गर्भाशय क्या है? सम्बंधित समस्याएं लक्षण और इलाज What is the uterus? Related problems, symptoms, and treatment
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गर्भाशय क्या है? जानें सम्बंधित समस्याएं और इलाज What is the uterus? Learn about related problems and treatments.
गर्भाशय महिलाओं का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। इसे प्रजजन अंग के नाम से भी जाना जाता है। बच्चादानी या गर्भाशय वही जगह होती है, जहां भ्रूण का विकास होता है और 9 महीने होने तक उसका पोषण होता है। जो श्रोणि में स्थित होता है। यह गर्भावस्था के दौरान विकासशील भ्रूण के पोषण और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। यह एक मांसपेशीय अंग है जो जो स्त्री प्रजनन काल में माहवारी, गर्भधारणा,और प्रसव के दौरान अहम भूमिका निभाता है।
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें। तो अगर आपको मेरा लेख ( आर्टिकल ) अच्छा लगे तो फॉलो जरूर करें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
एक स्त्री के जीवन काल में उसके शरीर में काफी सारे बदलाव होते है। इन बदलावों का प्रभाव गर्भाशय पर भी होता है, जो बीमारी का कारण बन सकता है।
गर्भाशय क्या है? What is the uterus?
यूटरस का हिंदी में अर्थ गर्भाशय है। यह स्त्री जननांग है जो हर महिला या लड़की में जन्म से होता है।
गर्भाशय एक महिला के पेल्विस में नाशपाती के आकार का अंग है, जिसे गर्भ या बच्चेदानी भी कहते हैं। यह वह जगह है जहां गर्भावस्था के दौरान शिशु का विकास होता है। इसमें मोटी मांसपेशियों की दीवारें होती हैं, जो बढ़ते शिशु को सपोर्ट करने के लिए फैल सकती हैं।
गर्भाशय का शीर्ष भाग फंडस कहलाता है। मध्य भाग को बॉडी और निचले हिस्से को गर्भाशय ग्रीवा कहते हैं, जो योनि में खुलता है। हर महीने, संभावित गर्भावस्था के लिए गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है।
अगर गर्भधारण न हो तो पीरियड्स के दौरान यह परत योनि के ज़रिए बाहर निकल जाती है। गर्भाशय, प्रजनन और मेंस्ट्रुअल साइकिल के लिए महत्वपूर्ण है।
गर्भाशय कहां होता है? Where is the uterus located
गर्भाशय, जिसे यूट्रस (Uterus) भी कहा जाता है, महिलाओं के शरीर में एक प्रमुख प्रजनन अंग है। यह महिला के पेल्विक क्षेत्र में होता है, जो नाभि और गुदा (Anus) के बीच में स्थित होता है।
गर्भाशय किस उम्र में बढ़ना शुरू होता है? At what age does the uterus start growing
गर्भाशय की बढ़ने की शुरुआत यौवन के शुरू होने के साथ होती है। इस समय में गर्भाशय के आयामों में वृद्धि और एंडोमेट्रियम की परत मोटी होती है।
साथ में गर्भाशय की आकृति नलीदार आकार से नाशपाती के आकार में आने लगती है। यौवन के दौरान शरीर में बढ़ती सेक्स स्टेरॉयड की सांद्रता गर्भाशय के विकास और आकार में परिवर्तन लाता है।
गर्भाशय में कितनी लेयर होती हैं? How many layers are there in the uterus
गर्भाशय का मतलब स्त्री शरीर में श्रोणी में,मलाशाय और मूत्राशय के बीच में स्थित अंग है। यह मांसपेशी से बना संरचनात्मक अंग उदर श्रोणि कि मध्य रेखा में स्थित है।
