प्रेग्नेंसी में कैसे सोना चाहिए How to sleep during pregnancy
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प्रेग्नेंसी में कैसे सोना चाहिए / प्रेग्नेंसी में सोने से जुड़ी कैसी मुश्किलें आती हैं How to sleep during
pregnancy / What are the difficulties associated with sleep during pregnancy
प्रेग्नेंसी के दौरान सोने से पहले ध्यान रखें ये महत्वपूर्ण बातें Keep these important things in mind before sleeping during pregnancy
जैसे ही किसी महिला में गर्भावस्था के लक्षण दिखने लगते हैं और प्रेग्नेंसी कन्फर्म होती है, वह पूरी तरह से एहतियात बरतना शुरू कर देती है। ऐसे समय में उठने-बैठने से लेकर गर्भावस्था के दौरान सोने की स्थिति तक, सभी चीजों का विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। गर्भवती महिला के किसी भी तरह के गतिविधि का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और शरीर के वजन में भी बढ़ोतरी होती है। किसी भी प्रेग्नेंट महिला के लिए हेल्दी डाइट के साथ पर्याप्त निंद बहुत जरूरी है।
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
इन सबके अलावा प्रेग्नेंसी में सोने का तरीका जानना भी बहुत जरूरी होता है ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। गर्भावस्था के दौरान सोने में काफी परेशानी होती है और हर किसी को पता नहीं होता है कि गर्भावस्था के दौरान कैसे सोना चाहिए। यदि आप भी उन्हीं में से एक है और अपने प्रेग्नेंसी के समय में ऐसी गलतियां कर रही हैं, तो उनमें आज से ही सुधार करें नहीं तो बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
प्रेग्नेंसी में सोने से जुड़ी कैसी मुश्किलें आती हैं What are the sleep problems during pregnancy?
नींद अच्छी सेहत के लिए बहुत मायने रखती है। संतुलित नींद लेने से दिमाग और शरीर स्वस्थ रहता है। किस पॉजिशन में सो रहे हैं, ये भी मायने रखता है। सोने की पॉजिशन से भी शरीर पर फर्क पड़ता है। प्रेग्नेंसी में जब बच्चा गर्भ में होता है तब कैसे उठे, कैसे बैठे, कितनी देर तक खड़े रहें, मायने रखता है और इसमें सोने की पॉजिशन और कितनी नींद लेना जरूरी है, ये भी शामिल हैं। प्रेग्नेंसी महिलाओं के लिए बदलाव का दौर होता हैं। गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास मां की एक्टिविटी पर निर्भर करता है। प्रेग्नेंसी में खुद का ख्याल रखना जरूरी है।
जो महिलाएं पहली बार गर्भवती होती हैं, उनके मन में सवाल होता हैं कि किस तरह से सोएं ताकि बच्चे पर गलत असर न पड़े। प्रेग्नेंसी में महिलाओं को थकान, जी-मिचलाना, बेचैनी और शरीर में दर्द जैसी तकलीफें होती हैं। उन्हें ठीक तरह से सोने में भी परेशानी आती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान रात में बार-बार यूरिन आने जैसा लगता है, सांस लेने में दिक्कत आती है। इस कारण दिमाग एक्टिव रहता है और प्रेग्नेंट महिला को नींद नहीं आती है।
प्रेग्नेंट महिलाओं को पेट के बल सोने से मना किया जाता हैं ताकि भ्रूण पर किसी तरह का दबाव न आएं। करवट लेने पर भी गर्भवती महिला को अजीब सा लगता है।
जिन महिलाओं को पेट के बल सोने की आदत होती हैं, उन्हें प्रेग्नेंसी में सही तरह से सोने में भी दिक्कत आती हैं।
प्रेगनेंसी में नींद न आने के कारण Causes of insomnia during pregnancy
- तनाव बढ़ने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना तनाव की वजह से प्रेगनेंसी में अक्सर नींद नहीं आती है। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान महिलाओँ को जितना हो सके तनाव से दूर रहना चाहिए।
- गर्भाशय का आकार बढ़ने से प्रेगनेंसी में नींद न आना गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में गर्भाशय (uterus का आकार बढ़ता है जिससे प्रेगनेंट महिलाओं को लेटने में दिक्कत होती है और उन्हें नींद नहीं आती।
- बार बार पेशाब आने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय का आकार निरंतर बढ़ता रहता है जिससे पित्त की थैली पर इसका प्रभाव पड़ता है और बार बार पेशाब आने की अनुभूति होती है। यह अपर्याप्त नींद का एक कारण है।
- पीठ और श्रोणि में दर्द होने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना प्रेगनेंसी में नींद पूरी न होना, पीठ और श्रोणि (pelvic) में दर्द के कारण हो सकता है।
- हाथों और पैरों में सूजन होने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना प्रेगनेंसी में इडिमा (edema) यानी हाथों और पैरों में सूजन बहुत आम है। जिसकी वजह से उन्हें नींद की समस्या होती है।
- पेट में गैस बनने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना गर्भावस्था में ज्यादातर प्रेगनेंट महिलाओं के पेट में गैस बनने के कारण भी उन्हें अनिद्रा की शिकायत होती है।
- दिल की धड़कन तेज होने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान कुछ प्रेगनेंट महिलाओं के शरीर में रक्त का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता और अचानक उनकी दिल की धड़कने अनियमित हो जाती है, जिससे उनकी अच्छी नींद की जरूरत पूरी नहीं हो पाती।
- कब्ज की समस्या से प्रेगनेंसी में नींद न आना प्रेगनेंंसी में महिलाओँ को कब्ज की समस्या के कारण नींद नहीं आती।
- स्तनों में सूजन और दर्द होने से प्रेगनेंसी में नींद न आना गर्भावस्था में महिलाओं के स्तनों में सूजन और दर्द होने के कारण उनकी नींद पूरी नहीं होती।
प्रेग्नेंसी में कितनी देर सोना चाहिए How long should you sleep during pregnancy?
