि आपके स्तन एकदम सामने या हल्के से ऊपर की तरफ हों, ये पेट से लगे न हों। बैठने के दौरान इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि दोनों टांगे भी एक-दूसरे से न जुड़ी हों, टांगे जुड़ी होने पर पेट को जगह नहीं मिलेगी।
  7. कहीं भी बैठें इस बात का ध्यान रखें कि एक ही अवस्था में बहुत लंबे समय तक न बैठें।

झुकने का सही तरीका The right way to bow

  1. घर या ऑफिस में काम करते समय बार-बार उठने या झुकने से पीठ पर हल्‍का दबाव महसूस हो रहा है तो ज्यादा जोर न दें. प्रेगनेंसी हामोर्न रिलैक्सिन लिगामेंट्स और पेल्विस के जॉइंट को रिलैक्‍स करने में मदद करता है, इसलिए कोई भारी चीज न उठाएं. अगर ऐसा करती हैं तो कमर की बजाय घुटनों के बल झुकनें का प्रयास करें.

गर्भावस्था के दौरान उठने का सही तरीका The right way to get up during pregnancy

अचानक उठना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए कुछ सावधानियाँ हैं जिनका ध्यान हर एक गर्भवती महिला को ध्यान में रखना चाहिए।

धीरे-धीरे उठें और बैठें Get up and sit down slowly

  1. प्रेगनेंसी में धीरे-धीरे ही उठने-बैठने की कोशिश करें. शरीर का बैलेंस बनाए रखें. अगर इसमें तकलीफ हो रही है तो किसी की मदद लेने में हिचकिचाएं नहीं. आसपास कोई न हो तो कुर्सी या टेबल का सहारा ले सकती हैं.
  2. जब भी बेड से उठें, तो आपको सबसे पहले बाईं ओर करवट लेना चाहिए। इसके बाद धीरे-धीरे से अपने घुटने को बेड के किनारे पर लाएं।
  3. आपको उठने से पहले 2-3 मिनट बैठना चाहिए और इस दौरान गहरी सांस लेकर हाथों का सहारा लेते हुए धीरे-धीरे उठें।
  4. कभी भी जल्दी व झटके से उठने से परहेज करें, यह काफी नुकसानदायक हो सकता है।
  5. अगर उठने में किसी तरह की परेशानी होती है, तो आप बेड के किनारे या घर के किसी सदस्य का सहारा लेकर उठें।
  6. अगर आपको घूम कर कोई सामान लेना है, तो झटके से न घूमें। धीरे-धीरे अपने पूरे शरीर को घुमाने की कोशिश करें न कि सिर्फ कमर को।

रेस्ट करें, हेल्दी डाइट लें Rest and eat a healthy diet

प्रेगनेंसी के दौरान आराम करना बहुत जरूरी है. आप अपने शरीर को आराम देने के लिए एक आरामदायक कंडीशन में बैठ या लेट सकती हैं. इस दौरान खानपान को सही रखना बेहद जरूरी है. इससे शरीर को मजबूती मिलती है और उठने-बैठने या किसी काम में ज्यादा दिक्कतें नहीं आती है. खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन जरूर शामिल करें.

प्रेग्नेंसी के दौरान सोने का सही तरीका The right way to sleep during pregnancy

पर्याप्त नींद सभी के लिए जरूरी है। गर्भवती के लिए यह इसलिए ज्यादा जरूरी हो जाता है क्योंकि शारीरिक जटिलताओं का वजह से उसमें अधिक थकान रहती है। पर अच्छी नींद के लिए सोने का तरीका भी बेहतर होना जरूरी है, ताकि बच्चे को भी नुकसान न हो। जानते हैं सोने का सही तरीका।

  1. अगर आप प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में हैं तो आपके लिए सीधे होकर सोना फायदेमंद होगा। दरअसल इससे भ्रूण का विकास अच्छी तरह से होता है। पर दूसरे या तीसरे महीने के बाद सीधे सोने से परहेज करें।
  2. प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही के बाद बायीं करवट सोना आपके लिए लाभकारी होगा। इससे भ्रूण में रक्त बढ़ता है और उसे पोषण भी मिलता है।
  3. चाहे आप गर्भावस्था के पहले महीने में हों या बीच में, इस बात का ध्यान रखें कि पेट के बल सोना नुकसानदायक हो सकता है। इससे बच्चे के विकास पर असर पड़ता है और उसका स्वास्थ्य भी खराब होता है।
  4. आप सोते समय तकिए को पैरों के बीच में रखें, इससे न सिर्फ आपको आराम मिलेगा, बल्कि पेट को भी सहारा मिलेगा।
  5. जहां तक बात है सिर के नीचे तकिया रखने की तो यह नर्म और पतला होना चाहिए। मोटा और सख्त तकिया लेने से आपको व बच्चे दोनों को ही नुकसान पहुंच सकता है।
  6. अगर एक ही करवट लेकर सो रही हैं, तो पीठ के पीछे तकिया लगाना न भूलें। तकिया लगाने से पीठ में दर्द नहीं होगा।
  7. अगर आप घुटनों को थोड़ा सा मोड़ कर सोएंगी तो पीठ को आराम मिलेगा और कमर दर्द की शिकायत नहीं होगी।
  8. गर्भावस्था के अंतिम दिनों में भूलकर भी पीठ के बल न सोएं। दरअसल इस अवधि में गर्भ का साइज बढ़ जाता है। ऐसे में पीठ के बल लेटने से गर्भाशय का सारा भार सीधे आपकी पीठ और कैवा शिरा (वह शिरा जो शरीर के निचले हिस्से से रक्त को आपके दिल तक पहुंचाता है) पर पड़ता है, जिससे पीठ दर्द, बवासीर, अपच व सांस लेने में तकलीफ जैसी परेशानी होती है।

परामर्श :- Consultation

प्रेग्नेंसी में महिलाओं में शारीरिक बदलाव आते हैं, जैसे जल्दी थकान, शरीर व वजन का बढ़ना, पेट निकलना, हार्मोन में परिवर्तन आदि। ऐसे में उनके सोने, उठने व बैठने पर खास ध्यान देना पड़ता है, क्योंकि जरा सी लापरवाही से शिशु के वजन व विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।

अगर गर्भवती महिलाओं को र्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।

कोई भी उपाय करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।

गर्भावस्था के दौरान कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।

डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।

यह एक सामान्य जानकारी है। अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं। तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।

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