इसमें तीन परतें होती हैं:
- पेरिमेट्रियम :- Perimetrium :- सबसे बाहरी, सुरक्षात्मक परत।
- मायोमेट्रियम :- Myometrium :- अत्यधिक मांसपेशीवाली मध्य परत। यह वो परत है जो गर्भावस्था के दौरान फैलता है और प्रसव के दौरान बच्चे को योनि द्वारा बाहर धकेलने के लिए सिकुड़ता है।
- एंडोमेट्रियम :- Endometrium :- यह गर्भाशय की अंदरूनी परत है। यह परत माहवारी के दौरान आपके गर्भाशय से गिर जाती है, जिसे रक्तस्राव रूप में देखा जाता है।
गर्भाशय की संरचना और आकार क्या है? What is the structure and size of the uterus
गर्भाशय के ऊपरी हिस्से में दो नलिकाएँ होती हैं, जिसे डिंबवाही नलिका कहते है। यह निचले भाग में महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा से जुड़ता है, जो योनि प्रसव के दौरान खुलता और पतला होता है।
गर्भाशय का आकार अलग-अलग हो सकता है, लेकिन एक गैर-गर्भवती महिला में यह आमतौर पर एक छोटे नाशपाती के आकार का होता है। यह लगभग 7.5 सेमी (3 इंच) लंबा, 5 सेमी (2 इंच) चौड़ा, और 2.5 सेमी (1 इंच) मोटा होता है। गर्भाशय का वजन लगभग 28.35 ग्राम होता है। गर्भावस्था के दौरान, बढ़ते शिशु को एडजस्ट करने के लिए गर्भाशय का आकार काफी बढ़ जाता है।
यूटरस क्या है, महिलाओं के गर्भाशय की संरचना चार (4) खंड में विभाजित की गई हैं What is the Uterus? The structure of the female uterus is divided into four (4) sections:
- गर्भाशय का बुध्न :- Fundus of the uterus :- यह गर्भाशय का सबसे ऊपरी और चौड़ा हिस्सा है, जो गर्भाशय को डिंबवाही नलिका से जोड़ता है।
- गर्भाशय का कोष :- Corpus uteri :- यह स्त्री के गर्भाशय का मुख्य भाग है, जो डिंबवाही नलिका से शुरू होता है।
- गर्भाशय का इस्थमस :- Isthmus of uterus :- यह गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा के बीच का गर्दन क्षेत्र है।
- गर्भाशय ग्रीवा :- Cervix :- यह गर्भाशय का नीचे का हिस्सा है, जो योनि में खुलता है।
गर्भाशय में बच्चे के विकास के लिए कौन से हार्मोन ज़रूरी होते हैं? Which hormones are necessary for the development of the baby in the uterus?
गर्भावस्था के दौरान शिशु के संपूर्ण विकास के लिए कई हार्मोन की जरूरत होती है। प्रमुख हार्मोन हैं।
- ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन हार्मोन (एचसीजी) :- Human chorionic gonadotropin hormone (hCG) :- यह हार्मोन गर्भावस्था के दौरान विशेष रूप से प्लेसेंटा में बनता है। पहली तिमाही के दौरान मां के रक्त और मूत्र में काफी ज्यादा मात्रा में पाए जाने वाला यह हार्मोन, मतली और उल्टी का कारण हैं।
- ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजन :- Human placental lactogen :- इसे ह्यूमन कोरियोनिक सोमैटोमैमोट्रोपिन भी कहा जाता है। यह प्लेसेंटा द्वारा बनता है और भ्रूण को पोषण देता है। साथ में यह स्तनपान के लिए मां के स्तनों में दुग्ध ग्रंथियों को उत्तेजित भी करता है।
- एस्ट्रोजेन :- Estrogen :- अंडाशय में बननेवाला यह हार्मोन महिला यौन लक्षणों को विकसित करने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ गर्भावस्था को बनाए रखने में मदद करता है।
