रीढ़ की हड्डी में दर्द के क्यों होता हैं। कारण, लक्षण और उपाय? Why does spinal pain occur? Causes, symptoms, and remedies.
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रीढ़ की हड्डी में दर्द के क्यों होता हैं। कारण, लक्षण और उपाय? Why does spinal pain occur? Causes, symptoms, and remedies.
रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगो में से एक है अगर किसी कारण वश इनमे परेशानी आ जाए तो ये हमारे पूरे शरीर की गतिविधियों व तालमेल को ख़राब कर देती है। पर रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या क्यों होती है और इसको हम कैसे ठीक कर सकते है इसके बारे में आज के इस आर्टिकल में बात करेंगे ;
हैलो फ्रेंड्स!
मैं { DR MD GYASUDDIN } { डॉक्टर मोहम्मद ग्यासुद्दीन }
मैं आप लोगों को हेल्थ से जुड़ी जानकारियां इस लेख (आर्टिकल) के जरिये देता हूं। मेरे इस पोस्ट से आपको कुछ मदद मिले यही मेरा लक्ष्य है हमारा उद्देश्य है कि आपको इस विषय की पूरी जानकारी मिले और अगर आप या आपका कोई करीबी इस स्थिति से गुजर रहा है, तो आप बेहतर तरीके से इसका सामना कर सकें।
आइए जानते हैं, क्या, क्यों, कैसे होता है। कारण, लक्षण और उपचार के बारे में इत्यादि।
क्या है रीढ़ की हड्डी ?
मानव शरीर के रचना में ‘रीढ़ की हड्डी’ या मेरुदंड या बैकबोर्न, पीठ की हड्डियों का समूह है जो मस्तिष्क के पिछले भाग से निकलकर गुदा के पास तक जाती है। इसमें 33 खण्ड होते हैं। तो वही रीढ़ की हड्डी मेरुदण्ड के भीतर ही मेरूनाल में मेरूरज्जु के पास सुरक्षित रहता है।
जवान उम्र के लोगों में इसकी लंबाई आमतौर पर 40 सेंटीमीटर और चौड़ाई 2 सेंटीमीटर तक होती है। वही इसकी संरचना की बात करे तो इसमें कई सारी नसें और सेल्स रहते हैं जो कि हमारे दिमाग से पूरे शरीर तक संदेश पहुंचाते हैं।
रीढ़ की हड्डी के दर्द को न लें हल्के में
आजकल रीढ़ की हड्डी में दर्द रहना बहुत ही आम बात हो गई है। युवावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक हर कोई इससे पीड़ित है। शुरू-शुरू में लोग इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, लेकिन बाद में यही दर्द जब उनके लिए असहनीय हो जाता है और किसी बड़ी बीमारी का सबब बन जाता है तब वे डाक्टर के पास जाते हैं। इस दर्द को सामान्य नहीं लेना चाहिए।
रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या क्यों उत्पन होती है ?
रीढ़ की हड्डी में यदि किसी प्रकार की क्षति पहुंचती है तो इससे व्यक्ति के जीवन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
वही कई प्रकार की चोट और बीमारियों की वजह से रीढ़ की हड्डी का सेहत पर फर्क पड़ता है। यदि इन चोटों का समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये आगे चल के भयंकर बीमारी का रूप धारण कर सकती है।
रीढ़ की हड्डी में दर्द का कारण।
इस तरह के हड्डियों से संबंधित कई प्रमुख कारण हो सकते हैं।
यह समस्या पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा देखने को मिल जाती है।
- चोट या फिर मोच के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव से ऊतकों की क्षति या फिर लिगामेंट में सूजन होंने से रीढ़ का दर्द बढ़ सकता है।
- रीढ़ की हड्डी का दर्द सही से खड़े ना होने से भी हो सकता है। ज्यादा समय तक झुक कर खड़े होने से हड्डियों में झुकाव हो जाता है जिससे सही ऊर्जा और रक्तवाहिनियों में संक्रमण होने की संभावना प्रबल हो जाती है। इस वजह को भी एक मुख्य कारक माना जा सकता है।
- शरीर में अवशिष्ट पदार्थों के जमाव से भी कई तरह के हड्डी विकार सामने आते हैं। अवशिष्ट पदार्थो के जमाने से हड्डियों के जोड़ों में तेज दर्द हो सकता है इसमें रीढ़ की हड्डी भी शमिल है।