प्रेग्नेंसी में सोने की पॉजिशन तो मायने रखती है लेकिन कितनी देर सोएं, इस बारे में भी जानना जरूरी है। सामान्य अवस्था में ज्यादा देर सोना या कम सोना सेहत को प्रभावित करता है, वैसे ही प्रेग्नेंसी में कम या ज्यादा सोने से बच्चे के विकास पर असर पड़ता है। सामान्य तौर पर 7 से 8 घंटे की नींद लेना पर्याप्त होता है। लेकिन प्रेग्नेंट महिलाओं को सात घंटे से थोड़ा ज्यादा सोना चाहिए और जरूरत लगें तो दिन में भी थोड़ी देर सोना चाहिए।
कम नींद से प्रेग्नेंसी पर क्या असर पड़ता है How does lack of sleep affect pregnancy?
अगर कोई प्रेग्नेंट महिला पर्याप्त नींद नहीं लेती है तो बच्चे पर इसका असर पड़ता है। प्रेग्नेंसी में बच्चे को पर्याप्त रूप से पोषक तत्वों की जरूरत होती हैं। बच्चा मां के जरिए ही ऑक्सीजन की पूर्ति करता है। अगर प्रेग्नेंसी में नींद पूरी न हो तो प्लेसेंटा तक ठीक तरह से ब्लड सप्लाय नहीं होता। इससे बच्चे की ह्रदय गति कम हो जाती है। साथ ही साथ खून की कमी भी हो जाती है। जब प्रेग्नेंट महिला सो रही होती है तब बच्चे को ब्लड और ऑक्सीजन का सप्लाय अच्छे से हो पाता है, अगर प्रेग्नेंट महिला कम नींद लें तो हार्मोन बनना भी कम हो जाते हैं।
प्रेग्नेंसी में नींद की प्रॉब्लम और सॉल्यूशन Sleep problems and solutions during pregnancy
प्रेग्नेंसी के हर फेज में अलग अलग प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है। नींद की समस्या भी हर तिमाही में अलग कारणों से होती है।
पहली तिमाही First trimester
बार-बार पेशाब आना :- Frequent urination :- पहली तिमाही में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है, इसे फिल्टर करने के लिए किडनी को मेहनत करनी पड़ती है। इस कारण बार बार पेशाब करने के लिए उठना पड़ता है। प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के बढ़ने से भी ऐसा होता है। यूटेरस का आकार बढ़ने से ब्लैडर पर दबाव पड़ता है, इस कारण भी बार बार यूरिन आता है और नींद में खलल पैदा हो जाती है।
शारीरिक दर्द :- Physical aches and pains :- प्रेग्नेंट महिला का शरीर बच्चे को संभालने के लिए खुद को तैयार करने लगता है, जिससे मसल्स और हड्डियों में दर्द होना शुरू हो जाता है। शरीर में अलग-अलग जगहों पर दर्द, सूजन और ऐंठन होती है जिससे रात को नींद खराब होती है।
उल्टी आना :- Vomiting :- प्रेग्नेंसी में उल्टी जैसा महसूस होना सामान्य है, इस कारण रात में जागना पड़ता है या नींद टूट जाती है।
- सॉल्यूशन :- Solution :- अगर रात में ठीक से नींद नहीं आ रही है तो दिन में थोड़ी देर के लिए सो सकती है। इससे एनर्जी मिलती है। दिन में दो घंटे के लिए सोना ठीक रहेगा।
दूसरी तिमाही second quarter
दूसरी तिमाही में निम्न कारणों से नींद न आने की शिकायत हो सकती है। यूटेरस का आकार बढ़ने से पेट में दबाव पड़ता है, जिससे सीने में जलन होने लगती है। ऐसे में अगर लेटते हैं तो तकलीफ और बढ़ जाती है। कुछ महिलाओं को पिंडलियों में ऐंठन महसूस होती हैं, जिससे नींद न आने की दिक्कत हो सकती है। हार्मोन बदलने के कारण भ्रम और अजीब सपने आते है।
- सॉल्यूशन :- Solution :- ऐसा होने पर समय पर खाना खाएं और जल्दी-जल्दी खाने के बजाय आराम से खाना खाएं ताकि खाना हजम हो जाएं और सीने में जलन न हो। रात के खाने और सोने दोनों में 2 से 3 घंटे का अंतराल रखें। पैरों को आराम दें, ज्यादा देर खड़े न रहे।
तीसरी तिमाही third quarter