- प्रोजेस्टेरोन :- Progesterone :- यह हार्मोन गर्भावस्था के दौरान अंडाशय और प्लेसेंटा द्वारा बनाया जाता है, जो निषेचित अंडे के आरोपण के लिए गर्भाशय की परत को मोटा करने को उत्तेजित करता है।
गर्भाशय के कार्य क्या होते है? What are the functions of the uterus
गर्भाशय का मतलब केवल प्रजनन अंग नही है, इसके अलावा भी यह अंग स्त्री के स्वास्थ्य के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्भाशय के तीन मुख्य कार्य हैं:
- प्रजनन क्षमता :- Fertility :- गर्भधारणा के दौरान भ्रूण को सही पोषण देकर उसे शिशु रूप में विकसित करने में गर्भाशय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- माहवारी :- Menstruation :- गर्भाशय अस्तर वह जगह है जहां हर महीने, गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है। यदि गर्भधारण नहीं होता है। तो यह परत पीरियड्स के दौरान निकल जाती है।
- गर्भावस्था :- Pregnancy :- गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे भ्रूण के विकास के लिए गर्भाशय बड़ा होता है। साथ में जब बच्चा योनि द्वारा जन्म लेता है तब गर्भाशय की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, और बच्चे को योनि से बाहर धकेलने में मदद करती है।
- हार्मोन उत्पादन :- Hormone production :- गर्भाशय हार्मोन रेगुलेशन में भी मदद करता है, जो मेंस्ट्रुअल साइकिल और प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
गर्भाशय, महिला प्रजनन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग है जो गर्भावस्था, मासिक धर्म, प्रसव और हार्मोन नियंत्रण में मुख्य भूमिका निभाता है।
गर्भाशय क्यों महत्वपूर्ण है? Why is the uterus important?
यूटरस क्या होता है इससे ज्यादा ये जानना जरुरी है के, गर्भाशय क्यों महत्वपूर्ण है ।
- फलित बीज (भ्रूण) का प्रत्यारोपण गर्भाशय में होता है।
- यह अंग भ्रूण को बढ़ने के लिए सुरक्षा और पोषण प्रदान करता है।
- यह अंग माहवारी के दौरान रक्त और ऊतक तैयार करता है।
गर्भाशय से संबंधित सामान्य समस्याएँ Common problems related to the uterus
यह स्थितियाँ एक महिला के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इनका समय पर इलाज ज़रूरी है।
गर्भाशय से संबंधित कुछ सामान्य समस्याओं में निम्न शामिल हैं:
- एंडोमेट्रियल पॉलीप्स :- Endometrial polyps :- यह गर्भाशय के अस्तर में होनेवाली ऊतक वृद्धि है। गर्भाशय की आंतरिक दीवार पर छोटी, सौम्य वृद्धि जो अनियमित रक्तस्राव का कारण बन सकती है।
- कैंसर :- Cancer :- गर्भाशय या एंडोमेट्रियल कैंसर गर्भाशय की परत में विकसित हो सकता है।
- श्रोणि का सूजन :- Pelvic inflammation :- यह प्रजनन अंगों का संक्रमण से होता है, जो योनि, ग्रीवा से होते हुए गर्भाशय को ग्रसित कर सकता है
- गर्भाशय का बाहर निकलना :- Prolapse of the uterus :- जब पेल्विक की मांसपेशियां कमज़ोर होती हैं तो गर्भाशय, योनि से बाहर निकल जाता है।
- बांझपन :- Infertility :- इस स्थिति में स्त्री को गर्भ धारण करने में विफलता आती है।