- खून में यूरिया का बढा हुआ स्तर भी रीढ़ में दर्द बढ़ा सकता है। यूरिक एसिड से हड्डियों को नुकसान तो होता ही है साथ ही किडनी समेत कई अन्य आंतरिक अंग भी प्रभावित होते हैं।
- रीढ़ की हड्डी में आंतरिक विकार जैसे टीवी सहित कुछ अन्य रोग बेहद जटिल समस्या उत्पन्न कर सकते हैं।
- पीठ के दर्द को वजह से भी कई बार रीढ़ की हड्डियां प्रभावित हो जाती हैं। कई तरह के रोगों को वजह के रीढ़ की हड्डी में दर्द हो ही जाता है।
- खानपान में त्रुटि या समझौता अक्सर हड्डियों पर भारी पड़ता है। आहार में विकार रीढ़ की हड्डियों को भारी क्षति पहुंचा सकता है।
- बदलती जीवनशैली से इंसान हमेशा परेशान रहता है। इसकी वजह से कई बार तनाव और अनिद्रा उत्पन्न हो जाती है जो रीढ़ के रोग का बड़ा कारण बन जाती है।
- कई अनुवांशिक समस्याओं की वजह से भी रीढ़ की हड्डी की समस्या का होना देखा जाता है जो गठिया या अर्थराइटिस के रूप में सामने आती रहती है।
बदलता मौसम भी रीढ़ की हड्डियों को कर सकता है प्रभावित।
मौसम का बदलाव रीढ़ की हड्डी में दर्द उत्पन्न कर सकता है। सर्दी के मौसम में जहां हड्डियों के जोड़ों की समस्या बढ़ती है तो दूसरी तरफ गर्मी और बरसात भी इसके बड़े कारण होते हैं। गर्मियों के मौसम में कई बार शरीर निर्जलीकरण की तरफ जाता है जिसके कई कारण हो सकते हैं। इस वजह से लू लगने या अन्य कारणों से हड्डियों के दर्द बढ़ जाते हैं। बरसात या गर्मी के दिनों में बहती हुई पुरवाई हवा हड्डियों के पुराने चोट उभार देती है। पुरानी चोट के उभरने की वजह से रीढ़ की समस्या तो होती ही है साथ ही कई अन्य हड्डी रोग उत्पन्न होने लगते हैं। कई बार वायुमण्डल के दबाव से मौसम का परिवर्तन कई तरह के हड्डी विकारों को उत्पन्न करने का कारण बन जाता है।
पुरुषों में रीढ़ की हड्डी का दर्द।
कई लोग जो हमेशा झुक कर खड़े होते हैं उन्हें यह समस्या हो ही जाती है। झुककर खड़े होने से रीढ़ की हड्डी में खिंचाव ओर मुड़ाव होने लगता है। झुकाव की वजह से हड्डियों को सही पोषण नही मिल पाता। कई बार यही आदत जोड़ों में गांठ या ट्यूमर का रूप धारण कर लेता है। ट्यूमर बन जाने पर इंसान के दिमाग की तरंगों का रीढ़ को हड्डी को सही निर्देश ना दे पाने से समस्या जटिल होने लगती है। इसके अलावा भी कई अन्य कारण है जिससे रीढ़ की हड्डियां कमजोर भी हो जाती हैं।
कुपोषण ओर प्रदूषण एक बड़े कारण हैं साथ ही तनाव और अवसाद भी कई बार पुरुषों को इस तरह की बीमारियों की चपेट में ले लेता है। बढ़ता वजन या मोटापा भी इसके बड़े कारण माने जाते हैं।
महिलाओं में रीढ़ की हड्डी का दर्द।
महिलाओं की काया पुरुषों की तुलना में ज्यादा कोमल होती है। कामकाजी महिलाएं जो ज्यादा देर तक खड़ी होकर दिनचर्या निपटने का काम करती हैं उनकी हड्डियों में दर्द उत्पन्न हो ही जाता है। रीढ़ में दर्द कई तरह के हार्मोन्स के परिवर्तन की वजह से भी देखा जा सकता है। गर्भवती महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। गर्भावस्था के दौरान कई बार कमर के नीचे दर्द भी रीढ़ की हड्डी के दर्द का कारण बन सकता है। बेशक यह कई वजहों से देखा जाता है। कुपोषण सहित शरीर में कैल्शियम की कमी भी कई बार इस तरह की समस्या का कारण बन जाता है।
महिलाओं में रीढ़ की समस्या 30 से 50 साल की उम्र में ज्यादा दिखाई देती है। बेशक कई बार यह समस्या अर्थराइटिस या गठिया रोग के रूप में देखने को मिल जाती है। बढ़ता मोटापा और शुगर रोगों की वजह से कई बार रीढ़ के रोग बड़ी तेजी परेशानी की वजह बन जाते हैं।
रीढ़ की हड्डी में दर्द के लक्षण क्या है ? / रीढ़ की हड्डी में दर्द के प्रमुख लक्षण।
- कमर के निचले हिस्से में दर्द और कुछ मौकों पर जकड़न का एहसास होना।
- इस प्रकार का दर्द कुछ लोगों को रात में भी परेशान करता है।