प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में वजन बढ़ने से पीठ दर्द होने लगता है, जिससे रात को सोने में दिक्कत आती है। बार-बार यूरिन आने से और सांस लेने में दिक्कत होने से भी नींद नहीं आती है।
- सॉल्यूशन :- Solution :- पीठ में दर्द होने पर करवट लेकर सोना चाहिए। दोनों घुटनों के बीच तकिया रखे और हल्के हाथों से पीठ की मालिश करने से फायदा होता है। सांस लेने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
प्रेग्नेंसी में कैसे सोना चाहिए How to sleep during pregnancy
प्रेग्नेंसी एक बेहद ही ख़ास और कोमल पल होता है। इस दौरान आपको अपने जीवनशैली पर खास ध्यान देने कि जरूरत होती है। आप क्या खाती हैं, क्या पीती हैं, कितने बजे सोती हैं, कितने बजे जगती हैं और इन सबसे खास, बात सोते समय किस पोजीशन में सोती हैं। गर्भावस्था के दौरान आपको सोते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपके गर्भ में पल रहे शिशु पर किसी तरह का कोई बुरा प्रभाव न पड़े।
प्रेग्नेंसी कि पहली तिमाही यानी कि पहले तीन महीने तक The first trimester of pregnancy, i.e., the first three months
प्रेग्नेंसी में कैसे नहीं सोना चाहिए How not to sleep during pregnancy
प्रेग्नेंसी कि पहली तिमाही यानी कि पहले तीन महीने तक आप पीठ के बल सो सकती हैं। लेकिन ज्यादा लंबे समय तक पीठ के बल लेटना ठीक नहीं है। ज्यादा देर पीठ के बल लेटने से यूटेरस से पीठ की मसल्स, रीढ़ की हड्डी पर दबाव आता है, जिससे बच्चे तक ठीक से ब्लड सर्कुलेशन नहीं हो पाता। पीठ के बल लेटने से मसल्स में दर्द और सूजन हो सकती है। इसके अलावा पेट के बल तो हरगिज नहीं लेटना है।
प्रेग्नेंसी कि दूसरी और तिमाही में पीठ के बल न सोए Avoid sleeping on your back during the second and third trimester of pregnancy.
प्रेग्नेंसी कि दूसरी तिमाही में आपको पीठ के बल नहीं सोना चाहिए। क्योंकि इस समय पीठ के बल सोने से गर्भाशय का पूरा भार आपकी पीठ पर चला जाता है जिसके कारण आपको काफी परेशानियां हो सकती हैं।
पीठ शरीर के नीचले हिस्से से दिल तक खून पहुंचाती है, इसलिए पीठ के बल सोने से आपको अपच, गैस, कब्ज, बवासीर, ब्लड सर्कुलेशन, पीठ दर्द, सिर दर्द और सांस लेने में परेशानी होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इतना ही नहीं, जब आपके शरीर के ब्लड वेसेल्स में खून कि कमी होती है तो गर्भ में पल रहे शिशु के भी कुछ खास अंगों में खून कि कमी हो जाती है जो आपके साथ साथ आपके शिशु के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
प्रेग्नेंसी में पीठ के बल सोने के बजाय आप थोड़ी देर दायीं तरफ सो सकती है। लेकिन दायीं तरफ भी सोना उतना सुरक्षित नहीं माना जाता है जितना कि बायीं तरफ सोना। क्योंकि दायीं तरफ सोने से आपके जिगर पर प्रेशर पड़ सकता है। जिसकी वजह से आपको परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। प्रेग्नेंसी में बायीं तरफ होकर सोने कि कोशिश करनी चाहिए लेकिन अगर आप इस पोजीशन में सोए सोए थक जाती हैं तो फिर कुछ समय के लिए आप दायीं ओर करवट लेकर सो सकती हैं।
प्रेग्नेंसी में बायीं तरफ सोना सबसे बेहतर होता है। क्योंकि यह आपके साथ साथ आपके गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ और सुरक्षित रखने में मदद करता है। बायीं तरफ करवट लेकर सोने से आपके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बहुत सही तरह से होता है जिसके कारण आप अपच, गैस, पीठ दर्द, सांस लेने में परेशानी होना आदि जैसी ढेरों समस्याओं से दूर रह सकती हैं। इसके अलावा, आपके शिशु को पोषक तत्व और ऑक्सीजन भी भरपूर मात्रा में मिलती है। जिसकी वजह से आपके शरीर पर कम दबाव पड़ता है और आपकी प्रेग्नेंसी स्वस्थ रहती है।