- एंडोमेट्रियोसिस :- Endometriosis :- इस स्थिति में गर्भाशय के अस्तर के परत गर्भाशय के अलावा अन्य जगहों पर बढ़ने लगता है। यह स्थिति जहां गर्भाशय के बाहर बढ़ता हुआ टिश्यू दर्द और निःसंतानता का कारण बन सकता है।
- फाइब्रॉएड :- Fibroids :- यह गर्भाशय में होनेवाली छोटी, कैंसर रहित गांठे है। गर्भाशय की दीवार में गैर-कैंसरयुक्त वृद्धि, जो दर्द और भारी रक्तस्राव का कारण बन भी सकती है।
- गर्भाशय ग्रीवा का कर्क रोग :- Cervical cancer :- यह कर्क रोग गर्भाशय ग्रीवा में शुरू होता है, जो गर्भाशय का निचला, संकरा सिरा होता है।
- डिम्बग्रंथि का कर्क रोग :- Ovarian cancer :- यह कर्क रोग गर्भाशय के दोनो तरफ स्थित अंडाशय को ग्रसित करता हैं।
- एडेनोमायोसिस :- Adenomyosis :- जब गर्भाशय की परत में मांसपेशियों का विकास होता है, तो दर्द और हेवी पीरियड्स हो सकते हैं।
- संक्रमण :- Infection :- पेल्विक सूजन की बीमारी (पीआईडी) गर्भाशय को प्रभावित कर सकती है, जिससे दर्द और प्रजनन संबंधी समस्याएं होती हैं।
गर्भाशय के रोग के लक्षण Symptoms of uterine disease
यूटरस क्या होता है, ये जानना इसलिए जरूरी है, ताकि महिलाएं इन लक्षणों को लेकर जागरूक हो और सही समय पर उन्हें इलाज मिले सके। नीचे बताए गए लक्षण गर्भाशय से जुड़े बीमारियो के संकेत हो सकते है। जैसे :-
- माहवारी के साथ समस्याएं जैसे:- दर्द, अनियमितता और सफेद पानी
- अनियमित रक्तस्राव - रक्तस्राव नियमित से अधिक दिनों तक बना रहता है
- पेडू में दर्द जो सूजन या गर्भाशय के मांसपेशियों के सिकुड़ने से होता है
- अनियमित योनि स्राव संक्रमण के दौरान योनि से रक्त या सफेद पानी स्राव होता है
- पेशाब करने में दर्द जो सूजन या संक्रमण के वजह से होता है
- गर्भधारणा में दिक्कतें गर्भाशय से जुडी समस्या अक्सर गर्भ रुकने में बाधा बनती है
गर्भाशय विकारों का निदान Diagnosis of uterine disorders
गर्भाशय का मतलब है बच्चेदानी, जो माहवारी और गर्भधारणा के दौरान महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। इसीलिए गर्भाशय से जुड़ी बीमारियों का सही समय पर निदान और चिकित्सा करना आवश्यक है। आम तौर पर जांच के कारण है:
- कैंसर की जांच
- गर्भावस्था की निगरानी
- प्रजनन संबंधी समस्याओं का निदान
गर्भाशय से जुड़े कुछ आम परीक्षण हैं:
- श्रोणि परीक्षा :- Pelvic exam :- इस परीक्षा में डॉक्टर आपके गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा, योनि, अंडाशय और अन्य प्रजनन अंगों की परीक्षा करते है।
- अल्ट्रासाउंड :- Ultrasound :- यह ध्वनि तरंगों के माध्यम से गर्भाशय के अंदर की तस्वीर बनाता है। इस तस्वीर से अंदर के अंगो की स्थिति पता चलती है।
- गर्भाशयदर्शन (हिस्टेरोस्कोपी) :- Hysteroscopy :- इसमें डॉक्टर गर्भाशय के अंदर तस्वीर लेने के लिए एक पतली नली को आपके योनि द्वारा गर्भाशय में डालते है। यह परीक्षा अक्सर डिंबवाही नलिका के रुकावट देखने के लिए की जाती है।
- एमआरआई :- MRI :- आपके श्रोणि में आपके गर्भाशय और अन्य प्रजनन अंगों की तस्वीरें लेने के लिए चुंबकीय और रेडियो तरंगों का उपयोग करता है।
गर्भाशय विकारों के लिए उपचार Treatment for uterine disorders