- कभी-कभी चलने फिरने या एक्सरसाइज के बाद भी दर्द बढ़ जाता है।
- इसके अलावा कई बार दर्द कमर से होते हुए कुल्हें तक भी जा पहुँचता है।
- कई ऐसे लोग हैं जिन्हें ऐसे मौके पर सुन्नता का एहसास होता है।
- सुबह उठते वक़्त कमर में तेज दर्द का होना।
रीढ़ की हड्डियों में कई डिस्क होती है जो आपस में एक चैन की तरह एक दूसरे से जुड़ी होती है। हड्डियों के चेन की तरह जुड़ाव के दौरान किसी भी भाग में आये संक्रमण या अन्य कारणों से होने वाले लक्षण भिन्न- भिन्न ही सकते हैं।
- रीढ़ की हड्डियों में संकुचन होने की स्थिति में सूजन महसूस होती है और लगता है कि शरीर इधर उधर करने पर भी दर्द हो जाएगा।
- रीढ़ के निचले भाग में दर्द का अनुभव हो सकता है यह तेज या फिर धीमा हो सकता है।
- पेशाब में जलन और मलत्याग में परेशानी का अनुभव हो सकता है।
- आंतरिक रोगों की वजह से पीठ में दर्द होने से रीढ़ को इधर उधर करने में परेशानी या पीड़ा का अनुभव महसूस किया जा सकता है।
- बुखार या गर्दन में तेज दर्द का अनुभव होने की संभावना बढ़ जाती है।
रीढ़ की हड्डी को दर्द से बचाने के उपाय क्या है ? / रीढ़ की हड्डी का दर्द होने से पहले रोकथाम।
रीढ़ का दर्द होने से पहले इसकी रोकथाम जहां बेहद सरल है
- रीढ़ की हड्डी को बेहतर बनाने के लिए स्वस्थ खानपान का सेवन करे। खानपान या आहार की गुणवत्ता में सुधार की बेहद आवश्यकता होती है। आहार की गुणवत्ता में सुधार से जीवन को कई तरह के कष्टों से मुक्ति दिलाई जा सकती है।
- अपनी डाइट में ताज़ा फल, सब्जियां, दालें और प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें। अपनी जीवनशैली में व्यायाम को जरूर शामिल करे।
- अनियमित जीवनशैली या दिनचर्या में सुधार लाने की जरूरत होती है। दिनचर्या नियमित कर रीढ़ के दर्द से बच सकते हैं।
- महिलाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके अंदर कैल्शियम या विटामिन डी की मात्रा की कमी न होने पाए। इस कमी से बचने पर उन्हें इस तरह की समस्या से निजात मिलेगी।
- कभी भी झुककर ना खड़े हों। सीधे चलने एवं सीधे खड़े रहने की आदत डालें। ज्यादा झुक कर बैठने से बचें। सोते समय अपनी पोजी़शन को व्यवस्थित रखें। यदि आपको पेट के बल सोने की आदत है तो इस आदत को ज़रूर बदले।
- ज्यादा देर तक एक जगह बैठकर काम करने से बचें। यदि आप लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं तो अपने बैठने की पोजी़शन को बदलते रहे। ज़्यादा लंबे समय तक यदि आप ड्राइव कर रहे है तो अपनी पीठ के पीछे तकिए का सहारा ले
- यदि रीढ़ की हड्डी में दर्द ज्यादा बना हुआ है, तो इसके लिए डॉक्टरों के सलाह पर बेहतरीन इलाज व दवाइयों का विकल्प चुने। क्युकि शुरुआती दौर के दर्द को कंट्रोल करना आसान है, नहीं तो बाद में चलकर ये भयंकर रूप धारण कर सकता है।
परामर्श
अगर आपको रीढ़ की हड्डी में किसी भी तरह का कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए।और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए
कोई भी उपाय करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें
अगर आपको किसी भी प्रकार की कोई भी शारीरिक समस्या हो रही है; तो तुरंत डॉक्टर से सलाह ले और अपने आप से किसी भी दवाई का सेवन करने से बचें।
कोई भी समस्या होने पर किसी भी दवाई , तेल ,जेली या क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले।
यह एक सामान्य जानकारी है अगर आपको हड्डी से जुड़ी किसी भी तरह का कोई भी परेशानी, कारण या लक्षण दिखाइ दे रहे हैं तो इन लक्षणों को नजर अंदाज न करें या इससे रीलेटेड कोई भी समस्या हो रहा है तो आपको डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। और इसका इलाज कराना चाहिए
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