बायीं तरफ सोते समय आप चाहें तो अपने घुटनों को मोड़ भी सकती हैं। इस पोजीशन में आपको काफी तकलीफ हो सकती है लेकिन यह पोजीशन आपके और शिशु के लिए फायदेमंद माना जाता है। आप चाहें तो अपने दोनों टांगों के बीच में एक मुलायम तकिया भी रख सकती हैं। ऐसा करने से आपको आराम मिलेगा। आपको सोते समय अपने साथ साथ आपके गर्भ में पल रहे नन्हे शिशु की सुरक्षा और स्वस्थ का भी ख्याल रखना है।
प्रेग्नेंसी के दौरान अच्छी नींद आने के लिए क्या करें What to do to get good sleep during pregnancy
प्रेगनेंसी में अच्छी नींद आने के उपाय Tips for good sleep during pregnancy
- गर्भावस्था में नींद के लिए तनावमुक्त रहना बेहद जरूरी है। आप जितना तनाव (stress) लेंगी, आपको सोने में उतनी ही परेशानी होगी।
- रोजाना रात को सोने से पहले हल्का भोजन करें। हल्के भोजन से आपको पाचन की समस्या नहीं होगी और आपकी नींद पूरी होगी। जैसे रोटि-सब्जी, दाल, सलाद आदि।
- अपने आहार को संतुलित रखें और गैस बनाने वाली सब्जियों से परहेज करें, जैसे गोभी, पनीर और मसालेदार खाना न खाएं।
- प्रेगनेंंसी में अच्छी नींद के लिए रात के समय सोने से पहले ज्यादा पानी न पीएं। इससे आपको बार बार पेशाब आ सकता है और आपकी नींद टूट सकती है।
- चाय और कॉफी में कैफिन और अन्य हानिकारक तत्व होते हैं जो आपकी नींद में खलल डाल सकते है, इसीलिए सोने से पहले चाय या कॉफी का सेवन न करें।
- प्रेगनेंसी में डॉक्टर रोजाना एक ही समय पर सोने की सलाह देते हैं। ताकि आपकी सोने की आदत बने और रोज उसी समय आपको नींद भी आए।
- गर्भावस्था में नींद न आए तो आप सोने से पहले मन को प्रसन्न करने वाले गाने सुन सकती हैं। गाने सुनने से आपको अच्छी यादें याद आएंगी और जल्दी नींद आ जाएगी।
- रोज थोड़ी देर पैदल चलने से प्रेगनेंसी से संबंधित कई समस्याओं का समाधान मिलता है जिनमें से नींद भी एक है। इसीलिए रोजाना आपको भोजन के बाद थोड़ी देर पैदल चलना चाहिए।
- हल्के हाथों से सिर की मालिश करवाएं। जरूरत हो तो हाथों और पैरों की भी मालिश करवा सकती हैं। इससे आपको अच्छी नींद आएगी।
- सोने से पहले, गर्मी के मौसम में ठंडे पानी से और सर्दी के मौसम में गुनगुने पानी से नहाएं।
- प्रेग्नेंसी में अच्छी नींद नहीं आ रही है तो कुछ टिप्स को अपना सकती है;
- सोते समय एक से ज्यादा तकिये इस्तेमाल करें। एक तकिया अपने घुटनों के बीच और दूसरा तकिया पेट के नीचे रखें। इससे आपको आराम मिलेगा और अच्छी नींद आएगी।
- सोने से पहले भारी भरकम खाना न खाएं। इससे पेट में गैस की दिक्कत हो सकती है।
- जहां आप सो रही है, वहां साफ-सफाई होना चाहिए।
- सोने से पहले हाथों, पैरों, सिर और गर्दन की मालिश करना चाहिए। इससे मसल्स में तनाव कम होता है।
परामर्श :- Consultation
गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
कोई भी उपाय करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
गर्भावस्था के दौरान कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।
डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।
यह एक सामान्य जानकारी है। अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं। तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है। तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।
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