महिलाओं को गर्भाशय से जुड़ी कई सारे बीमारियां हो सकती है। हर रोग का उपचार भिन्न-भिन्न होता है। हर एक बीमारी का इलाज रोग का प्रकार, रोग का कारण और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है।
यहां कुछ आम बीमारियां और उनके इलाज के कुछ तरीके नीचे बताए गए है।
दवाईयां :- medicines
- गर्भाशय फाइब्रॉएड का इलाज ओटीसी, याने के (बिना परछे के मेडिकल दुकान में मिलानेवाली दवा) दर्द दवाइयां जैसे एसिटामिनोफेन और इबुप्रोफेन जैसी दवाओं के साथ किया जाता है।
- अत्यधिक रक्तस्राव से एनीमिया होने पर आयरन की खुराक (सप्लीमेंट्स) दी जाती हैं।
- गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग फाइब्रॉएड के लक्षण जैसे माहवारी और माहवारी के दौरान भारी रक्तस्राव से राहत के लिए दिया जाता है।
- गर्भाशय के कर्क रोग में रसायन चिकित्सा (कीमोथेरेपी) कि दवाईयां दी जाती है। यह दवाईयां कैंसर ग्रसित कोशिकाओं को नष्ट करती है।
- एंडोमेट्रियोसिस दर्द से राहत के लिए ओवर-द-काउंटर दवा या एनएसएआईडी (बिना स्टेरॉइड के सुझान रहित दवा ) दर्द से राहत देते है।
शल्य चिकित्सा :- surgery
- मायोमेक्टोमी :- Myomectomy :- यह एक शल्य चिकित्सा है जहा गर्भाशय को बिना नुकसान पहुंचाए फाइब्रॉएड की गांठ को हटा दिया जाता है।
- हिस्टेरोस्कोपी :- Hysteroscopy :- इस प्रक्रिया में योनि और गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से और गर्भाशय में एक स्कोप (एक पतली, लचीली ट्यूब जैसी उपकरण) डालकर फाइब्रॉएड को हटाया जाता है।
- लैपरोटॉमी प्रक्रिया :- Laparotomy procedure :- यहाँ आपके पेट में एक चीरा लगाकर, फाइब्रॉएड को हटा दिया जाता है।
गर्भाशय के बीमारियों का रोकथाम Prevention of uterine diseases
गर्भाशय का मतलब जानने के साथ हर महिला को इससे जुड़ी बीमारियों को रोकथाम करने के बारे में भी जानकारी होना आवश्यक है। वैसे तो गर्भाशय से जुड़ी हर बीमारी को रोका नहीं जा सकता। पर कुछ एतियात बरतने से जल्दी निदान और इलाज किया जा सकता है। जैसे:
- नियमित जांच :- Regular checkups :- किसी भी संभावित गर्भाशय संबंधी समस्याओं का जल्द पता लगाने और उनका तुरंत समाधान करने के लिए नियमित स्त्री रोग संबंधी जांच का समय निर्धारित करें। इन जांचों में गर्भाशय के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए पैल्विक परीक्षण, पैप परीक्षण और अल्ट्रासाउंड शामिल हो सकते हैं।
- सुरक्षित यौन संबंध :- Safe sex :- संक्रमणों से बचने के लिए सुरक्षित यौन संबंध बनाएं। सुरक्षित यौन व्यवहार, जैसे कंडोम का उपयोग करना और यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) के लिए परीक्षण करवाना, उन संक्रमणों को रोकने में मदद कर सकता है जो गर्भाशय संबंधी बीमारियों का कारण बन सकते हैं, जैसे कि पेल्विक सूजन रोग (पीआईडी)।
- स्वस्थ वजन बनाए रखना :- Maintaining a healthy weight :- संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ वजन बनाए रखने से गर्भाशय संबंधी स्थितियों, जैसे एंडोमेट्रियल कैंसर और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) का खतरा कम हो सकता है, जो गर्भाशय को प्रभावित कर सकते हैं।
- हार्मोनल संतुलन :- Hormonal balance :- हार्मोनल असंतुलन गर्भाशय संबंधी विकारों में योगदान कर सकता है। स्वस्थ जीवनशैली विकल्पों, तनाव प्रबंधन और, यदि आवश्यक हो, उचित चिकित्सा हस्तक्षेप के माध्यम से हार्मोनल संतुलन बनाए रखने से गर्भाशय फाइब्रॉएड और एंडोमेट्रियोसिस जैसी कुछ गर्भाशय स्थितियों को रोकने में मदद मिल सकती है।
- व्यायाम :- Exercise :- नियमित रूप से हल्का-फुल्का व्यायाम करें।
- तनाव :- Stress :- तनाव को कम करने के लिए योग या ध्यान अभ्यास करें।
- मेंस्ट्रुअल साइकिल :- Menstrual cycle :- इसे ट्रैक करें और अनियमितता के मामलों में अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
- हाइड्रेट रहें :- Stay hydrated :- पर्याप्त पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें, जूस का सेवन करें।
- स्वस्थ आहार :- Healthy diet :- फल, सब्जी, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार खाएं।
- धूम्रपान :- Smoking :- धूम्रपान के सेवन से गर्भाशय के कैंसर सहित गर्भाशय संबंधी बीमारियों के बढ़ने का खतरा अधिक होता है। धूम्रपान छोड़ना या पूरी तरह से परहेज करने से इस जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
गर्भाशय निकालने के बाद शरीर में क्या होता है? What happens to the body after a hysterectomy
अधिकांश महिलाएं उत्रसंधि से लगभग चार से छह सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। आपकी पूर्वव्रत आरोग्य प्राप्ति इस बात पर निर्भर करती है कि आपको किस प्रकार की उत्रसंधि हुई थी और कैसे की गई थी। योनि और लैप्रोस्कोपिक उत्रसंधि से उभरने में पेट के उत्रसंधि से उभरने में कम समय लगता है।
इस दौरान आपको अपने शरीर में
- चीरा लगी जगह पर दर्द या खुजली महसूस हो सकती है
- आपकी माहवारी रुक जायेगी
- कभी-कभी, आपको फूलापन महसूस हो सकता है
- शल्य चिकित्सा के बाद, चार से छह सप्ताह तक योनि से हल्का रक्तस्राव हो सकता है
- लगभग चार सप्ताह तक चीरा लगाने की जगह पर खिंचाव या असुविधा महसूस हो सकता हैं
- चीरे के आसपास जलन या खुजली महसूस हो सकती है
क्या बच्चेदानी निकालने के बाद पीरियड आता है? Do periods occur after hysterectomy
बच्चेदानी निकालने के बाद उस महिला की पीरियड रुक जायेगी और वह गर्भधारणा नही कर पायेगी।
- जिन महिलाओं में उप कुल (सबटोटल) गर्भाशय-उच्छेदन होता हैं, उन्हें प्रक्रिया के बाद एक साल तक हल्का रक्तस्राव हो सकता है।लेकिन एंडोमेट्रियल अस्तर की थोड़ी मात्रा आपके गर्भाशय ग्रीवा में रह जाती है। इस वजह से हल्का रक्तस्राव होता है, जो माहवारी जैसा लग सकता है।
- यदि इस शल्य चिकित्सा में अंडाशय को रजोनिवृत्ति से पहले आपके गर्भाशय से हटा दिया जाता है, तो वह स्त्री रजोनिवृत्ति के लक्षणों का अनुभव कर सकती है।
गर्भाशय निकालने की जरूरत कब पड़ती है? When is a hysterectomy necessary
आपके स्वाथ्य प्रदाता निम्न लक्षणों के इलाज के लिए गर्भाशय को निकाल सकते हैं
- योनि से असामान्य और अनियमित रक्तस्राव जो अन्य उपचार द्वारा रोका नहीं जाता हो
- माहवारी के साथ असहनीय दर्द जिसमे अन्य उपचार द्वारा राहत नहीं मिलती हो
- गर्भाशय में कैंसर रहित गांठे हो
- गर्भाशय से निगडित श्रोणी में दर्द जो उपचारों द्वारा प्रबंधित नहीं हो रही हो
- गर्भाशय का प्रोलैप्स जिससे मूत्र असंयम या मल त्याग में कठिनाई होती हो
- गर्भाशय का कर्करोग
- गर्भाशय पॉलीप्स या एडिनोमायोसिस
गर्भाशय कैसे निकाला जाता है? How is the uterus removed
आपके शल्य चिकित्सक आपके रोग और उसके लक्षणों के आधार पर किस प्रकार का शल्य प्रक्रिया करनी है इसका निर्धार करते है।
आपका स्वास्थ्य सेवा प्रदाता कई अलग-अलग शल्य चिकिसा पद्धति का उपयोग कर सकता है। जैसे
- योनि गर्भाशयोच्छेदन में योनि के ऊपर एक चीरा लगाकर आपका गर्भाशय निकाल दिया जाता है।
- लैप्रोस्कोपिक गर्भाशयोच्छेदन में नाभी द्वारा एक छोटे से चीरे के माध्यम से एक पतली ट्यूब डाली जाती है। शल्य चिकित्सा के उपकरण कुछ अन्य छोटे चीरों के माध्यम से डाले जाते हैं। गर्भाशय को पेट में चीरों के माध्यम से या आपकी योनि के माध्यम से छोटे टुकड़ों में निकाला जाता है।
- रोबोटिक गर्भाशयोच्छेदन में मशीन की मदद से गर्भशाय को निकाला जाता है।
- उदर गर्भाशयोच्छेदन में पेट में छह से आठ इंच लंबे चीरे के माध्यम से आपके गर्भाशय को बाहर निकाला जाता है।
गर्भाशय निकालने के क्या फायदे हैं? What are the benefits of hysterectomy?
यदि आप गर्भाशय के कैंसर के उच्च जोखिम में हैं, तो गर्भाशय निकालने से इस जोखिम को कम किया जा सकता है। इस प्रकार से संभावित रूप से गर्भाशय निकालकर जान बचाई जा सकती है।)
परामर्श
गर्भाशय महिलाओं के जीवन में माहवारी, गर्भावस्था और प्रजनन क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महिलाओं के शरीर के अधिकांश अंगों की तरह, गर्भाशय भी ऐसे रोग और संक्रमण विकसित कर सकता है जिनके लिए चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है।
आमतौर पर महिलाएं पीरियड्स और प्रेगनेंसी को लेकर बहुत कम जागरूक होती हैं। इसलिए पीरियड्स में अनियमितता आने, सामान्य से अधिक या कम ब्लीडिंग होने, ब्लीडिंग के रंग में बदलाव या उससे बदबू आने या प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कोई समस्या होने पर वे तुरंत घबरा जाती हैं।
अगर आपको ऐसा लग रहा है कि ओव्यूलेशन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जांच करा कर इलाज करवाना चाहिए।
अगर महिलाओं को गर्भधारण करने में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का कोई भी परेशानी हो रहा है तो कोई भी उपाय करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें
गर्भावस्था के दौरान कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।
किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं एवं सप्लीमेंट का नियमित रूप से सही समय पर सेवन करें।
अगर आपको पीरियड्स या प्रेगनेंसी से संबंधित किसी तरह की कोई परेशानी या कन्फ्यूजन है तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर इस बारे में बात करना चाहिए।
यह एक सामान्य जानकारी है अगर आपको पीरियड्स मिस होने या प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए।
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